केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने खेत में प्राकृतिक तरीके से तुअर की खेती की है। उन्होंने बताया कि फसल में रासायनिक खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं किया गया है। कीटों से बचाव के लिए नीमास्त्र का प्रयोग किया गया। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे भी अपने खेत के एक हिस्से में प्राकृतिक खेती अपनाएं।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए अपने खेत में तुअर की प्राकृतिक खेती का उदाहरण पेश किया है। उन्होंने बताया कि उनके खेत में तुअर की फसल अच्छी तरह बढ़ रही है और कीटों के प्रकोप से भी बची हुई है। उनके मुताबिक, सही तरीके से प्राकृतिक खेती की जाए तो इसमें अच्छी सफलता मिल सकती है।
नर्सरी में तैयार किए पौधे, फिर खेत में रोपाई
कृषि मंत्री ने बताया कि उनके खेत में तुअर की बुवाई सामान्य तरीके से नहीं की गई, बल्कि पहले पौधों को नर्सरी में तैयार किया गया। इसके बाद एक-एक पौधे को खेत में लगाया गया। उन्होंने कहा कि फसल में रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं किया गया है। कीटों से बचाव के लिए केवल नीमास्त्र का प्रयोग किया गया।
उन्होंने खेत में तुअर की अच्छी बढ़वार दिखाते हुए कहा कि प्राकृतिक तरीके से खेती करने के बावजूद फसल की बढ़त अच्छी है। यह प्राकृतिक खेती की संभावनाओं को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि बगल के खेत में मूंग की फसल भी प्राकृतिक तरीके से उगाई गई है।
कृषि मंत्री के नाते प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना ही नहीं, उसे अपने जीवन में अपनाना भी मेरा कर्तव्य है। इसलिए मैंने अपने खेत में तुअर की खेती की है, जो आज लहलहा रही है। https://t.co/UFwwxW0XqW
किसानों से खेत के एक हिस्से में प्राकृतिक खेती करने की अपील
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील के अनुरूप किसानों को अपने खेत के एक हिस्से में प्राकृतिक खेती जरूर करनी चाहिए। कृषि मंत्री होने के नाते प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना और खुद इसे अपनाना उनका कर्तव्य है। उन्होंने किसानों से भी प्राकृतिक खेती की शुरुआत करने की अपील की। उनका कहना है कि किसान अपने खेत में प्राकृतिक खेती का प्रयोग करके इसके परिणाम देख सकते हैं।
धरती को बचाने के लिए रसायनों का इस्तेमाल कम करना जरूरी
कृषि मंत्री ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए धरती को सुरक्षित रखना जरूरी है। इसके लिए रासायनिक खादों और कीटनाशकों के इस्तेमाल को संतुलित करना और धीरे-धीरे कम करना चाहिए। उन्होंने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि मिट्टी और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए खेती के तरीकों पर ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे प्राकृतिक खेती अपनाने की दिशा में प्रयास करें, ताकि खेती को अधिक टिकाऊ बनाया जा सके और धरती को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके।
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