उत्तर भारत में अक्टूबर के आखिरी दिनों में मौसम बदलने का अनुमान है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के 25 अक्टूबर 2026 को जारी पूर्वानुमान के अनुसार, 28 अक्टूबर को पूर्वी उत्तर प्रदेश में कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। इसके बाद 29 और 30 अक्टूबर को पूर्वी उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर बारिश होने की संभावना है। इन दोनों दिनों में कुछ स्थानों पर भारी बारिश का भी अनुमान है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 29 और 30 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाएं चल सकती हैं।
पूर्वी यूपी में 29-30 अक्टूबर को भारी बारिश का अनुमान
IMD के अनुसार, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 29 और 30 अक्टूबर को कई स्थानों पर बारिश हो सकती है। इस दौरान कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है। 28 अक्टूबर को भी कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। 29 और 30 अक्टूबर को पूर्वी उत्तर प्रदेश में गरज-चमक के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी इन दोनों दिनों के दौरान कुछ स्थानों पर बारिश और गरज-चमक के साथ इतनी ही रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं।
पश्चिमी यूपी, दिल्ली और पंजाब में भी बारिश के आसार
IMD के मुताबिक, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 29 और 30 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पंजाब में 28 और 29 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर बारिश का अनुमान है। उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में 25 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। इन दोनों क्षेत्रों में 30 अक्टूबर को भी कुछ स्थानों पर बारिश का अनुमान है। हिमाचल प्रदेश में 25 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर बारिश होने की संभावना है।
राजस्थान की बात करें तो पूर्वी राजस्थान में 25 अक्टूबर और फिर 29 से 30 अक्टूबर के दौरान कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। वहीं, पश्चिमी राजस्थान में 25 से 31 अक्टूबर तक बारिश का अनुमान नहीं है। मौसम विभाग के सात दिवसीय पूर्वानुमान में गुजरात क्षेत्र, सौराष्ट्र और कच्छ में भी इस अवधि के दौरान मौसम शुष्क रहने की संभावना जताई गई है।
किसानों को फसल और कटी उपज सुरक्षित रखने की सलाह
IMD ने भारी बारिश और तेज हवाओं से फसलों को होने वाले संभावित नुकसान को देखते हुए किसानों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। विभाग के अनुसार, तेज हवा और बारिश से खड़ी फसलों, बागवानी फसलों तथा कमजोर संरचनाओं को नुकसान हो सकता है। निचले इलाकों में जलभराव और स्थानीय स्तर पर बाढ़ जैसी स्थिति भी बन सकती है। किसानों को कटी हुई उपज सुरक्षित स्थान पर रखने या तिरपाल से ढकने की सलाह दी गई है। बागवानी फसलों, सब्जियों और छोटे फलदार पौधों को तेज हवाओं में गिरने से बचाने के लिए सहारा देने को कहा गया है।