महाराष्ट्र में गन्ना कटाई करने वाले मजदूरों और ट्रांसपोर्टरों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक संगठन ने चीनी मिलों को सख्त चेतावनी दी है। संगठन का कहना है कि अगर कटाई और परिवहन दरों में 100 प्रतिशत बढ़ोतरी (दोगुना) सहित उनकी अन्य मांगें नहीं मानी गईं, तो मिलों में आगामी पेराई सत्र का काम रोक दिया जाएगा। संगठन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे फैक्ट्रियों का कामकाज शुरू नहीं होने देंगे।
मजदूरी और परिवहन दरों में 100% वृद्धि की मांग
संगठन की सबसे प्रमुख मांग गन्ना कटाई और परिवहन की मजदूरी को दोगुना करना है। संगठन के अनुसार, हर सीजन में बीड और आसपास के अन्य जिलों से लाखों मजदूर गन्ना काटने और उसे ढोने के लिए पश्चिमी महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में जाते हैं। ऐसे में उन्हें उनकी मेहनत का बेहतर दाम मिलना चाहिए। संगठन ने बैलगाड़ियों, कार्ट सेंटर, मिनी-ट्रैक्टरों, ट्रकों और गन्ने की ढुलाई में लगे अन्य सभी परिवहन साधनों की दरों में भी 100 प्रतिशत बढ़ोतरी की मांग की है।
अनिवार्य बीमा और 10 लाख रुपये का मुआवजा
मजदूरी के अलावा, संगठन ने चीनी मिलों से हर गन्ना कटाई मजदूर और ट्रांसपोर्टर के लिए अनिवार्य बीमा (इंश्योरेंस) कवर देने को कहा है। संगठन के अनुसार, यदि गन्ना कटाई के दौरान किसी दुर्घटना में किसी मजदूर की मृत्यु हो जाती है, तो मिलों द्वारा उसके परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाना चाहिए।
सामाजिक सुरक्षा और नया वेतन समझौता
मौजूदा वेतन समझौते की अवधि खत्म हो चुकी है। संगठन के अनुसार, नए वेतन समझौते को लेकर होने वाली बातचीत में केवल कटाई और परिवहन की दरों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसमें मजदूरों और उनके परिवारों की सामाजिक और वित्तीय सुरक्षा को भी शामिल किया जाना चाहिए। संगठन चाहता है कि नए समझौते में इन सभी प्रावधानों को अनिवार्य रूप से जोड़ा जाए।
पंकजा मुंडे के नेतृत्व में तेज होगा अभियान
संगठन ने कहा है कि वह महाराष्ट्र में गन्ना कटाई मजदूरों (जिन्हें आमतौर पर 'ऊसतोड कामगार' कहा जाता है) के संगठन से जुड़ीं पंकजा मुंडे के नेतृत्व में अपनी मांगों के लिए अभियान को और तेज करेगा। संगठन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें स्वीकार नहीं की गईं, तो मजदूर फैक्ट्रियों को चालू नहीं होने देंगे, जिससे पेराई सत्र की शुरुआत पूरी तरह से बाधित हो जाएगी।