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Up Government S Initiative Fodder Shortage Will No Longer Be A Problem In Cow Shelters Green Fodder Is Flour
यूपी सरकार की पहल : गोशालाओं में अब नहीं होगी चारे की कमी, कब्जा मुक्त जमीन पर लहलहा रहा हरा चारा, जानें
गांव जंक्शन डेस्क, लखनऊ
Published by: Devesh Saraswat
Updated Sun, 18 Jan 2026 10:02 PM IST
सार
उत्तर प्रदेश में निराश्रित गोवंश को अब पौष्टिक आहार की कमी नहीं होगी। प्रदेश सरकार ने गो-आश्रय स्थलों में रहने वाले पशुओं के लिए हरे चारे की उपलब्धता तय करने की एक बड़ी योजना पर काम शुरू कर दिया है। इसके तहत, प्रदेश भर में सरकारी गोचर और चारागाह की जमीनों को अवैध कब्जों से मुक्त कराकर उस पर तेजी से हरा चारा उगाया जा रहा है।
अगले 2 सालों में 35,000 हेक्टेयर में हरा चारा उत्पादन का लक्ष्य।
- फोटो : Ai
उत्तर प्रदेश में निराश्रित गोवंश को अब पौष्टिक आहार की कमी नहीं होगी। प्रदेश सरकार ने गो-आश्रय स्थलों में रहने वाले पशुओं के लिए हरे चारे की उपलब्धता तय करने की एक बड़ी योजना पर काम शुरू कर दिया है। इसके तहत, प्रदेश भर में सरकारी गोचर और चारागाह की जमीनों को अवैध कब्जों से मुक्त कराकर उस पर तेजी से हरा चारा उगाया जा रहा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में कुल 61,118 हेक्टेयर चारागाह भूमि है। इसमें से अब तक 7140.37 हेक्टेयर जमीन को कब्जा मुक्त कराकर उस पर पशुओं के लिए चारा उत्पादन का काम शुरू कर दिया गया है। यह कदम न केवल गोवंश के लिए साल भर पौष्टिक भोजन सुनिश्चित करेगा, बल्कि ग्रामीण स्तर पर लोगों को काम भी मुहैया करा रहा है।
अगले 2 सालों में 35,000 हेक्टेयर का लक्ष्य
पशुपालन विभाग इस योजना को और तेसज करने की तैयारी में है। विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश मेश्राम ने बताया कि आने वाले दो वर्षों में 35,000 हेक्टेयर कब्जामुक्त और सिंचित भूमि पर हरा चारा उगाने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में, 1691.78 हेक्टेयर क्षेत्र में हाइब्रिड नेपियर घास और 5448.59 हेक्टेयर में जई और बरसीम जैसे अन्य हरे चारे की बुआई की जा चुकी है, ताकि गोवंश को संतुलित आहार मिल सके।
ये 4 जिले चारा उत्पादन में अव्वल
प्रदेश के कई जिलों ने इस योजना में बेहतरीन काम किया है। हरदोई, सुल्तानपुर, कानपुर नगर और रामपुर हरे चारे के उत्पादन में शीर्ष 4 जिलों में शामिल हैं। इन जिलों में टैग की गई गोचर भूमि पर शत-प्रतिशत हरा चारा उगाया जा रहा है। चारागाह की जमीनों को समतल करने, बाड़ लगाने और खाई खोदने जैसे काम मनरेगा के माध्यम से कराए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार भी मिल रहा है।
कड़ाके की ठंड से भी बचाव के निर्देश
सरकार सिर्फ गोवंश के भोजन का ही नहीं, बल्कि उनके स्वास्थ्य का भी ध्यान रख रही है। प्रदेश में पड़ रही भीषण शीतलहर को देखते हुए सभी गो-आश्रय स्थलों में पशुओं को ठंड से बचाने के लिए पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं। इनमें पशुओं को बोरे-चट्ट ओढ़ाना और हवा से बचाव के लिए तिरपाल लगाना शामिल है, ताकि वे स्वस्थ और सुरक्षित रहें।
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