कर्नाटक के कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री एचके पाटिल ने गडग जिले को जल्द से जल्द सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को पत्र लिखकर कहा है कि जिले में बारिश की भारी कमी और फसल खराब होने के बावजूद उसे सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया गया है। पाटिल ने कहा कि अगर 2 अक्टूबर तक इस मामले में फैसला नहीं हुआ तो वह सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश जारी रखेंगे और 2 से 10 अक्टूबर के बीच विधायक पद से इस्तीफा देने पर फैसला करेंगे।
गडग में 49 फीसदी बारिश की कमी का दावा
एचके पाटिल के मुताबिक गडग जिले में सामान्य से करीब 49 फीसदी कम बारिश हुई है और कई क्षेत्रों में फसल पूरी तरह खराब होने की स्थिति है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद अधिकारियों ने जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने के मामले में सही आंकड़ों की अनदेखी की है। पाटिल ने कहा कि जिन इलाकों में करीब 20 फीसदी बारिश की कमी बताई गई है, उन्हें सूखाग्रस्त घोषित किया गया, जबकि गडग में कमी 49 फीसदी होने के बावजूद उसे इस सूची से बाहर रखा गया।
गडग तालुक समेत पूरे जिले को सूखा क्षेत्र घोषित करने की मांग
पाटिल ने बताया कि जिला प्रभारी मंत्री बयारेड्डी के साथ बैठक के बाद विधायकों की बैठक में गडग जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने पर सहमति बनी थी। इसमें गडग तालुक को भी शामिल करने की मांग की गई थी। उनके अनुसार, इस प्रस्ताव पर अधिकारियों की ओर से सहमति नहीं बनी।
मुख्यमंत्री ने 1 सितंबर को किया था दौरा
पाटिल ने कहा कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 1 सितंबर को गडग का दौरा किया था। उन्होंने कडमपुर से कुरसाकोप्पा तक इलाके का दौरा कर फसलों की स्थिति देखी थी। पाटिल के मुताबिक मुख्यमंत्री ने किसानों की स्थिति और फसल नुकसान को गंभीर माना था। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
अधिकारियों पर आंकड़ों की गलत व्याख्या का आरोप
कांग्रेस विधायक ने अधिकारियों पर सूखे से जुड़े आंकड़ों की गलत व्याख्या करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि इससे किसानों को मिलने वाली राहत और फसल बीमा से जुड़ी सुविधाओं पर भी असर पड़ सकता है। पाटिल ने कहा कि जमीन पर किसानों की परेशानी साफ दिखाई दे रही है, लेकिन उसका असर सरकारी फैसलों में नजर नहीं आ रहा।
उत्तरी कर्नाटक के 27 तालुकों का मुद्दा उठाया
एचके पाटिल ने कहा कि उत्तरी कर्नाटक के 73 तालुकों में से 27 तालुकों को सूखाग्रस्त क्षेत्रों की सूची से बाहर रखा गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इन क्षेत्रों में भी सूखे की स्थिति बताई जा रही है तो उन्हें सूची में शामिल क्यों नहीं किया गया। उन्होंने बारिश मापने वाले उपकरणों यानी रेन गेज की कार्यक्षमता पर भी सवाल उठाए और कहा कि केवल आंकड़ों के आधार पर किसानों की वास्तविक स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
‘सरकार से ज्यादा किसानों की चिंता’
पाटिल ने कहा कि वह सरकार का हिस्सा होने के साथ-साथ किसानों के प्रतिनिधि भी हैं। उनके मुताबिक उनकी प्राथमिक चिंता किसानों की है और गरीब किसानों को इस स्थिति में लंबे समय तक नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वह विधानसभा के मौजूदा तीन दिवसीय सत्र के दौरान सरकार के सामने यह मुद्दा उठाएंगे और 2 अक्टूबर तक अपनी ओर से प्रयास जारी रखेंगे। इसके बाद भी फैसला नहीं होने पर 10 अक्टूबर तक विधायक पद से इस्तीफे को लेकर फैसला लेने की बात कही।
वंदे मातरम के फैसले पर भी बोले पाटिल
एचके पाटिल ने राज्य सरकार के उस फैसले का भी बचाव किया, जिसमें आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम के शुरुआती दो अंतरों के इस्तेमाल की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस और रवींद्रनाथ टैगोर से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भों के अनुरूप है और राजनीतिक कारणों से इतिहास को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।