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केरल के बागान क्षेत्र में उलट तस्वीर : रबर-कॉफी के दाम बढ़े तो चाय-इलायची ने बढ़ाई चिंता

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Mon, 21 Sep 2026 04:49 PM IST
सार

  • केरल में प्राकृतिक रबर का भाव करीब ₹185 से बढ़कर ₹217 प्रति किलो होने का दावा किया गया।
  • कॉफी पार्चमेंट की कीमत में 20 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी हुई, लेकिन मौसम की वजह से उत्पादन घटा।
  • चाय की कीमतों पर अधिक आपूर्ति, कमजोर मांग और धीमे निर्यात बाजार का दबाव है।
  • घरेलू उत्पादन बढ़ने के बाद इलायची की कीमतों में फिर नरमी आई।

केरल के बागान क्षेत्र में उलट तस्वीर
केरल के बागान क्षेत्र में उलट तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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केरल के बागान क्षेत्र के लिए यह साल मिले-जुले नतीजे लेकर आया है। प्राकृतिक रबर और कॉफी के दाम बढ़ने से किसानों और बागान मालिकों को राहत मिली है, लेकिन मौसम की मार से उत्पादन में कमी और चाय-इलायची की कमजोर कीमतों ने चिंता बढ़ाई है। एसोसिएशन ऑफ प्लांटर्स ऑफ केरल (APK) ने कहा है कि अब जरूरत सिर्फ बढ़े हुए दाम का फायदा लेने की नहीं, बल्कि खेती को मौसम के जोखिम और बढ़ती लागत से बचाने की भी है।

बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, APK के 87वें वार्षिक आम सम्मेलन से पहले जारी आकलन में कहा गया कि बागान क्षेत्र के सामने इस समय बढ़ती उत्पादन लागत, बदलता मौसम और बाजार की अनिश्चितता बड़ी चुनौतियां हैं।

रबर और कॉफी के दाम बढ़े, लेकिन उत्पादन घटा
APK के चेयरमैन टीआर राधाकृष्णन के मुताबिक प्राकृतिक रबर का भाव करीब 185 रुपये से बढ़कर 217 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है। वहीं कॉफी पार्चमेंट के दाम में 20 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। हालांकि दाम बढ़ने के साथ दोनों फसलों का उत्पादन भी कम हुआ है। इसकी वजह अनियमित मौसम और अल नीनो से जुड़ा मौसमीय असर बताया गया है।

APK का कहना है कि बढ़े हुए दाम को पूरी तरह अतिरिक्त कमाई नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि उत्पादन घटने से बाजार में फसल की उपलब्धता भी कम हुई है। संघ ने किसानों और बागान मालिकों को सलाह दी है कि बेहतर कीमत से मिलने वाली अतिरिक्त आमदनी का इस्तेमाल मौसम के अनुकूल खेती, बेहतर गुणवत्ता और प्रोसेसिंग में निवेश के लिए किया जाए।

चाय की कीमतों पर दबाव
चाय क्षेत्र में स्थिति अलग है। यहां उत्पादन लगभग स्थिर रहा है, लेकिन अधिक आपूर्ति, कमजोर मांग और धीमे निर्यात बाजार के कारण कीमतों पर दबाव बना हुआ है। APK ने चाय उत्पादकों से गुणवत्ता सुधारने और ज्यादा मूल्य वाले उत्पादों पर ध्यान देने को कहा है। साथ ही कीमतों में सुधार के लिए टी बोर्ड के साथ मिलकर काम करने की बात कही गई है।

इलायची को पहले निर्यात से फायदा, फिर नरमी
इलायची के निर्यात में कुछ समय के लिए तेजी आई थी, लेकिन घरेलू उत्पादन बढ़ने के बाद कीमतों में फिर नरमी देखी गई। APK के अनुसार इससे इलायची उत्पादकों को कीमत के मोर्चे पर पहले जैसी मजबूती नहीं मिल पा रही है।

अमेरिका की नीतियों और समुद्री संकट का असर
बागान क्षेत्र के लिए सिर्फ घरेलू बाजार ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम भी चिंता का कारण बने हुए हैं। संघ के अनुसार पहले अमेरिका की ओर से लगाए गए टैरिफ का असर निर्यातकों पर पड़ा था। बाद में इसमें कुछ राहत मिली। अब रूस से तेल आयात करने वाले देशों पर संभावित अमेरिकी टैरिफ से जुड़े प्रस्तावों पर भी नजर रखी जा रही है। इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रस्ताव कानून बनता है या नहीं और उसे किस तरह लागू किया जाता है।

इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास हुई बाधाओं से माल ढुलाई की लागत बढ़ी है और जहाजों के शेड्यूल पर असर पड़ा है। इससे चाय और प्रीमियम इलायची के निर्यात में परेशानी बढ़ी है।APK ने निर्यातकों को शिपिंग कंपनियों के साथ बेहतर तालमेल रखने, शिपमेंट की समय-सारिणी में कुछ लचीलापन रखने और ज्यादा भरोसेमंद लॉजिस्टिक्स विकल्प तलाशने की सलाह दी है।

यूरोप के नए नियमों की भी तैयारी
प्राकृतिक रबर और कॉफी के लिए यूरोप में सस्टेनेबिलिटी और ट्रेसबिलिटी से जुड़े नए नियमों की तैयारी भी चल रही है। इन नियमों के तहत यह बताना जरूरी हो सकता है कि फसल कहां पैदा हुई और उसकी आपूर्ति श्रृंखला कैसी रही। इसी को देखते हुए APK, रबर बोर्ड, कॉफी बोर्ड और बागान मालिक जियो-लोकेशन मैपिंग और जरूरी दस्तावेज तैयार करने पर काम कर रहे हैं।

जंगली जानवरों से फसल नुकसान बड़ी चिंता
केरल के बागान क्षेत्र के लिए मानव-वन्यजीव संघर्ष भी बड़ी समस्या बनी हुई है। जंगली जानवरों से फसल को होने वाले नुकसान के लिए APK ने एक व्यवस्थित मुआवजा व्यवस्था की मांग की है। संघ ने इसके लिए मोटर बीमा जैसी व्यवस्था का सुझाव दिया है, जिसमें नुकसान के दावे की प्रक्रिया आसान हो और मुआवजा तय समय में मिल सके।

भूमि कानूनों में बदलाव की मांग
APK ने मांग की है कि प्लांटेशन, कृषि भूमि और बस्तियों को प्रस्तावित पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ESA) की सीमाओं से बाहर रखा जाए। संघ ने भूमि सुधार कानून के तहत प्लांटेशन को मिली कुछ छूट की समीक्षा करने की भी मांग की है, ताकि बागान मालिक नियमों के दायरे में रहते हुए खेती में वैध विविधीकरण कर सकें।

रबर-कॉफी को दाम का सहारा, चाय-इलायची पर दबाव
केरल के बागान क्षेत्र में तस्वीर एक जैसी नहीं है। रबर और कॉफी को बेहतर कीमत का फायदा मिला है, लेकिन मौसम से उत्पादन घटने, चाय की कमजोर कीमत, इलायची में नरमी, बढ़ती लागत और निर्यात संबंधी चुनौतियों ने दबाव बढ़ाया है। ऐसे में बागान क्षेत्र की प्राथमिकता अब बेहतर दाम के साथ खेती को जलवायु और बाजार के जोखिमों से सुरक्षित बनाना है।
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