आलू किसानों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। इन्वेस्ट यूपी पहल के तहत 93.97 करोड़ रुपये की लागत से अलीगढ़ में श्यामपुर गांव के पासनई आलू प्रोसेसिंग यूनिट का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। यह प्रोसेसिंग यूनिट औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2022 का हिस्सा है।
आलू से बने पोटैटो फ्लैक्स को यूरोप तक निर्यात करने का प्लान
इस प्रोसेसिंग यूनिट के लगने से क्षेत्र के किसानों को आलू का बेहतर दाम मिल सकता है। यहां खासतौर से पोटैटो फ्लैक्स तैयार किए जाएंगे, जिन्हें यूरोप और दक्षिण एशियाई देशों को निर्यात करने का प्लान है।
काफी खास है आलू प्रोसेसिंग यूनिट
प्रस्तावित प्लांट की उत्पादन प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल किया जाएगा। इस तकनीक से उत्पादन के दौरान तापमान, नमी और गुणवत्ता के मानकों की सटीक निगरानी हो सकेगी, जिससे उत्पाद अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बन सकें। पोटैटो फ्लैक्स आलू को पकाकर, मैश करके और नियंत्रित तापमान पर सुखाकर तैयार किया जाने वाला प्रसंस्कृत उत्पाद है। इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है और खाद्य उद्योग में इसका उपयोग स्नैक्स, सूप, बेकरी तथा रेडी-टू-ईट उत्पादों में कच्चे माल के तौर पर किया जाता है।
परियोजना की प्रगति को लेकर इन्वेस्ट यूपी के सीईओ विजय किरण आनंद ने जिला उद्योग केंद्र के उपायुक्त को पत्र भेजकर प्लांट स्थल का भौतिक सत्यापन करने और वर्तमान स्थिति से अवगत कराने के निर्देश दिए हैं। जिला उद्योग केंद्र के उपायुक्त एसपी यादव के अनुसार, प्लांट का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है और विभागीय टीम जल्द ही इसका स्थलीय निरीक्षण करने जा रही है।
खेत से तैयार उत्पाद तक की प्रक्रिया
प्लांट में किसानों से प्राप्त आलू को कई चरणों से गुजार कर अंतिम उत्पाद का रूप दिया जाएगा। सबसे पहले आलू की गुणवत्ता के आधार पर छंटाई की जाएगी। इसके बाद धुलाई कर मिट्टी और गंदगी हटाई जाएगी तथा ग्रेडिंग होगी। फिर मशीनों के जरिए आलू को छीलकर काटा और पकाया जाएगा। पके हुए आलू को नियंत्रित प्रक्रिया में मैश करने के बाद पतली परत के रूप में सुखाया जाएगा। सही तरीके से सूखने के बाद इन परतों को तोड़कर फ्लैक्स बनाया जाएगा और गुणवत्ता जांच के बाद सुरक्षित पैकिंग की जाएगी।
किसानों को स्थानीय बाजार और नए रोजगार के अवसर
इस प्रोसेसिंग यूनिट के चालू होने से जिले के आलू उत्पादक किसानों को स्थानीय स्तर पर ही औद्योगिक खरीदार मिल सकेगा, जिससे कच्चे आलू की वैल्यू बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही प्लांट के संचालन, पैकेजिंग, गुणवत्ता नियंत्रण और परिवहन जैसी विभिन्न गतिविधियों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।