नेशनल को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NCDFI)और भारतीय सेना की डेयरी-रक्षा साझेदारी के 40 साल हो गए हैं और वर्ष 2025-26 में 117 सहकारी समितियों के जरिए सेना को 22.60 करोड़ लीटर दूध की आपूर्ति की गई। दोनों पक्षों ने डेयरी सहकारी नेटवर्क के जरिए स्थानीय स्तर पर दूध की खरीद, प्रसंस्करण और कोल्ड-चेन प्रबंधन मजबूत करने पर जोर दिया।
NCDFI के चेयरमैन और NDDB के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह ने कहा कि इस साझेदारी से रक्षा प्रतिष्ठानों को भरोसेमंद आपूर्ति, सहकारी समितियों को सुनिश्चित संस्थागत बाजार और डेयरी किसानों को व्यापक बाजारों तक पहुंच के साथ नियमित आय मिलती है।
सीमावर्ती क्षेत्रों में डेयरी नेटवर्क पर जोर
आणंद, गुजरात में आयोजित ‘डेयरी-रक्षा साझेदारी पर सहकारी सम्मेलन’ में डॉ. शाह ने सीमावर्ती और उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में दूध खरीद, प्रसंस्करण, कोल्ड स्टोरेज और सप्लाई चेन मजबूत करने में सहकारी समितियों की भूमिका की सराहना की।
उन्होंने कहा कि रक्षा प्रतिष्ठानों को पहुंचने वाला हर अतिरिक्त लीटर दूध डेयरी किसानों और देश की सेवा कर रहे जवानों को जोड़ता है। सम्मेलन में दूरदराज, सीमावर्ती और उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण दूध और डेयरी उत्पाद पहुंचाने वाली सहकारी समितियों के योगदान को सम्मानित किया गया।
सेना ने स्थानीय डेयरी सहकारिता को सराहा
भारतीय सेना के महानिदेशक आपूर्ति एवं परिवहन (DGST) लेफ्टिनेंट जनरल मुकेश चड्ढा ने कठिन इलाकों में तैनात सैनिकों को विश्वसनीय आपूर्ति उपलब्ध कराने में NCDFI और उसकी सदस्य सहकारी समितियों की भूमिका की सराहना की।
उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में मजबूत डेयरी सहकारिता से टिकाऊ बाजार, स्थानीय रोजगार और आजीविका के अवसर बढ़ सकते हैं तथा रिवर्स माइग्रेशन में मदद मिल सकती है। उन्होंने ताजे दूध की आपूर्ति बढ़ाने और जरूरत के अनुसार स्थानीय क्षमताएं विकसित करने के लिए सेना और NCDFI के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई। साथ ही, परिचालन जरूरतों के लिए पर्याप्त लॉन्ग-लाइफ दूध क्षमता बनाए रखने पर जोर दिया।
ताजा दुग्ध आपूर्ति बढ़ाने की योजना
कॉन्क्लेव में भारतीय सेना, ITBP और असम राइफल्स को सहकारी समितियों की आपूर्ति, भविष्य की जरूरतों और परिचालन अनुभवों पर चर्चा हुई।
जहां स्थानीय खरीद, प्रसंस्करण, कोल्ड-चेन और लॉजिस्टिक्स की सुविधाएं उपलब्ध हैं, वहां ताजा दूध की आपूर्ति बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इससे UHT दूध पर निर्भरता कम होगी। हालांकि, परिचालन रूप से जरूरी स्थानों के लिए UHT जैसे लॉन्ग-लाइफ उत्पादों की क्षमता बनाए रखी जाएगी, जिनकी वर्तमान आपूर्ति 4.11 करोड़ लीटर है।
सम्मेलन में मांग की स्पष्टता, उत्पाद-वार क्षमताओं का मानचित्रण, वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्था, गुणवत्ता और कोल्ड-चेन, डिजिटल समन्वय, उत्पाद विविधता और टिकाऊ लॉजिस्टिक्स मजबूत करने की प्रतिबद्धता भी जताई गई।
2025-26 में 22.60 करोड़ लीटर दुग्ध आपूर्ति
रक्षा मंत्रालय के साथ NCDFI का जुड़ाव 1984 में शुरू हुआ था। चार दशकों में यह साझेदारी 117 डेयरी सहकारी समितियों तक पहुंच चुकी है। 2025-26 में इसका अनुबंध मूल्य ₹1,627 करोड़ रहा। इसी अवधि में ताजे दूध की आपूर्ति 18.48 करोड़ लीटर और ताजे व UHT दूध की कुल आपूर्ति 22.60 करोड़ लीटर रही। वहीं, 10 सीमावर्ती और उत्तर-पूर्वी डेयरी सहकारी समितियों ने 196 सैन्य इकाइयों को 6.44 करोड़ लीटर ताजा दूध उपलब्ध कराया।
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