भारत में अरहर की बढ़ती मांग को देखते हुए अब ऑस्ट्रेलिया भी इस दाल का नया स्रोत बन सकता है। ऑस्ट्रेलिया के किसान भारतीय बाजार में अरहर की मांग को पूरा करने के लिए इसकी खेती में रुचि दिखा रहे हैं। व्यापार विशेषज्ञों के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया आने वाले वर्षों में भारत को अरहर का निर्यात कर सकता है।
ऑस्ट्रेलिया पहले से ही भारत को चना और मसूर जैसी प्रमुख दालों की आपूर्ति करता है। अब वह अरहर को भी अपने निर्यात में शामिल करने की तैयारी कर रहा है। भारत दालों का सबसे बड़ा उपभोक्ता है, इसलिए ऑस्ट्रेलिया के किसानों को यहां एक बड़ा बाजार दिखाई दे रहा है।
भारत की मांग पूरी करने के लिए अरहर उगाना चाहते हैं ऑस्ट्रेलियाई किसान
इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन के मानद सचिव सतीश उपाध्याय के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया में अरहर की खेती बढ़ाने की काफी संभावना है। वहां पर्याप्त कृषि भूमि उपलब्ध है और किसान भारतीय बाजार के लिए अरहर उगाने में रुचि दिखा रहे हैं। उनके अनुसार, ऑस्ट्रेलिया में पैदा होने वाली अरहर की गुणवत्ता भी अच्छी है।
उपाध्याय ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया जल्द ही भारत सरकार से अरहर निर्यात करने की अनुमति मांग सकता है। फिलहाल वहां अरहर का उत्पादन कुछ हजार टन है, लेकिन इसे बढ़ाकर करीब 10 लाख टन तक पहुंचाने की क्षमता है। उन्होंने हाल ही में मेलबर्न और ब्रिस्बेन के आसपास के प्रमुख कृषि क्षेत्रों का दौरा भी किया था।
अभी फसल चक्र में उगाई जाती है अरहर, बढ़ सकती है खेती
ऑस्ट्रेलिया में फिलहाल अरहर की खेती मुख्य रूप से फसल चक्र के हिस्से के रूप में की जाती है। इसकी खेती से मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाने में मदद मिलती है, जिससे अगली फसलों को भी फायदा होता है। लेकिन, भारतीय बाजार में अरहर की बढ़ती मांग को देखते हुए वहां के किसान इसे व्यावसायिक फसल के रूप में उगाने पर विचार कर सकते हैं। इससे अरहर की खेती का रकबा और उत्पादन दोनों बढ़ने की संभावना है। ऑस्ट्रेलिया में उपलब्ध कृषि भूमि इस विस्तार में मददगार हो सकती है।
देश में उत्पादन बढ़ा, लेकिन मांग के मुकाबले कम पड़ सकती है अरहर
भारत में पिछले दस सालों के दौरान अरहर का उत्पादन बढ़ा है, लेकिन इसकी मांग में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2015-16 में देश में अरहर का उत्पादन करीब 25.61 लाख टन था, जो 2025-26 में बढ़कर लगभग 35.92 लाख टन पहुंच गया। यह 2025-26 के तीसरे अग्रिम अनुमान का आंकड़ा है।
सरकार ने खरीफ सीजन 2026-27 के लिए अरहर उत्पादन का लक्ष्य 40 लाख टन रखा है। हालांकि, व्यापार क्षेत्र के अनुमानों के मुताबिक, प्रमुख उत्पादक राज्यों कर्नाटक और महाराष्ट्र में कम बारिश और सूखे के कारण इस साल उत्पादन घट सकता है। ऐसे में देश में अरहर की कुल पैदावार 20 से 25 लाख टन के बीच रहने का अनुमान है।
ब्राजील के बाद ऑस्ट्रेलिया से भी आयात की संभावना
भारत जल्द ही ब्राजील से अरहर का आयात शुरू कर सकता है। इसके अलावा भारत मोजांबिक, म्यांमार, तंजानिया, सूडान और मलावी जैसे देशों से भी अरहर मंगाता है। व्यापार के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से जुलाई 2026 के बीच भारत ने 5.79 लाख टन अरहर का आयात किया। पिछले साल इसी अवधि में यह मात्रा 4.01 लाख टन थी। यानी आयात में करीब 44 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, पूरे कैलेंडर वर्ष 2025 में भारत ने 13.25 लाख टन से अधिक अरहर का आयात किया था।