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Sugarcane Crushing: गन्ना पेराई की तारीख पर किसानों का विरोध, बोले- 15 नवंबर से पहले मिलें न चलें, वरना...

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Fri, 25 Sep 2026 02:57 PM IST
सार

महाराष्ट्र के किसान संगठनों ने कम चीनी रिकवरी का हवाला देते हुए 15 अक्टूबर से गन्ना पेराई शुरू करने का विरोध किया है। संगठनों ने 15 नवंबर के बाद मिलें चलाने, FRP भुगतान समय पर करने और हर जिले में सरकारी गन्ना तौल कांटे लगाने की मांग की है।

गन्ने की फसल
गन्ने की फसल - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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महाराष्ट्र में किसान संगठनों ने 15 अक्टूबर से गन्ने की पेराई शुरू करने के प्रस्ताव का विरोध किया है। संगठनों का कहना है कि इस समय गन्ने में चीनी की रिकवरी कम रहती है। ऐसे में जल्दी पेराई शुरू होने से किसानों को नुकसान हो सकता है और चीनी मिलों की लागत भी बढ़ सकती है। संगठनों ने मांग की है कि चीनी मिलों में पेराई 15 नवंबर के बाद ही शुरू की जाए। मांग पर दोबारा विचार नहीं होने पर किसान संगठनों ने 8 अक्टूबर को पुणे स्थित चीनी आयुक्त कार्यालय पर ‘आक्रोश मोर्चा’ निकालने की चेतावनी दी है।

चीनी आयुक्त को सौंपा ज्ञापन
गुरुवार को शिवसेना शेतकरी सेना, जय शिवराय किसान संगठन, शेतकरी-शेतमजूर संगठन, किसान मोर्चा, शरद जोशी प्रेरित शेतकरी संगठन, स्वाभिमानी संभाजी ब्रिगेड और आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधियों ने पुणे में चीनी आयुक्त डॉ. संजय कोलते से मुलाकात की।

प्रतिनिधियों ने अपनी मांगों को लेकर चीनी आयुक्त को ज्ञापन सौंपा। किसान संगठनों ने कहा कि कम बारिश के कारण गन्ना किसान पहले से दबाव में हैं। ऐसे में 15 अक्टूबर से पेराई शुरू करना किसानों और चीनी मिलों दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

जनवरी से मार्च में रिकवरी बेहतर होने का दावा
किसान संगठनों के अनुसार, गन्ने में चीनी की रिकवरी जनवरी, फरवरी और मार्च में आम तौर पर बेहतर रहती है। उनका कहना है कि सीजन के शुरुआती दिनों में पेराई करने पर चीनी की रिकवरी करीब 9 फीसदी तक रह सकती है।

कम रिकवरी होने पर एक क्विंटल चीनी तैयार करने में मिलों की लागत बढ़ सकती है। इसका असर चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति और किसानों को होने वाले भुगतान पर भी पड़ने की आशंका किसान संगठनों ने जताई है।

शिवसेना शेतकरी सेना के प्रदेश अध्यक्ष प्रो. जलंधर पाटील ने कहा कि कम बारिश ने गन्ना किसानों की मुश्किल बढ़ाई है। उनके अनुसार जनवरी से मार्च के बीच रिकवरी बेहतर रहती है, इसलिए पेराई जल्द शुरू करने के फैसले पर दोबारा विचार होना चाहिए।

घरेलू और व्यावसायिक चीनी के लिए अलग कीमत की मांग
जलंधर पाटील ने चीनी की दो अलग कीमतें तय करने की मांग भी रखी। उन्होंने घरेलू इस्तेमाल वाली चीनी के लिए 20 रुपये प्रति किलो और व्यावसायिक इस्तेमाल वाली चीनी के लिए 80 रुपये प्रति किलो कीमत रखने का प्रस्ताव दिया।

