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Centre Notifies New Deep Sea Fishing Rules Digital Access Fishermen Empowerment And Ban On Foreign Vessels In Indian Waters Hindi Headline
Explained: समुद्र में मछली पकड़ने के लिए नए नियम लागू होने का क्या मतलब, भारतीय मछुआरों को कैसे मिलेगा फायदा?
गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा
Published by: Himanshu Mishra
Updated Mon, 10 Nov 2025 11:11 AM IST
सार
सरकार मछुआरों के लिए प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, अंतरराष्ट्रीय अध्ययन यात्राएं और मार्केटिंग सपोर्ट देगी। वित्तीय सहयोग प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) और मत्स्य एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास निधि (FIDF) के तहत मिलेगा।
भारत सरकार ने गहरे समुद्र में मछली पकड़ने (Deep-Sea Fishing) को लेकर नए नियमों की अधिसूचना जारी की है, जो भारतीय मत्स्य क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकती है। ये नियम देश के विशेष आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone – EEZ) में मछली पकड़ने की गतिविधियों को नियंत्रित करेंगे और भारतीय मछुआरों, सहकारी समितियों और छोटे मछुआरों को सशक्त बनाने पर केंद्रित हैं।
साथ ही, सरकार ने विदेशी जहाजों के भारतीय जलक्षेत्र में मछली पकड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। केंद्र ने यह नियम 4 नवंबर 2025 को अधिसूचित किए, जो वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में की गई घोषणा को पूरा करते हैं। इन नियमों के माध्यम से भारत अपने गहरे समुद्र में मौजूद उच्च मूल्य वाली ट्यूना (Tuna) जैसी प्रजातियों का दोहन कर सकेगा, जो अब तक पड़ोसी देश श्रीलंका, मालदीव, इंडोनेशिया और यूरोपीय देशों द्वारा पकड़ी जा रही थीं।
सहकारी समितियों और मछुआरा संगठनों को प्राथमिकता
नए ढांचे के तहत फिशरमैन कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ और फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशंस (FFPOs) को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्हें आधुनिक तकनीक से लैस जहाजों के माध्यम से गहरे समुद्र में मछली पकड़ने की अनुमति दी जाएगी।
‘मदर-एंड-चाइल्ड वेसल’ मॉडल — एक नई पहल
सरकार ने पहली बार ‘मदर-एंड-चाइल्ड वेसल’ कॉन्सेप्ट को शामिल किया है। इसके तहत बड़े जहाज (मदर वेसल) समुद्र में ही छोटी नौकाओं (चाइल्ड वेसल्स) को ईंधन, भोजन और भंडारण की सुविधा देंगे। यह मॉडल विशेष रूप से अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप द्वीप समूह के लिए उपयोगी होगा, जो भारत के कुल EEZ क्षेत्र का 49 प्रतिशत हिस्सा हैं। इसके अलावा, मध्य समुद्र में मछली के ट्रांस-शिपमेंट को भी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियामकीय ढांचे के तहत अनुमति दी गई है।
हानिकारक मछली पकड़ने की तकनीकों पर प्रतिबंध
समुद्री पारिस्थितिकी की सुरक्षा के लिए केंद्र ने कई हानिकारक मछली पकड़ने की प्रथाओं पर प्रतिबंध लगाया है। अब एलईडी लाइट फिशिंग, पेयर ट्रॉलिंग और बुल ट्रॉलिंग पूरी तरह से प्रतिबंधित होंगी। इसके साथ ही, विभिन्न मछलियों के लिए न्यूनतम कानूनी आकार तय किया जाएगा और फिशरीज मैनेजमेंट प्लान राज्य सरकारों और हितधारकों के साथ मिलकर तैयार किए जाएंगे।
डिजिटल एक्सेस पास प्रणाली‘ReALCraft Portal’
नए नियमों के तहत मशीनचालित और बड़े मोटराइज्ड जहाजों के लिए ‘एक्सेस पास’ अनिवार्य कर दिया गया है। यह पास ReALCraft पोर्टल से नि:शुल्क ऑनलाइन प्राप्त किया जा सकेगा। छोटे और पारंपरिक मछुआरों को इस नियम से छूट दी गई है। पोर्टल पर पहले से ही 13 तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 2.38 लाख मछली पकड़ने वाले जहाज पंजीकृत हैं। इनमें से 1.72 लाख छोटे जहाज मुक्त हैं, जबकि 64,187 मशीनीकृत नौकाओं को एक्सेस पास लेना अनिवार्य होगा।
विदेशी जहाजों को प्रवेश की अनुमति नहीं
नए नियमों के तहत किसी भी विदेशी जहाज को भारत के EEZ क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह निर्णय भारतीय छोटे मछुआरों और सहकारी समितियों के हितों की रक्षा के लिए लिया गया है।
निर्यात में पारदर्शिता और ट्रेसबिलिटी
ReALCraft पोर्टल को मरीन प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (MPEDA) और एक्सपोर्ट इंस्पेक्शन काउंसिल (EIC) के साथ जोड़ा जा रहा है।
इससे Fish Catch Certificate और Health Certificate जारी करने की प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी होगी।
यह सिस्टम सीफूड निर्यात के लिए ट्रेसबिलिटी, स्वच्छता (Sanitary Compliance) और ईको-लेबलिंग सुनिश्चित करेगा, जिससे भारतीय मछली उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में और प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।
भारतीय EEZ में पकड़ी गई मछलियां होंगी ‘Indian Origin’
नए नियमों के अनुसार, भारतीय EEZ (संलग्न क्षेत्र से परे) में पकड़ी गई मछलियों को अब ‘इंडियन ओरिजिन’ माना जाएगा।
इससे बंदरगाह पर लाए जाने पर उन्हें आयातित वस्तु (Imports) नहीं माना जाएगा, जिससे राजस्व और सीमा शुल्क (Customs) से जुड़े अड़चनें खत्म होंगी।
मछुआरों के लिए प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता
सरकार मछुआरों के लिए प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, अंतरराष्ट्रीय अध्ययन यात्राएं और मार्केटिंग सपोर्ट देगी। वित्तीय सहयोग प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) और मत्स्य एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास निधि (FIDF) के तहत मिलेगा।
सुरक्षा और निगरानी के नए प्रावधान
सभी गहरे समुद्र के जहाजों पर ट्रांसपोंडर डिवाइस अनिवार्य किए गए हैं। मछुआरों के लिए QR कोड वाले आधार आधारित फिशर आईडी कार्ड जारी किए जाएंगे। ReALCraft एप को ‘नभमित्रा एप्लिकेशन’ से जोड़ा गया है, जिससे मछुआरों को समुद्र में नेविगेशन सहायता मिलेगी और कोस्ट गार्ड व नौसेना को तटीय सुरक्षा निगरानी में मदद मिलेगी।
भारत का मत्स्य क्षेत्र: अवसरों से भरा विशाल समुद्री खजाना
भारत का 11,099 किलोमीटर लंबा तट और 23 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक EEZ क्षेत्र लगभग 50 लाख मछुआरों को आजीविका प्रदान करता है।
भारत दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक देश है और सालाना ₹60,000 करोड़ रुपये का समुद्री उत्पाद निर्यात करता है।
सरकार का लक्ष्य है कि इन नए नियमों के जरिये भारत न केवल ट्यूना जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों का उत्पादन बढ़ाए, बल्कि सतत और समुदाय-आधारित मत्स्य प्रबंधन मॉडल के जरिये वैश्विक सीफूड बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करे।
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