विज्ञापन
Home› Khabar Junction› Why Indian Rice Being Rejected Abroad Iref Explains Main Reason Keep These Things Mind Before Sending Consignm

विदेश में क्यों रिजेक्ट हो रहा भारतीय चावल? : IREF ने बताई बड़ी वजह, खेप भेजने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Fri, 25 Sep 2026 03:16 PM IST
सार

भारतीय चावल की कुछ खेपों को विदेशी बाजारों में तय MRL से ज्यादा कीटनाशक अवशेष, संदूषण, गुणवत्ता मानकों में अंतर और दस्तावेजी कमियों के कारण अस्वीकृति का सामना करना पड़ रहा है। IREF ने खेत से शिपमेंट तक गुणवत्ता जांच मजबूत करने पर जोर दिया है।

चावल
चावल - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

विदेशी बाजारों में भारतीय चावल की कुछ खेपों को गुणवत्ता और नियमों से जुड़ी कमियों के कारण अस्वीकृति का सामना करना पड़ रहा है। इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) के अनुसार, तय सीमा से अधिक कीटनाशक अवशेष, चावल में संदूषण, उत्पाद की गुणवत्ता और जांच के मानकों में अंतर के साथ दस्तावेज और प्रमाणपत्रों से जुड़ी कमियां इसकी प्रमुख वजह हैं। ऐसे में निर्यातकों के लिए खेत से लेकर विदेशी खरीदार तक पूरी आपूर्ति श्रृंखला में नियमों का पालन मजबूत करना जरूरी हो गया है।

भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक है। IREF की ओर से साझा किए गए APEDA के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने 2024-25 में 12.47 अरब डॉलर मूल्य का 2.019 करोड़ मीट्रिक टन चावल निर्यात किया था। इसलिए किसी खेप की अस्वीकृति का असर सिर्फ एक निर्यातक तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कारोबार और खरीदारों के भरोसे पर भी पड़ सकता है।

अलग-अलग चरणों में पैदा हो सकती है समस्या
IREF के मुताबिक, चावल की खेप के रिजेक्ट होने की वजह आपूर्ति श्रृंखला के अलग-अलग चरणों में सामने आ सकती है। कीटनाशक अवशेष की समस्या खेत में फसल उत्पादन के दौरान इस्तेमाल किए गए कीटनाशकों से शुरू हो सकती है। वहीं, गुणवत्ता से जुड़ी कमियां चावल की खरीद, भंडारण या मिलिंग के दौरान पैदा हो सकती हैं। इसके अलावा, निर्यातक और विदेशी खरीदार के बीच गुणवत्ता मानक, नमूना लेने की प्रक्रिया और प्रयोगशाला जांच को लेकर अंतर होने पर भी खेप तय मानकों पर खरी नहीं उतर सकती।

हर देश के नियम अलग
चावल निर्यातकों के लिए बाजार के हिसाब से नियमों का पालन करना जरूरी है। अलग-अलग देशों और क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा के मानक अलग हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, यूरोपीय संघ (EU) आयातित खाद्य पदार्थों में कीटनाशक अवशेष की अधिकतम सीमा यानी MRL का पालन अनिवार्य करता है। तय सीमा से अधिक अवशेष मिलने पर माल को सीमा पर रोका या अस्वीकार किया जा सकता है।

केवल कागजी कार्रवाई नहीं है अनुपालन
इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष देव गर्ग ने कहा कि निर्यात नियमों का पालन सिर्फ शिपमेंट भेजने से पहले की कागजी प्रक्रिया नहीं होना चाहिए। इसे निर्यात कारोबार की पूरी प्रक्रिया का हिस्सा बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि चावल की खेप के लिए बाजार तक पहुंच सिर्फ बंदरगाह से माल रवाना होने तक नहीं है। यह तब पूरी होती है, जब खेप विदेशी बाजार में खरीदार की सभी जरूरतों और नियमों को पूरा करती है। उनके मुताबिक, खेत और खरीद से लेकर चावल की मिलिंग, जांच, प्रमाणन और शिपमेंट तक पूरी प्रक्रिया में संभावित जोखिमों की पहचान करना जरूरी है।

खेप रिजेक्ट होने पर बढ़ता है खर्च
किसी चावल की खेप के विदेशी बाजार में अस्वीकार होने पर केवल चावल की कीमत का नुकसान नहीं होता। निर्यातक को दोबारा जांच, बंदरगाह पर माल रुकने, भंडारण और देरी का शुल्क, माल वापस मंगाने या दोबारा भेजने जैसे अतिरिक्त खर्च उठाने पड़ सकते हैं। इसके अलावा, खरीदार के साथ कीमत में बदलाव की स्थिति बन सकती है और कारोबारी संबंधों पर भी असर पड़ सकता है।

अस्वीकृति के कारणों की पहचान जरूरी
देव गर्ग ने कहा कि सिर्फ यह गिनना पर्याप्त नहीं है कि कितनी खेप अस्वीकार हुईं। यह समझना ज्यादा जरूरी है कि खेप क्यों रिजेक्ट हुई, समस्या आपूर्ति श्रृंखला में कहां पैदा हुई और अगली खेप से पहले क्या सुधार किया जा सकता है। उनके अनुसार, यदि उद्योग बार-बार सामने आने वाली समस्याओं की पहचान कर शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रण मजबूत करता है, तो नियमों का पालन कारोबार पर अतिरिक्त बोझ के बजाय निर्यात में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बन सकता है।

अक्टूबर में होगा चावल सम्मेलन
इन मुद्दों पर चर्चा भारत अंतर्राष्ट्रीय चावल सम्मेलन (BIRC) 2026 में होगी। सम्मेलन 23 से 25 अक्टूबर तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किया जाएगा। IREF इस दौरान ‘खरीदार चावल की खेप क्यों अस्वीकार करते हैं: गुणवत्ता, प्रमाणन और अनुपालन’ विषय पर विशेष सत्र आयोजित करेगा। इस सत्र में कीटनाशक अवशेष और MRL, नमूना लेने की प्रक्रिया, प्रयोगशाला जांच, गुणवत्ता मानक, प्रमाणन, दस्तावेजीकरण, खेप की पहचान और शिपमेंट से पहले की जांच जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।

जारी हो सकती है अनुपालन चेतावनी
सम्मेलन के बाद ‘BIRC 2026 चावल निर्यात अनुपालन चेतावनी’ जारी किए जाने की उम्मीद है। इसमें उन बाजारों की जानकारी दी जाएगी जहां चावल की खेप के अस्वीकार होने का जोखिम अधिक देखा जा रहा है। इसमें अस्वीकृति के प्रमुख कारण, नए अनुपालन जोखिम, कारोबार पर संभावित असर और निर्यातकों के लिए गुणवत्ता व नियमों से जुड़ी गलतियों को कम करने के व्यावहारिक उपाय भी शामिल किए जाने की उम्मीद है।
विज्ञापन
विज्ञापन