किसान संगठनों ने चीनी की न्यूनतम बिक्री कीमत (MSP) बढ़ाकर 55 रुपये प्रति किलो करने की भी मांग की। पाटील ने कहा कि आयातित कच्ची चीनी की कीमत करीब 52 रुपये प्रति किलो बताई जा रही है। इसमें परिवहन और प्रसंस्करण का खर्च जोड़ने पर लागत और बढ़ जाती है। ऐसे में घरेलू चीनी की न्यूनतम बिक्री कीमत बढ़ाने की जरूरत है। चीनी आयुक्त डॉ. संजय कोलते ने कहा कि इन मांगों पर राज्य सरकार के साथ चर्चा की जाएगी।

गन्ने का FRP भुगतान समय पर करने की मांग
किसान संगठनों ने FRP (उचित और लाभकारी मूल्य) के भुगतान में देरी का मुद्दा भी उठाया। चीनी आयुक्त ने बताया कि जिन मिलों ने तय समय में FRP का भुगतान नहीं किया या देरी से भुगतान पर ब्याज नहीं दिया, उनके खिलाफ राजस्व वसूली प्रमाणपत्र (RRC) के तहत कार्रवाई की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि जिन चीनी मिलों ने समय पर RSF रिपोर्ट जमा नहीं की है, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है।

किसान प्रतिनिधि सावकर मदनाईक ने मांग की कि FRP और ब्याज से जुड़ी रिपोर्ट समय पर जमा नहीं करने वाली मिलों के निदेशक मंडल और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो। उन्होंने जिम्मेदार लोगों की निजी संपत्ति से बकाया राशि वसूल कर किसानों को देने की मांग भी रखी। किसान संगठनों के मुताबिक, चीनी आयुक्त ने उचित कार्रवाई का भरोसा दिया।

हर जिले में सरकारी कांटा लगाने की मांग
जय शिवराय किसान संगठन के अध्यक्ष शिवाजी माने ने हर जिले में सरकार की ओर से गन्ने का वजन करने के लिए कांटे लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक चीनी मिल के आसपास कम से कम 10 सरकारी वजन केंद्र बनाए जाएं और इन केंद्रों पर दर्ज वजन को ही गन्ने के भुगतान का आधार बनाया जाए।

किसान संगठनों ने चीनी मिलों के निजी वजन कांटों की व्यवस्था बंद करने और किसानों के गन्ने का भाव उसकी चीनी रिकवरी के आधार पर तय करने की मांग भी की। उन्होंने इसके लिए दूध में फैट के आधार पर कीमत तय करने वाली व्यवस्था का उदाहरण दिया। चीनी आयुक्त ने कहा कि इन मांगों को सरकार तक पहुंचाया जाएगा और जरूरी बदलाव की कोशिश की जाएगी।

पिछले सीजन की उपज से 525 रुपये अतिरिक्त देने की मांग
जनार्दन पाटील ने पिछले पेराई सीजन में चीनी और अन्य उप-उत्पादों से हुई कमाई के आधार पर किसानों को 525 रुपये की दूसरी किस्त देने की मांग की। किसान संगठनों के अनुसार, चीनी आयुक्त ने इस मांग को सकारात्मक रूप से लिया और चीनी मिलों की ओर से जमा की गई RSF रिपोर्ट के आधार पर राशि पर विचार करने की बात कही।

गन्ना कटाई में तय व्यवस्था लागू करने की मांग
वैभव कांबले ने गन्ने की कटाई के लिए किसानों को क्रम के अनुसार पर्चियां और आवंटन देने की मांग की। उन्होंने कहा कि इससे गन्ना कटाई करने वाले मजदूरों की ओर से किसानों से कथित तौर पर ‘खुशाली’ के नाम पर पैसे मांगने की शिकायतों को रोकने में मदद मिलेगी। संगठनों ने व्यवस्था का पालन नहीं करने वाली चीनी मिलों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इसके अलावा भगवान काटे ने दो चीनी मिलों के बीच लागू दूरी की सीमा हटाने की मांग रखी।

बैठक में चीनी आयुक्त डॉ. संजय कोलते के साथ वित्त निदेशक यशवंत गिरी, प्रशासन निदेशक केदारी जाधव, संयुक्त निदेशक (प्रशासन) प्रकाश अश्तेकर, संयुक्त निदेशक (विकास) महेश जेंडे समेत अन्य अधिकारी और किसान प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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