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Chattisgarh: बस्तर में बारिश-बाढ़ से 4,000 हेक्टेयर धान की फसल तबाह, 300 से ज्यादा गांवों पर असर...

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Sat, 03 Oct 2026 07:18 PM IST
सार

  • बस्तर संभाग में 4,000 हेक्टेयर धान की फसल तबाह
  • 300 से अधिक गांव बारिश और बाढ़ से प्रभावित
  • 23 से 26 सितंबर के बीच आई आपदा से नुकसान
  • पूरी तरह नष्ट फसल पर 10 हजार रुपये प्रति एकड़ सहायता
  • मकान ढहने पर 1.20 लाख रुपये देने की घोषणा

हजारों हेक्टेयर में धान की फसल तबाह।
हजारों हेक्टेयर में धान की फसल तबाह। - फोटो : AI
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विस्तार
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छत्तीसगढ़ के बस्तर में बारिश और बाढ़ से खेती-किसानी के साथ जनजीवन भी प्रभावित हुआ है। 23 से 26 सितंबर के बीच आई आपदा में करीब 4,000 हेक्टेयर में लगी धान की फसल तबाह हो गई है। इस दौरान संभाग के 300 से अधिक गांव सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। बताई गई जानकारी के अनुसार, मूसलाधार बारिश, तूफानी स्थिति और ओडिशा स्थित इंद्रावती जलाशय से अचानक छोड़े गए पानी के कारण कई इलाकों में बाढ़ और जलभराव की स्थिति बनी। खेतों में पानी भरने से पकने की ओर बढ़ रही धान की फसल को नुकसान पहुंचा है।

मकान और मवेशियों को भी नुकसान
बाढ़ और तेज पानी के बहाव से कई कच्चे और पक्के मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। तेज बहाव में कई मवेशियों के बह जाने की जानकारी भी दी गई है। इससे ग्रामीणों और छोटे दुकानदारों को भी नुकसान उठाना पड़ा है।

किसानों से लेकर आम लोगों तक मुआवजे का एलान
राज्य सरकार के अनुसार, जिन किसानों की फसल पूरी तरह नष्ट हुई है, उन्हें प्रति एकड़ 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। जिन लोगों के मकान ढह गए हैं, उन्हें नया मकान बनाने के लिए 1,20,000 रुपये देने की घोषणा की गई है। फिलहाल राजस्व विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का सर्वे कर रही हैं। सरकार के अनुसार, सर्वे पूरा होने के बाद प्रभावित लोगों के खातों में मुआवजा राशि वितरित की जाएगी।

खास राहत पैकेज की मांग
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री और एनडीएमए अध्यक्ष सीआर पाटिल, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा को पत्र लिखकर प्रभावित लोगों के लिए विशेष राहत पैकेज की मांग की है। उन्होंने नष्ट हुई खरीफ फसलों के लिए एनडीआरएफ मद से तत्काल विशेष राहत राशि देने और बेघर परिवारों को पीएम आवास योजना के तहत मकान देने का अनुरोध किया है। इसके अलावा बह गए मवेशियों और छोटे दुकानदारों का सर्वे कराकर सीधे डीबीटी के जरिए मुआवजा देने की मांग की गई है। पत्र में जोरा नाला में जल विचलन रोकने के लिए आधुनिक हाइड्रोलॉजिकल अध्ययन के आधार पर नया और संशोधित डीपीआर तैयार करने की मांग भी की गई है।

उन्होंने नदियों के तटवर्ती क्षेत्रों में पौधरोपण और पक्के तटबंध बनाने तथा जगदलपुर शहर के लिए एकीकृत स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने का भी आग्रह किया है।
 
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