भारत ने भूमि अभिलेखों को डिजिटल बनाने और उन्हें आधुनिक तकनीक से जोड़ने का अपना अनुभव श्रीलंका के अधिकारियों के साथ साझा किया। ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग (DoLR) ने बुधवार को श्रीलंका के सिविल सेवकों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ इस विषय पर चर्चा की।
यह कार्यक्रम राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (NCGG) के समन्वय से आयोजित किया गया था। बैठक में डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP), भूमि रिकॉर्ड का कंप्यूटरीकरण, संपत्ति पंजीकरण को भूमि रिकॉर्ड से जोड़ने और विशिष्ट भूमि पार्सल पहचान संख्या (ULPIN) पर जानकारी दी गई।
भूमि रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने पर जोर
भूमि संसाधन विभाग के संयुक्त सचिव पी. नरहरि की अध्यक्षता में हुई बैठक में बताया गया कि भारत में पुराने कागजी भूमि रिकॉर्ड को डिजिटल सिस्टम से जोड़ा जा रहा है। इसका उद्देश्य जमीन से जुड़ी अलग-अलग जानकारियों को एक ही व्यवस्था में लाना है।
पी. नरहरि ने कहा कि भूमि केवल सरकारी रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि यह लोगों की आजीविका, आर्थिक गतिविधियों, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने और संपत्ति की सुरक्षा से भी जुड़ी है। उन्होंने कहा कि भारत ने अलग-अलग राज्यों की भूमि व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए तकनीक के माध्यम से भूमि प्रशासन को आधुनिक बनाने का काम किया है।
99.90 फीसदी अधिकार अभिलेख कंप्यूटरीकृत
बैठक में DILRMP की उपलब्धियों की जानकारी भी दी गई। इसके अनुसार 99.90 फीसदी अधिकार अभिलेख (RoR) कंप्यूटरीकृत किए जा चुके हैं। 97.43 फीसदी भूमि पंजीकरण नक्शों का डिजिटलीकरण हो चुका है। 76.16 फीसदी भूमि पार्सल पूरी तरह भू-संदर्भित किए जा चुके हैं। भूमि नक्शों और अधिकार अभिलेखों के बीच 85.24 फीसदी एकीकरण हो चुका है। 40.58 करोड़ से अधिक भूखंडों को 14 अंकों की ULPIN यानी भू-आधार संख्या दी गई है। 98.96 फीसदी उप-पंजीयक कार्यालय (SRO) कंप्यूटरीकृत हो चुके हैं। 94.11 फीसदी राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत किए जा चुके हैं।
जमीन की मिलेगी 14 अंकों की डिजिटल पहचान
अधिकारियों को ULPIN (Unique Land Parcel Identification Number) के बारे में भी जानकारी दी गई। यह जमीन के प्रत्येक भूखंड को दी जाने वाली 14 अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या है। इसे भूखंड की भौगोलिक स्थिति के आधार पर तैयार किया जाता है।
ULPIN के जरिए किसी जमीन के भूखंड को उससे जुड़े दूसरे डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ना आसान होता है। भूखंड का बंटवारा होने पर भी उसकी जानकारी को संबंधित रिकॉर्ड से जोड़े रखने में यह व्यवस्था मदद करती है।
रजिस्ट्री के बाद रिकॉर्ड अपडेट करना होगा आसान
बैठक में संपत्ति की रजिस्ट्री को भूमि रिकॉर्ड से जोड़ने की व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। इसके तहत रजिस्ट्री की जानकारी संबंधित राजस्व विभाग को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजी जा सकती है, जिससे भूमि रिकॉर्ड को अपडेट करने की प्रक्रिया आसान होगी। इससे रिकॉर्ड अपडेट होने में लगने वाला समय कम करने और लोगों को सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने से बचाने में मदद मिल सकती है।
एक प्लेटफॉर्म पर आएगी जमीन की पूरी जानकारी
श्रीलंकाई अधिकारियों को India Land Stack के बारे में भी जानकारी दी गई। यह GIS यानी भौगोलिक सूचना प्रणाली पर आधारित एक डिजिटल व्यवस्था है, जिसमें जमीन से जुड़ी अलग-अलग जानकारियों को एक साथ जोड़ा जा रहा है।
इसमें उपग्रह और ड्रोन से ली गई तस्वीरें, जमीन की सीमाएं, अधिकार अभिलेख, संपत्ति पंजीकरण, मास्टर प्लान, जोनिंग नियम, भवन स्वीकृति, मुकदमेबाजी और अन्य भूमि संबंधी जानकारी शामिल हो सकती है। इसका उद्देश्य किसी भूखंड से जुड़ी जानकारी को एक जगह उपलब्ध कराना है।
NAKSHA से आधुनिक होंगे शहरी भूमि रिकॉर्ड
बैठक में NAKSHA कार्यक्रम की भी जानकारी दी गई। NAKSHA का उद्देश्य आधुनिक सर्वेक्षण और भू-स्थानिक तकनीक की मदद से शहरी भूमि रिकॉर्ड को बेहतर बनाना है। इसमें ड्रोन, कैमरा और LiDAR सेंसर जैसी तकनीकों की मदद से जमीन का सर्वेक्षण किया जाता है। इसके जरिए शहरी क्षेत्रों के सटीक नक्शे और 3D मॉडल तैयार किए जा सकते हैं।
कार्यक्रम के पायलट चरण में शामिल 150 शहरी स्थानीय निकायों में से 145 में हवाई सर्वेक्षण पूरा हो चुका है। इसके बाद शहरी संपत्तियों के लिए कानूनी रूप से मान्य URPro कार्ड जारी करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
श्रीलंका के अधिकारियों ने समझी भारत की व्यवस्था
श्रीलंका के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पथिराज लक्ष्मण पथमाकुमारी ने किया। प्रतिनिधिमंडल में श्रीलंका की भूमि, सर्वेक्षण और प्रशासनिक सेवाओं के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। NCGG की ओर से पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. मुकेश के. भंडारी और पाठ्यक्रम निदेशक डॉ. एपी सिंह भी मौजूद रहे।
इस कार्यक्रम में श्रीलंकाई अधिकारियों को भारत में भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण, डिजिटल रजिस्ट्री, भूखंड की डिजिटल पहचान, नक्शों और रिकॉर्ड के एकीकरण, राजस्व न्यायालयों के कंप्यूटरीकरण और शहरी भूमि सर्वेक्षण की व्यवस्था के बारे में जानकारी दी गई। मुख्य उद्देश्य भूमि से जुड़े रिकॉर्ड को अधिक डिजिटल, एकीकृत और आसानी से उपलब्ध बनाना है, ताकि भूमि प्रशासन और नागरिक सेवाओं को बेहतर किया जा सके।
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