त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में आम लोगों की रसोई का बजट बिगड़ सकता है। गेहूं की थोक कीमतों में तेजी से आटा, मैदा और सूजी के दाम बढ़ने की आशंका है। केंद्र सरकार ने 24 अगस्त 2026 को गेहूं और इससे बने उत्पादों के निर्यात पर लगी चार साल पुरानी रोक हटाई थी। इसके बाद घरेलू मंडियों में गेहूं के भाव में तेजी देखी जा रही है। दिल्ली की मंडी में 50 दिनों के भीतर गेहूं 151 रुपये प्रति क्विंटल महंगा हो गया है। हालांकि, देश के सरकारी भंडार में गेहूं का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, जिससे कीमतों को काबू में रखने में मदद मिल सकती है।
दिल्ली में 3,000 रुपये प्रति क्विंटल के पार पहुंचा गेहूं
गेहूं की कीमतों में तेजी का अंदाजा दिल्ली की मंडी के भाव से लगाया जा सकता है। 24 अगस्त 2026 को यहां गेहूं 2,879 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा था। 14 अक्टूबर तक इसका भाव बढ़कर 3,030 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। इस तरह कीमत में 151 रुपये यानी करीब 5.24 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। देश की दूसरी प्रमुख मंडियों में भी गेहूं के भाव बढ़े हैं। हालांकि, अलग-अलग मंडियों में तेजी की रफ्तार अलग रही।
प्रमुख मंडियों में गेहूं के भाव
एनसीडीईएक्स (NCDEX) के स्रोत के मुताबिक, 24 अगस्त से 14 अक्टूबर 2026 के बीच देश की प्रमुख मंडियों में गेहूं के भाव में बढ़ोतरी दर्ज की गई। दिल्ली में गेहूं 151 रुपये बढ़कर 3,030 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया। राजकोट में सबसे ज्यादा 175 रुपये की तेजी आई और भाव 2,875 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। इंदौर में कीमत 87 रुपये बढ़कर 2,812 रुपये और कानपुर में 40 रुपये बढ़कर 2,740 रुपये प्रति क्विंटल हो गई। वहीं, कोटा में सबसे कम 15 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यहां गेहूं का भाव 2,725 रुपये से बढ़कर 2,740 रुपये प्रति क्विंटल हो गया।
गेहूं महंगा होने के पीछे क्या हैं तीन बड़े कारण?
गेहूं की कीमतों में तेजी के पीछे निर्यात नीति में बदलाव, मौसम को लेकर चिंता और त्योहारी मांग को प्रमुख वजह माना जा रहा है।
1. निर्यात पर लगी रोक हटने से बढ़ी बाजार की हलचल
केंद्र सरकार ने 24 अगस्त 2026 को गेहूं और इसके उत्पादों के निर्यात पर लगी रोक हटा दी। इसके बाद निर्यात की संभावनाएं बढ़ीं और बाजार में खरीदारी को समर्थन मिला। इससे घरेलू मंडियों में गेहूं की कीमतों पर भी असर पड़ा।
2. अल नीनो की आशंका से अगली फसल की चिंता
कमोडिटी विशेषज्ञों के मुताबिक, मौसम में बदलाव और अल नीनो की आशंका के कारण आगामी रबी सीजन में गेहूं की बुआई और उत्पादन को लेकर चिंता बनी हुई है। पृथ्वी फिनमार्ट के निदेशक और कमोडिटी रिसर्च प्रमुख मनोज कुमार जैन के अनुसार, मौसम की अनिश्चितता के कारण बाजार में गेहूं के स्टॉक को लेकर सतर्कता बढ़ी है। हालांकि, बुआई या उत्पादन में कमी की अभी पुष्टि नहीं हुई है।
3. त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में बढ़ी मांग
त्योहारों और आगामी विवाह सीजन में गेहूं, आटा और इससे बनने वाले उत्पादों की मांग बढ़ने की संभावना है। ऐसे में मिलों की खरीदारी में तेजी भी कीमतों को सहारा दे रही है।
आटा, मैदा और सूजी के दाम बढ़ने की आशंका
गेहूं की थोक कीमतों में लगातार तेजी बनी रहती है, तो इसका असर आटा, मैदा, सूजी, ब्रेड और बिस्कुट जैसे उत्पादों पर पड़ सकता है। हालांकि, खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी कितनी होगी, यह मिलों की लागत, मांग और बाजार में गेहूं की उपलब्धता पर निर्भर करेगा।
उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 13 अक्टूबर 2026 को देश में गेहूं की औसत खुदरा कीमत 32.05 रुपये प्रति किलो थी। एक महीने पहले यह 31.82 रुपये और एक साल पहले 31.57 रुपये प्रति किलो थी। यानी खुदरा बाजार में भी गेहूं की कीमत में धीरे-धीरे बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
सरकारी गोदामों में गेहूं का कितना स्टॉक है?
गेहूं की बढ़ती कीमतों के बीच राहत की बात यह है कि सरकारी भंडार में पर्याप्त अनाज मौजूद है। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के आंकड़ों के मुताबिक, 1 सितंबर 2026 को केंद्रीय पूल में 479.92 लाख टन गेहूं का स्टॉक था। यह 2022 से 2025 के मुकाबले काफी अधिक है, हालांकि 2021 में स्टॉक इससे ज्यादा था।
केंद्रीय पूल में गेहूं का स्टॉक
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के आंकड़ों के अनुसार, 1 सितंबर 2026 को सरकारी भंडार में 479.92 लाख टन गेहूं मौजूद था। यह मात्रा 2025 के 332.97 लाख टन से करीब 44 फीसदी अधिक है। वहीं, 2024 में गेहूं का स्टॉक 251.46 लाख टन और 2023 में 260.37 लाख टन था। पिछले छह वर्षों में सबसे ज्यादा स्टॉक 2021 में 517.87 लाख टन दर्ज किया गया था। सरकारी भंडार में पर्याप्त गेहूं होने से जरूरत पड़ने पर खुले बाजार में इसकी आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
नवंबर तक साफ होगी गेहूं की कीमतों की तस्वीर
आने वाले दिनों में गेहूं के भाव किस दिशा में जाएंगे, यह काफी हद तक रबी सीजन की बुआई, मौसम और बाजार में उपलब्ध स्टॉक पर निर्भर करेगा। नवंबर के अंत तक बुआई के आंकड़ों से अगली फसल की स्थिति का बेहतर अंदाजा मिल सकता है। अगर बुवाई सामान्य रहती है और सरकार जरूरत पड़ने पर खुले बाजार में गेहूं जारी करती है, तो कीमतों में तेज उछाल को रोकने में मदद मिल सकती है। दूसरी ओर, निर्यात मांग और मौसम को लेकर चिंता बनी रहती है, तो गेहूं के भाव पर दबाव जारी रह सकता है। ऐसे में आम उपभोक्ताओं के लिए आने वाले सप्ताह अहम होंगे।
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