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बंपर उपज बनी किसानों के लिए मुसीबत : कोल्ड स्टोरेज में भरा पड़ा है स्टॉक, बंगाल में घट सकता है आलू का रकबा

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Sun, 25 Oct 2026 09:16 AM IST
सार

  • पश्चिम बंगाल में आलू की अगेती बुआई का रकबा घटा, किसानों को कम भाव मिलने से परेशानी।
  • ज्योति आलू का भाव 500 रुपये क्विंटल, किसानों को लागत निकालना मुश्किल।
  • बंपर पैदावार से कोल्ड स्टोरेज में आलू का रिकॉर्ड भंडारण, कीमतों पर दबाव।
  • कीमतें नहीं बढ़ीं तो 2026-27 में पश्चिम बंगाल में आलू की खेती का रकबा घट सकता है।
  • दूसरे राज्यों में आलू भेजने के लिए सड़क परिवहन पर सब्सिडी की मांग।

कमजोर दाम की वजह से घट सकता है आलू का रकबा।
कमजोर दाम की वजह से घट सकता है आलू का रकबा। - फोटो : AI Image
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विस्तार
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देश के दूसरे सबसे बड़े आलू उत्पादक राज्य पश्चिम बंगाल में आलू की अगेती किस्मों की बुआई के रकबे में गिरावट देखी जा रही है। कमजोर आलू की कीमतों को इसका बड़ा कारण माना जा रहा है। अगर अगले एक महीने के भीतर कीमतों में सुधार नहीं हुआ, तो 2026-27 के सीजन में राज्य के भीतर आलू की खेती का कुल क्षेत्रफल घट सकता है। पिछले यानी 2025-26 के सीजन में आलू की खेती का कुल रकबा करीब 5 लाख हेक्टेयर था।

लागत से कम मिल रहे भाव, घाटे में किसान
वर्तमान में कोल्ड स्टोरेज के गेट पर औसत किस्म के ज्योति आलू के लिए ट्रक लोडिंग का भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में करीब 100 रुपये कम है।

पश्चिम बंगाल कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन के वरिष्ठ सदस्य पतित पाबन दे के अनुसार, 500 रुपये प्रति क्विंटल के इस भाव में से किसान के हाथ में केवल 150 से 170 रुपये ही आ रहे हैं, जो उनकी फसल की उत्पादन लागत से भी कम है। उन्होंने बताया कि किसानों को पूरे साल अपनी उपज औने-पौने दामों में बेचने पर मजबूर होना पड़ा है। यही वजह है कि मुख्य रूप से 'पुखराज' जैसी अगेती किस्मों का रकबा पिछले साल के मुकाबले घट गया है और बीजों की मांग में भी कमी आई है।

कोलकाता के बाजारों में इस समय ज्योति आलू की थोक कीमत 11 से 12 रुपये प्रति किलो चल रही है, जबकि एक साल पहले यह 15 रुपये प्रति किलो थी। पश्चिम बंग प्रगतिशील आलू व्यवसायी समिति के सचिव लालू मुखर्जी के मुताबिक, इस साल किसानों को भारी नुकसान हुआ है, जिसके चलते वे अगेती किस्मों की बुआई शुरू करने की स्थिति में नहीं हैं।

बंपर पैदावार और कोल्ड स्टोरेज में भारी स्टॉक
राज्य में पूरे साल कीमतों पर दबाव इसलिए बना रहा क्योंकि अनुकूल मौसम के चलते 2025-26 में पश्चिम बंगाल में करीब 140 लाख टन आलू का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ था, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक था। इस बंपर पैदावार के कारण कोल्ड स्टोरेज में आलू का भंडारण रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। सामान्य तौर पर जहां 70 से 72 लाख टन आलू का भंडारण होता था, वहीं इस साल यह आंकड़ा लगभग 80 लाख टन तक पहुंच गया। पतित पाबन दे के अनुसार, राज्य भर के कोल्ड स्टोरेज में अभी भी उनकी कुल क्षमता का लगभग 37 से 38 प्रतिशत आलू जमा है, जो साल के इस समय के हिसाब से काफी ज्यादा है। किसानों को हो रहे नुकसान को देखते हुए, यदि आने वाले महीने में कीमतें नहीं बढ़ती हैं, तो 2026-27 के सीजन में बुआई का कुल क्षेत्रफल कम हो सकता है।

सड़क परिवहन पर भी सब्सिडी की मांग
पश्चिम बंगाल कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन और पश्चिम बंग प्रगतिशील आलू व्यवसायी समिति, दोनों ने शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार से मांग की है कि अतिरिक्त आलू को दूसरे राज्यों में भेजने के लिए सड़क परिवहन पर भी सब्सिडी दी जाए।

गौर करने वाली बात यह है कि सरकार ने सितंबर के महीने में किसानों और व्यापारियों की सहायता के लिए रेलवे रैक के जरिए दूसरे राज्यों में आलू भेजने पर 100 रुपये प्रति क्विंटल की सब्सिडी देने की घोषणा की थी। लालू मुखर्जी के अनुसार, उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि रेलवे की तरह सड़क मार्ग (ट्रकों) से होने वाले अंतरराज्यीय व्यापार पर भी ऐसी ही सब्सिडी दी जाए, ताकि राज्य के किसानों को उनकी फसल का उचित दाम मिल सके।

पश्चिम बंगाल पहले हर साल लगभग 20 से 25 लाख टन अतिरिक्त आलू ओडिशा, बिहार, झारखंड और असम जैसे पड़ोसी राज्यों को बेचता था, जो पूरी तरह बंगाल के आलू पर निर्भर थे। हालांकि, तत्कालीन ममता बनर्जी सरकार ने वर्ष 2024 में स्थानीय स्टॉक बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रण में रखने के उद्देश्य से दूसरे राज्यों में आलू की आपूर्ति पर रोक लगा दी थी। इस कदम के बाद बंगाल के आलू व्यापारियों का एक बड़ा बाजार उत्तर प्रदेश के हाथ चला गया था। हालांकि, बाद में सरकार ने इस रोक को हटा लिया था।


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