गोवा सरकार के मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को गोवा किसान उत्पादक संगठन नीति, 2026 को मंजूरी दे दी। सरकार के अनुसार, इस नीति का उद्देश्य FPO को बेहतर तरीके से चलाने, किसानों को वित्त और साझा बुनियादी ढांचे तक पहुंच देने, तकनीक अपनाने, कृषि उत्पादों में मूल्यवर्धन और बाजार तक पहुंच बढ़ाने में मदद करना है।
यह नीति 31 मार्च 2031 तक लागू रहेगी। सरकार जरूरत के अनुसार इसमें समीक्षा, बदलाव या अवधि बढ़ाने का फैसला कर सकती है।
FPO के लिए एक समान व्यवस्था बनेगी
सरकार के अनुसार, गोवा में अलग-अलग योजनाओं और पहलों के तहत FPO पहले से बनाए गए हैं। अब नई नीति के जरिए इनके पंजीकरण और श्रेणीकरण के लिए एक समान व्यवस्था बनाने की कोशिश की गई है। नीति में FPO के लिए शासन व्यवस्था, प्रबंधन, वित्त, बुनियादी ढांचा, तकनीक, मूल्यवर्धन, मार्केटिंग और सरकारी योजनाओं के साथ तालमेल से जुड़े प्रावधान किए गए हैं।
गोवा की अमृतकाल कृषि नीति, 2025 (GSAAP-2025) में भी FPO, किसान उत्पादक कंपनियों (FPC), किसान समूहों, समितियों, संगठनों और स्वयं सहायता समूहों के गठन और मजबूती को प्रमुख क्षेत्र के तौर पर शामिल किया गया है। इसी के तहत कृषि निदेशालय ने FPO के लिए अलग राज्य स्तरीय नीति तैयार की है।
FPO मिशन सेल और पोर्टल बनेगा
नई नीति के तहत कृषि निदेशालय को नोडल विभाग और लागू करने वाली एजेंसी बनाया गया है। इसके अलावा गोवा स्टेट FPO मिशन सेल बनाया जाएगा। नीति में राज्य स्तरीय FPO रिपॉजिटरी और गवर्नेंस पोर्टल बनाने का भी प्रावधान है। इसके जरिए FPO से जुड़ी जानकारी और व्यवस्था को एक जगह लाने की योजना है।
इसके अलावा अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल के लिए निगरानी और सुविधा व्यवस्था बनाई जाएगी, ताकि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ FPO तक बेहतर तरीके से पहुंचाया जा सके।
हर साल 3 करोड़ रुपये का शुरुआती फंड
नीति में FPO फंड बनाने का भी प्रावधान किया गया है। इसके लिए शुरुआती तौर पर हर साल 3 करोड़ रुपये का कोष प्रस्तावित है। हालांकि, यह राशि बजट प्रावधान, फंड की उपलब्धता और वित्त विभाग की मंजूरी पर निर्भर करेगी। सरकार के अनुसार, नीति से FPO को वित्त और साझा बुनियादी ढांचे तक पहुंच, तकनीक अपनाने, मूल्यवर्धन और बाजार से जुड़ने में मदद देने का ढांचा तैयार होगा।
कृषि निदेशालय को योजनाएं, संचालन दिशा-निर्देश, पात्रता की शर्तें, वित्तीय सीमा, निगरानी प्रक्रिया और लागू करने से जुड़े आदेश जारी करने का अधिकार भी दिया गया है। यह काम सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी और जहां जरूरी हो, संबंधित विभागों की सहमति के साथ किया जाएगा।