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भारत बना एशिया का एक्वाकल्चर सुपरपावर : एशिया की प्लेट में अब पालित मछली ज्यादा, घट रही समुद्री मछली

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Umashankar Mishra Updated Tue, 02 Dec 2025 07:01 PM IST
सार

एशिया में समुद्री मछली पकड़ने का उत्पादन लगभग रुक-सा गया है, जिसके चलते पूरे महाद्वीप के देश तेजी से जलीय कृषि की ओर मुड़ रहे हैं। वहीं, महिलाएं आज भी मत्स्य क्षेत्र की रीढ़ बनी हुई हैं। एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है। 

मछली बाजार
मछली बाजार - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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भारत ने अंतर्देशीय जलीय कृषि में सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की है। वर्ष 2014 में जहां उत्पादन मात्र 1.5 मिलियन टन था, वहीं वर्ष 2023 में यह बढ़कर लगभग 4 मिलियन टन हो गया यानी 167 फीसदी की छलांग देखी गई।

बंगाल की खाड़ी कार्यक्रम अंतर-सरकारी संगठन (BOBP-IGO) के निदेशक डॉ. पी. कृष्णन ने चेन्नई में एक कार्यक्रम के दौरान ये आंकड़े पेश करते हुए कहा कि भारत अब एशिया के “वाइल्ड मछली से पाली गई मछली” की ओर बदलाव का सबसे बड़ा चालक बन चुका है। 

महिलाएं बनीं मत्स्य क्षेत्र की रीढ़
1995 में जहाँ जलीय कृषि क्षेत्र रोज़गार का सिर्फ 17 प्रतिशत हिस्सा देता था, वहीं 2020 तक यह बढ़कर लगभग 40 प्रतिशत हो गया। कटाई के बाद के कामों में महिलाओं का योगदान 95 प्रतिशत तक पहुँच गया है, लेकिन यह श्रम अभी भी अनौपचारिक और कम मूल्यवान माना जाता है।

चीन से श्रीलंका तक समुद्री मछली पकड़ने में गिरावट
अध्ययन के अनुसार, चीन की समुद्री लैंडिंग 2015 से अब तक 15-20 प्रतिशत तक गिरी है। श्रीलंका और मलेशिया भी कई सालों से लगातार गिरावट देख रहे हैं। दूसरी ओर एशिया अब भी विश्व के कुल मछली उत्पादन का 70 प्रतिशत से अधिक दे रहा है, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा अब पाली गई मछली से आता है। 

भारत में 82 प्रतिशत मछली घरेलू खपत
झींगा निर्यात से अरबों डॉलर कमाने के बावजूद भारत अपनी कुल मछली का 82 प्रतिशत हिस्सा घरेलू पोषण के लिए रखता है। यही वजह है कि मछली की बर्बादी (Fish Loss & Waste) देश के लिए गंभीर चिंता बन गई है।

बर्बादी का चौंकाने वाला आंकड़ा
समुद्री मछली में नुकसान 2.78 प्रतिशत से बढ़कर 10 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गया है, जबकि सूखी मछली में तो 37 प्रतिशत तक बर्बादी हो रही है। कोल्ड-चेन की कमी, खराब हैंडलिंग और गंदे लैंडिंग सेंटर इसके मुख्य कारण हैं।

समाधान के लिए अहम सुझाव
रिपोर्ट में विकेन्द्रीकृत कोल्ड-चेन, इंसुलेटेड बॉक्स, आधुनिक ड्राइंग तकनीक और स्वच्छ लैंडिंग सेंटरों पर तुरंत निवेश की सिफारिश की गई है। FAO और BOBP-IGO के संयुक्त वर्कशॉप में 12 एशियाई देशों के नीति-निर्माताओं ने इन सुझावों पर सहमति जताई है।
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