कम जमीन वाले किसानों के लिए लिलियम की खेती मुनाफे का सौदा साबित हो सकती है। इस फूल की खेती में निवेश काफी ज्यादा है। हालांकि निवेश की तरह आमदनी भी काफी मोटी होती है। हरियाणा के सोनीपत जिले के नवीन कुमार सरकारी शिक्षक है, लेकिन 2015 से वे पॉली हाउस में लिलियम फूल उगा रहे हैं। एक एकड़ से शुरू हुआ उनका सफर आज चार एकड़ तक पहुंच गया है।
लिलियम की किस्में और निवेश
नवीन बताते हैं कि लिलियम मुख्य रूप से तो तरीके का होता है। ओरिएंटल किस्म के एक बल्ब का दाम 60 से 70 रुपये के बीच होता है। वहीं, एशियाटिक किस्म के बल्ब का रेट 25 से 30 रुपये के बीच है। नवीन के अनुसार, एक एकड़ के पॉलीहउस में 80 हजार बल्ब लगाए जाते हैं। अगर आप एक एकड़ में एशियाटिक किस्म लगाते हैं, तो बल्ब का खर्च 24 लाख रुपये आता है। वहीं, ओरिएंटल के मामले में यह निवेश 52 लाख रुपये तक पहुंच जाता है।
लाखों का मुनाफा और एक बल्ब से दो बार कमाई
बाजार में लिलियम के फूल की एक स्टिक 35 से 45 रुपये तक बिकती है। सभी खर्चे और खराब होने वाले बल्बों को हटा दिया जाए, तो एक एशियाटिक बल्ब से 8 से 10 रुपये और ओरिएंटल बल्ब से लगभग 15 रुपये का शुद्ध मुनाफा (मार्जिन) मिल जाता है। एक एकड़ में 80,000 बल्ब लगने से यह मुनाफा लाखों में पहुंच जाता है। इलाके के हिसाब से साल में इसकी दो फसलें ली जा सकती हैं।
सितंबर से फरवरी तक बुवाई
लिलियम मुख्य रूप से सर्दी की फसल है। इसकी बुवाई सितंबर से शुरू होकर फरवरी तक चलती है। यह 3 महीने की फसल है। बाजार में लगातार सप्लाई बनी रहे और अच्छे दाम मिलें, इसके लिए एक साथ बुवाई न करके हर 7 से 10 दिन में 20 से 25 हजार बल्ब का एक लॉट लगाया जाता है।
निवेश के साथ-साथ इस खेती में जोखिम भी बड़ा है। लिलियम के लिए धूप बहुत जरूरी है। सर्दियों में बुवाई के बाद यदि लगातार 3 दिन तक सूरज की रोशनी (Sunlight) नहीं मिलती है, तो इसकी कलियां गिर (Bud drop) जाती हैं और फसल पूरी तरह जीरो हो जाती है।