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Weak Monsoon Curbs Farm Input Demand In India Rallis India Ceo Says
रैलिस इंडिया के सीईओ का बड़ा बयान: किसानों ने कम बारिश के चलते कीटनाशकों, खाद और बीज पर होने वाला खर्च घटाया
गांव जंक्शन डेस्क, लखनऊ
Published by: Umashankar Mishra
Updated Wed, 23 Sep 2026 04:45 PM IST
सार
जून-सितंबर मानसून, जो देश की सालाना बारिश का करीब 70% हिस्सा देता है, इस साल अनियमित रहा और सामान्य से काफी कम बरसा। बार्कलेज के मुताबिक, 21 सितंबर तक बारिश औसत से 15% कम रही, जबकि सितंबर में यह 18% और अगस्त में 16% कम रही। रैलिस इंडिया के सीईओ ज्ञानेंद्र शुक्ला के मुताबिक, बारिश की अनिश्चितता के चलते किसान संसाधनों पर खर्च बचाने लगे हैं, जिससे फसल सुरक्षा उत्पादों, उर्वरक और बीज की कुल मांग में कमी आएगी। जानिए, विस्तार से...
कम बारिश के चलते फसल सुरक्षा उत्पादों, उर्वरक और बीज के कुल इस्तेमाल में कमी की आशंका व्यक्त कर रहे हैं जानकार।
- फोटो : गावं जंक्शन
भारत में इस साल कमजोर मानसून के चलते किसान कीटनाशक, उर्वरक और बीज पर होने वाला खर्च घटा रहे हैं, यह बात टाटा केमिकल्स की इकाई रैलिस इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) ने कही है।
सामान्य से काफी कम रही बारिश
जून-सितंबर का मानसून, जो देश की सालाना बारिश का करीब 70% हिस्सा देता है, इस साल अनियमित रहा और सामान्य से काफी नीचे बना हुआ है, जिससे एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में फसल पैदावार, ग्रामीण आय और खाद्य महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। बार्कलेज के मुताबिक, 21 सितंबर तक मानसून की बारिश औसत से 15% कम रही, जबकि सितंबर में अब तक बारिश सामान्य से 18% और अगस्त में 16% कम दर्ज की गई।
"बारिश की अनिश्चितता में किसान बचाते हैं संसाधन"
कृषि रसायन और बीज कंपनी रैलिस इंडिया के प्रबंध निदेशक व सीईओ ज्ञानेंद्र शुक्ला ने इस हफ्ते की शुरुआत में एक इंटरव्यू में कहा, "जब बारिश की निश्चितता बहुत कम होती है, तो किसान संसाधनों पर खर्च बचाने की कोशिश करते हैं। किसानों को उतनी पूरी फसल की उम्मीद नहीं रहती, जितनी वे पहले उम्मीद करते थे।"
खरीफ फसलों की बुआई पर असर
भारतीय किसान आमतौर पर मानसून की बारिश शुरू होते ही जून से धान, सोयाबीन और कपास जैसी खरीफ फसलों की बुआई करते हैं, जबकि गेहूं और सरसों जैसी रबी फसलें मानसून की वापसी के बाद अक्टूबर से बोई जाती हैं।
शुक्ला ने कहा, "फसल सुरक्षा उत्पादों, उर्वरक और बीज के कुल इस्तेमाल में कमी आएगी।" उन्होंने खासतौर पर बताया कि खरपतवारनाशी (herbicides) और फफूंदनाशी (fungicides) की मांग सबसे ज्यादा कमजोर रही है। रैलिस की प्रतिस्पर्धी कंपनियों धानुका एग्रीटेक और गोदरेज एग्रोवेट ने भी फसल-सुरक्षा उत्पादों की कमजोर मांग के लिए अनियमित मानसूनी बारिश को जिम्मेदार ठहराया है।
इनपुट क्षेत्र में समेकन की जरूरत
शुक्ला ने यह भी कहा कि भारत का कृषि इनपुट क्षेत्र समेकन (consolidation) के लिए पूरी तरह तैयार है, क्योंकि इस क्षेत्र में प्रवेश की कम बाधाओं ने बाजार को भीड़भाड़ वाला बना दिया है। उन्होंने कहा, "इसमें बहुत ज्यादा खिलाड़ी हैं," और जोड़ा कि जो कंपनियां नवाचार और मजबूत साझेदारियों पर ध्यान केंद्रित करेंगी, वे बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए सबसे बेहतर स्थिति में होंगी।
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