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Maize Exports: कीमतों में संतुलन लौटते ही भारत का मक्का निर्यात पटरी पर, रिकॉर्ड उत्पादन से मिली मजबूती

गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा Published by: Himanshu Mishra Updated Fri, 09 Jan 2026 07:59 AM IST
सार

कीमतों में संतुलन लौटते ही भारत के मक्का (मकई) निर्यात में फिर से जान आ गई है। पिछले वित्त वर्ष में घरेलू बाजार में ऊंचे दाम और मजबूत आंतरिक मांग के कारण मक्का निर्यात पांच साल के निचले स्तर पर पहुंच गया था। लेकिन इस साल रिकॉर्ड उत्पादन, मंडियों में कीमतों में गिरावट और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए बेहतर मूल्य उपलब्ध होने से निर्यात में स्पष्ट सुधार देखा जा रहा है।
 

मक्का की फसल
मक्का की फसल - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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भारत के मक्का निर्यात में चालू वित्त वर्ष के दौरान मजबूती लौटती नजर आ रही है। मूल्य प्रतिस्पर्धा बेहतर होने और घरेलू उत्पादन बढ़ने से विदेशों में भारतीय मक्का की मांग फिर से उभर रही है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से अक्टूबर के बीच मक्का निर्यात मात्रा के लिहाज से 20 प्रतिशत बढ़कर 2.84 लाख टन से अधिक हो गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 2.36 लाख टन था।

मूल्य के संदर्भ में भी निर्यात में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। अप्रैल–अक्टूबर के दौरान मक्का निर्यात का मूल्य 28 प्रतिशत बढ़कर 112.49 मिलियन डॉलर पहुंच गया, जो एक साल पहले 87.63 मिलियन डॉलर था।

आईग्रेन इंडिया के राहुल चौहान के अनुसार, इस वर्ष कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुरूप होने से निर्यात संभव हो पाया है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश जैसे प्रमुख बाजार में मौजूदा हालात को देखते हुए कारोबारी सतर्कता बरत रहे हैं।

पिछले साल क्यों गिरा था निर्यात
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का मक्का निर्यात पांच साल के निचले स्तर 5.56 लाख टन पर आ गया था, जिसका मूल्य 201.17 मिलियन डॉलर रहा। इसके मुकाबले 2023-24 में निर्यात 14.42 लाख टन था, जिसकी कीमत 443 मिलियन डॉलर थी। पोल्ट्री, एथनॉल और स्टार्च उद्योग से घरेलू मांग बढ़ने के कारण पिछले साल मक्का की कीमतें ऊंची बनी रहीं, जिससे निर्यात की प्रतिस्पर्धा कमजोर हो गई।

कंपाउंड लाइवस्टॉक फीड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (CLFMA) ऑफ इंडिया के चेयरमैन दिव्य कुमार गुलाटी ने बताया कि निर्यात में गिरावट कई कारणों का नतीजा थी। मजबूत घरेलू खपत, वैश्विक उत्पादन में बढ़ोतरी से अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट, व्यापारिक तनाव और लॉजिस्टिक चुनौतियों ने मिलकर निर्यात गतिविधियों को सीमित कर दिया था। उनके मुताबिक, इस साल हालात बदले हैं और निर्यात में स्पष्ट सुधार दिख रहा है।

रिकॉर्ड उत्पादन से बढ़ी उपलब्धता
भारत में मक्का उत्पादन ने नए रिकॉर्ड बनाए हैं। खरीफ 2025 सीजन में मक्का उत्पादन 28.3 मिलियन टन आंका गया है, जो पिछले वर्ष के 24.8 मिलियन टन से काफी अधिक है। किसानों ने बेहतर कीमत और मांग के चलते बड़े पैमाने पर रकबा बढ़ाया।

पूरे 2024-25 फसल वर्ष में भारत का कुल मक्का उत्पादन रिकॉर्ड 43.4 मिलियन टन रहा। इसके अलावा, मौजूदा रबी बुवाई सीजन में भी मक्का का रकबा 6.6 प्रतिशत बढ़कर 23.32 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले वर्ष 21.87 लाख हेक्टेयर था।

दाम गिरे, लेकिन MSP से नीचे
बंपर उत्पादन का असर कीमतों पर साफ दिख रहा है। देशभर की मंडियों में मक्का का औसत थोक भाव लगभग 1,710 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास बना हुआ है, जो न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,400 रुपये प्रति क्विंटल से करीब 28 प्रतिशत कम है। कीमतों में आई इस गिरावट के बाद कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्यों ने किसानों को राहत देने के लिए बाजार हस्तक्षेप शुरू किया है।

वैश्विक आपूर्ति का असर
गुलाटी के अनुसार, अमेरिका, यूक्रेन और ब्राजील में बड़े स्तर पर हुई पैदावार ने वैश्विक बाजार में आपूर्ति बढ़ा दी है। इससे अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को प्रतिस्पर्धी दरों पर मक्का उपलब्ध हो रहा है। कई निर्यातकों ने नए बाजारों की तलाश भी की है और उन क्षेत्रों में व्यापारिक संबंध मजबूत किए हैं, जहां पिछले साल अन्य आपूर्तिकर्ताओं की पकड़ कमजोर पड़ी थी। वैश्विक स्तर पर कीमतों के स्थिर होने से फीड और औद्योगिक उपयोग के लिए मक्का खरीदना खरीदारों के लिए अधिक किफायती हो गया है।

घरेलू जरूरतें बनी रहेंगी प्राथमिकता
हालांकि निर्यात में सुधार के संकेत हैं, लेकिन भारत में मक्का की बड़ी मात्रा अब भी पोल्ट्री फीड, एथनॉल उत्पादन और स्टार्च उद्योग में खपत हो रही है। यही कारण है कि निर्यात की गति सीमित बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आगे चलकर भू-राजनीतिक घटनाक्रम, शुल्क नीतियां और आयातकों की बदलती प्राथमिकताएं वैश्विक मक्का व्यापार की दिशा तय करेंगी। फिलहाल, मौजूदा रुझान एक अधिक संतुलित वैश्विक बाजार की ओर इशारा कर रहे हैं।
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