राजस्थान में पंचायत चुनाव का इंतजार खत्म हो गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने शनिवार को पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव कार्यक्रम का एलान कर दिया। राज्य में पंचायत चुनाव चार चरणों में कराए जाएंगे। चुनाव कार्यक्रम जारी होते ही ग्रामीण क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई। चुनाव के जरिए प्रदेश की 41 जिला परिषदों, 457 पंचायत समितियों और 14,403 ग्राम पंचायतों में जनप्रतिनिधि चुने जाएंगे। कुल मिलाकर करीब 1.69 लाख पंचायतीराज जनप्रतिनिधियों का चुनाव होगा।
41 जिला परिषद और 457 पंचायत समितियों में चुनाव
राज्य में 41 जिला परिषदों के 1,403 सदस्यों और 457 पंचायत समितियों के 8,245 सदस्यों के लिए चुनाव होंगे। इसके अलावा 14,403 ग्राम पंचायतों में सरपंच और वार्ड पंच चुने जाएंगे। इन ग्राम पंचायतों में कुल 1,30,584 वार्ड हैं। जिला परिषद सदस्य अपने-अपने जिले में जिला प्रमुख का चुनाव करेंगे, जबकि पंचायत समिति सदस्य प्रधान का चुनाव करेंगे। इस तरह चुनाव के बाद 41 जिला प्रमुख और 457 प्रधान चुने जाएंगे।
ईवीएम और बैलेट पेपर से होगा मतदान
चुनाव में अलग-अलग पदों के लिए मतदान की व्यवस्था भी अलग रहेगी। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव ईवीएम से कराए जाएंगे। वहीं सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव बैलेट पेपर से होंगे।
13 अक्टूबर से शुरू होगा मतदान
राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार पंचायत चुनाव चार चरणों में होंगे। उपलब्ध कार्यक्रम में मतदान की ये तारीखें दी गई हैं—
पहला चरण : 13 अक्टूबर
दूसरा चरण : 16 अक्टूबर
तीसरा चरण : 23 अक्टूबर
चौथे चरण की मतदान तारीख उपलब्ध कार्यक्रम में अलग से दी जानी है। पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव के लिए पहले चरण की अधिसूचना 8 अक्टूबर, दूसरे चरण की 13 अक्टूबर, तीसरे चरण की 19 अक्टूबर और चौथे चरण की 21 अक्टूबर को जारी होगी।
8 अक्टूबर से नामांकन प्रक्रिया
पंचायत चुनाव के लिए 8 अक्टूबर को लोक सूचना जारी होगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 13 अक्टूबर है। उम्मीदवार सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। 14 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 15 अक्टूबर नाम वापस लेने की अंतिम तारीख रखी गई है।
दिसंबर में जिला प्रमुख और प्रधान का चुनाव
चार जिलों कोटा, श्रीगंगानगर, बारां और करौली में जिला प्रमुख और प्रधानों का चुनाव 22 दिसंबर को कराया जाएगा। जिला परिषद सदस्य जिला प्रमुख और पंचायत समिति सदस्य प्रधान का चुनाव करेंगे।
महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण
राजस्थान की पंचायतीराज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण लागू रहेगा। 41 जिला प्रमुख पदों में 20 पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। इसी तरह 457 प्रधान पदों में 221 पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। जयपुर और जोधपुर में 11-11 पंचायत समितियों में महिला प्रधान चुनी जाएंगी। डूंगरपुर, बांसवाड़ा, सलूंबर और प्रतापगढ़ में प्रधान पद अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित रहेंगे।
सरपंच और वार्ड पंच के पदों पर भी आरक्षण
प्रदेश की 14,403 ग्राम पंचायतों में करीब 7,200 सरपंच पद महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे। सरपंच पदों में 3,058 एसटी, 2,493 एससी और 1,961 ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित रखे गए हैं। वहीं 1,30,584 वार्ड पंच पदों में करीब 65 हजार पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। इनमें 21,962 पद एससी और 19,117 पद एसटी के लिए आरक्षित हैं। ओबीसी के लिए करीब 15 हजार वार्ड पंच पद आरक्षित किए गए हैं।
चार जिलों में सभी सरपंच पद एसटी के लिए
बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर में कुल 1,253 सरपंच पद एसटी वर्ग के लिए आरक्षित होंगे।
सितंबर में पूरी हुई आरक्षण प्रक्रिया
पंचायतीराज चुनाव के लिए आरक्षण की प्रक्रिया पहले ही पूरी की जा चुकी है। 41 जिला प्रमुख पदों की आरक्षण लॉटरी 13 अगस्त को हुई थी। इसके बाद 23 सितंबर को 1,403 जिला परिषद सदस्य, 8,245 पंचायत समिति सदस्य और 457 प्रधान पदों की आरक्षण लॉटरी हुई।
24 सितंबर को ग्राम पंचायतों के सरपंच और वार्ड पंच पदों की आरक्षण प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई थी। अब चुनाव कार्यक्रम जारी होने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में चुनावी प्रक्रिया तेज हो गई है। चुनाव प्रक्रिया नवंबर में पूरी कराने की तैयारी है।
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