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टूना मछली खाने से न डरें : CMFRI की अपील- भारतीय समुद्र में पकड़ी गई मछलियां सुरक्षित

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Wed, 23 Sep 2026 04:43 PM IST
सार

  • भारतीय तट के पास पकड़ी गई टूना मछली में हानिकारक परजीवी संक्रमण नहीं मिला है।
  • CMFRI ने लोगों से केवल किसी क्षेत्र की रिपोर्ट के आधार पर टूना खाना बंद न करने को कहा है।
  • परजीवी वाली स्टडी ब्राजील के पास अटलांटिक महासागर की स्किपजैक टूना पर हुई थी।
  • मछली को अच्छी तरह और पर्याप्त तापमान पर पकाने की सलाह दी गई है।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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टूना मछली में परजीवी मिलने की एक हालिया रिपोर्ट के बाद उठ रही चिंताओं के बीच आईसीएआर-केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (ICAR-CMFRI) ने कहा है कि भारतीय तट के पास पकड़ी जाने वाली टूना मछलियों में हानिकारक परजीवी संक्रमण नहीं पाया गया है। इसलिए इन्हें सामान्य तौर पर स्वस्थ आहार के रूप में खाया जा सकता है।

संस्थान ने लोगों से अपील की है कि किसी खास क्षेत्र की मछलियों में परजीवी मिलने की रिपोर्ट के आधार पर भारतीय तटों पर मिलने वाली टूना या अन्य सामान्य रूप से बाजार में उपलब्ध मछलियों को खाना बंद न करें।

ब्राजील के पास अटलांटिक महासागर की मछलियों पर हुई थी स्टडी
यह सलाह उन रिपोर्टों के बाद आई है, जिनमें स्किपजैक टूना मछली में परजीवी पाए जाने की बात कही गई थी। यह अध्ययन ब्राजील के पास अटलांटिक महासागर से पकड़ी गई मछलियों पर किया गया था। CMFRI के निदेशक डॉ. ग्रिन्सन जॉर्ज के मुताबिक, संस्थान के वैज्ञानिक मछलियों की जीव विज्ञान से जुड़ी रिसर्च के दौरान नियमित रूप से टूना सहित कई मछलियों की जांच करते हैं। जरूरत पड़ने पर मछलियों में किसी तरह की असामान्यता और परजीवी की भी जांच की जाती है। भारतीय तट से जांची गई मछलियों में हानिकारक परजीवी संक्रमण के बाहरी लक्षण नहीं मिले हैं।

एक क्षेत्र की रिपोर्ट को सभी मछलियों पर लागू न करें
संस्थान ने कहा कि किसी खास भौगोलिक क्षेत्र में मिले परजीवी के निष्कर्ष को भारतीय समुद्री क्षेत्र में पकड़ी गई टूना मछलियों पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता। मछलियों में परजीवी की मौजूदगी और उनकी संख्या अलग-अलग पर्यावरणीय परिस्थितियों पर निर्भर करती है। इसके अलावा कोपेपोड जैसे मध्यवर्ती या दूसरे मेजबान जीवों की उपलब्धता भी इसका एक कारण हो सकती है। वैज्ञानिक दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मछलियों की अलग-अलग प्रजातियों और समूहों की पहचान में परजीवियों की मौजूदगी का भी इस्तेमाल करते हैं।

मछली साफ करने और जल्दी अंदरूनी अंग निकालने की सलाह
खाद्य सुरक्षा के लिहाज से CMFRI ने मछली को ठीक से साफ करने और उसके अंदरूनी अंग (evisceration) जल्द निकालने की सलाह दी है। इससे मछली की स्वच्छता बनाए रखने में मदद मिलती है। कुछ देशों में सांस्कृतिक परंपराओं के कारण कच्ची या कम पकी हुई मछली खाई जाती है। अगर किसी क्षेत्र में परजीवी का स्तर अधिक हो और उसकी ठीक से जांच न की गई हो, तो ऐसी मछली खाना जोखिम भरा हो सकता है। CMFRI के अनुसार, भारत में मछली को आमतौर पर अधिक तापमान पर पकाकर खाया जाता है, जिससे खाद्य सुरक्षा में मदद मिलती है।
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