राजस्थान सरकार की वर्ष 2026-27 की बजट घोषणा के अनुसार, रबी सीजन में फसलों पर नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का छिड़काव करने वाले किसानों को 50 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जाएगा। सरकार के अनुसार, रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करने और मिट्टी की सेहत में सुधार लाने के उद्देश्य से यह वित्तीय सहायता डीबीटी के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाएगी।
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत पूरे राज्य में क्लस्टर व्यवस्था के आधार पर यह अभियान चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत जिले में 680 हेक्टेयर क्षेत्र में नैनो यूरिया और 476 हेक्टेयर क्षेत्र में नैनो डीएपी छिड़काव का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
क्लस्टर निर्माण और अनुदान की दरें
योजना को धरातल पर उतारने के लिए स्थानीय स्तर पर न्यूनतम 10 किसानों का एक प्रदर्शन क्लस्टर बनाया जाएगा, जहां आधुनिक तकनीकों की मदद से फसलों पर छिड़काव कराया जाएगा। कृषि अधिकारी एवं योजना प्रभारी कजोड़ मल गुर्जर के अनुसार, योजना के तहत सब्सिडी की दरें निर्धारित कर दी गई हैं। नैनो यूरिया के उपयोग के लिए प्रति हेक्टेयर कुल लागत 2,000 रुपये तय की गई है, जिस पर 1,000 रुपये का अनुदान मिलेगा। वहीं नैनो डीएपी के उपयोग पर प्रति हेक्टेयर कुल लागत 2,900 रुपये रखी गई है, जिसमें किसानों को 1,450 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। शेष 50 प्रतिशत राशि का वहन खुद किसान को करना होगा। वैज्ञानिक सिफारिश के आधार पर फसलों में प्रति हेक्टेयर 2.5 बोतल नैनो खाद के एक छिड़काव का प्रावधान किया गया है।
पात्र फसलें और छिड़काव के साधन
इस योजना में रबी सीजन की मुख्य फसलों जैसे गेहूं, जौ, सरसों, चना और जीरा को शामिल किया गया है। छोटे और सीमांत किसानों को अधिक से अधिक लाभ पहुंचाने के लिए प्रत्येक किसान के वास्ते प्रदर्शन क्षेत्र की सीमा न्यूनतम 0.4 हेक्टेयर से अधिकतम 10 हेक्टेयर तक तय की गई है। छिड़काव के लिए किसान अपनी सुविधा के अनुसार ट्रैक्टर माउंटेड, बैटरी ऑपरेटेड, नैपसैक स्प्रेयर या अत्याधुनिक ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल कर सकते हैं।
योजना में पूरी पारदर्शिता रखने के लिए खेतों में छिड़काव का कार्य कृषि पर्यवेक्षक और सहायक कृषि अधिकारी की निगरानी में कराया जाएगा। कृषि अधिकारियों के अनुसार, संबंधित खेतों का भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) पूरा होने के बाद ही सब्सिडी की राशि सीधे कृषकों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जाएगी।