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Cotton: खपत 365 तो पैदावार 280 लाख गांठ, इस बार टूटेगा विदेशी कपास की खरीद का रिकॉर्ड? घरेलू भाव पर क्या असर?

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Sat, 31 Oct 2026 05:37 PM IST
सार

  • चालू सत्र में कपास का आयात पिछले साल के रिकॉर्ड को पार कर सकता है
  • घरेलू कपास उत्पादन घटकर 280 लाख गांठ रहने का अनुमान, जबकि खपत 365 लाख गांठ तक पहुंच सकती है।
  • केंद्र सरकार ने कपास पर 11% आयात शुल्क की छूट 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ाई है।
  • मंडियों में कपास की आवक सुस्त है, किसान अच्छे दाम की आस में है
  • जानकारों का एक वर्ग आयात शुल्क की समय सीमा में बढ़ोतरी से घरेलू कीमतों पर कोई बड़े असर से इनकार कर रहा है।

कम उपज के बीच भारतीय बाजार में विदेशी कपास की सप्लाई बढ़ सकती है।
कम उपज के बीच भारतीय बाजार में विदेशी कपास की सप्लाई बढ़ सकती है। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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भारत में मार्केटिंग वर्ष 2026-27 (अक्टूबर-सितंबर) के लिए कपास का आयात अपने एक नए उच्चतम स्तर पर पहुंचने के लिए तैयार है। प्रमुख उत्पादक राज्यों में कम बुवाई और सूखे के कारण घरेलू पैदावार पर काफी असर पड़ा है। व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, इस साल कपास का आयात पिछले साल के रिकॉर्ड 71 लाख गांठ (प्रति गांठ 170 किलो) के स्तर की बराबरी कर सकता है या उसे भी पार कर सकता है। कपास के आयात में इस बड़े उछाल का मुख्य कारण सरकार द्वारा सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) में दी गई छूट है, जिसे पहले ही दिसंबर 2026 के अंत तक बढ़ा दिया गया था।

घरेलू पैदावार घटी, लेकिन खपत में आया भारी उछाल
राधा लक्ष्मी ग्रुप के सीएमडी, अतुल गणात्रा के अनुसार, भारत ने 2025-26 के दौरान रिकॉर्ड 71 लाख गांठ कपास का आयात किया था (जो उससे पिछले साल 41 लाख गांठ था)। उस समय देश में लगभग 330 लाख गांठ का उत्पादन हुआ था, जो दिखाता है कि भारत में कपास की खपत बहुत अधिक है। गणात्रा ने बताया कि साल 2026-27 के लिए घरेलू फसल घटकर करीब 280 लाख गांठ रहने का अनुमान है, जबकि खपत पिछले साल के 315 लाख गांठ से बढ़कर 365 लाख गांठ हो गई है। इस कमी को पाटने के लिए आयात का बढ़ना तय है।

खपत बढ़ने का मुख्य कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि पश्चिमी एशिया में युद्ध के बाद कच्चे तेल के दाम बढ़े हैं, जिससे पॉलिएस्टर और विस्कोस जैसे सिंथेटिक धागे लगभग 35 प्रतिशत तक महंगे हो गए हैं। इसके चलते कपड़ा मिलों का झुकाव अब सूती (कपास) धागे की ओर बढ़ गया है। इसके अलावा, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में नई मिलें (स्पिंडल क्षमता) खुलने और चीन व बांग्लादेश से धागे की अच्छी मांग आने से भी कपास की खपत बढ़ी है।

मिलों को मिलेगा फायदा, विदेशी बाजार में बढ़ेगी पकड़
कपास संघ (सीएआई) के अध्यक्ष विनय एन कोटक के अनुसार, ड्यूटी में छूट रहने से भारतीय मिलों को सही दाम पर साफ और बिना मिलावट वाली विदेशी कपास मिल सकेगी। उनका कहना है कि इस साल फसल कम है, इसलिए इस आयात से विश्व बाजार में चीन और बांग्लादेश जैसे देशों के सामने हमारे कपड़ा उत्पादों की ताकत और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

गौरतलब है कि कपड़ा उद्योग में कपास की सप्लाई बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 1 जून से 11 प्रतिशत आयात शुल्क हटा दिया था। पहले इसकी समय सीमा 31 अक्टूबर तक थी, जिसे सरकार ने पहले ही बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दिया था।

बाजार के मौजूदा भाव और किसानों की स्थिति
राजकोट के कॉट-यार्न ट्रेडलिंक के आनंद पोपट ने कहा कि आयात शुल्क छूट से आयातित कपास पर प्रीमियम लगभग 1-2 सेंट प्रति पाउंड बढ़ जाएगा और कुल आयात पिछले साल के स्तर को पार कर सकता है। दक्षिण भारत और गुजरात के बड़े खरीदारों की तरफ से मांग भी तेज हो रही है। इस समय घरेलू बाजार में कपास का भाव 66,000 से 67,000 रुपये प्रति कैंडी (356 किलो) के आसपास चल रहा है। मिल तक पहुंचने तक ब्राजील से आने वाली कपास का भाव भी लगभग 67,000 रुपये प्रति कैंडी ही पड़ रहा है। ऐसे में पोपट के अनुसार, मौजूदा घरेलू कीमतों में ज्यादा गिरावट की उम्मीद नहीं है।

पोपट ने बताया कि आयात छूट का सबसे ज्यादा फायदा उन बहुराष्ट्रीय कंपनियों को होगा, जिन्होंने सिंगापुर, मलेशिया और इंडोनेशिया के बंदरगाहों पर कपास का स्टॉक रखा है। ब्राजील जैसे दूर के देशों से नया सौदा कर कपास मंगाने के लिए दो महीने का समय काफी कम है।

रायचूर के सोर्सिंग एजेंट रामानुज दास बूब ने कहा कि ड्यूटी छूट से आयात में प्रतिस्पर्धा बनी रहेगी और घरेलू कीमतों पर लगाम लगेगी। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि इस साल फसल कम है, इसलिए किसानों के हितों का भी ध्यान रखना जरूरी है। बूब के अनुसार, अगर धागे के दाम कमजोर रहते हैं तो मिलें सोच-समझकर ही कपास खरीदेंगी। आयात का असली असर अंतरराष्ट्रीय वायदा बाजार (ICE Futures), डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल और मंडियों में आवक पर निर्भर करेगा। उनके अनुसार, दूर से कपास मंगाने के लिए ड्यूटी फ्री आयात की छूट को तीन महीने के लिए बढ़ाया जाना चाहिए था।

व्यापारियों का कहना है कि नई फसल अलग-अलग मंडियों में आने लगी है, लेकिन आवक उम्मीद से कम है। फिलहाल रोजाना करीब 70,000-80,000 गांठें ही आ रही हैं। पैदावार घटने की आशंका के बीच, किसान और अच्छे भाव की उम्मीद में अपनी उपज रोक कर बैठे हैं। दीपावली के बाद मंडियों में कपास की आवक तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है।


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