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Bastar Floods 4 000 Hectares Of Paddy Crop Damaged Over 300 Villages Affected
छत्तीसगढ़: बस्तर में बारिश-बाढ़ से 4,000 हेक्टेयर फसल तबाह, 300 से ज्यादा गांव प्रभावित
गांव जंक्शन डेस्क, रायपुर
Published by: Umashankar Mishra
Updated Sat, 03 Oct 2026 07:05 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में 23 से 26 सितंबर के बीच हुई मूसलाधार बारिश और बाढ़ से खेती और जनजीवन प्रभावित हुआ है। करीब 4,000 हेक्टेयर धान की फसल तबाह होने और 300 से अधिक गांव प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।
कई जगह मवेशियों के बहने और ग्रामीणों की आजीविका प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।
- फोटो : AI (सांकेतिक तस्वीर)
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में 23 से 26 सितंबर के बीच हुई मूसलाधार बारिश, चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ और इंद्रावती नदी में अचानक बढ़े जलस्तर से व्यापक नुकसान हुआ है। करीब 4,000 हेक्टेयर में लगी धान की फसल प्रभावित होने और 300 से अधिक गांवों के सीधे प्रभावित होने की जानकारी है। खेतों में पानी भरने से पकने की ओर बढ़ रही धान की फसल सड़ने लगी है।
फसलों, घर और पशुधन को नुकसान
अचानक आई बाढ़ और तेज बहाव से खेतों के साथ कच्चे-पक्के मकानों को भी नुकसान पहुंचा है। कई जगह मवेशियों के बहने और ग्रामीणों की आजीविका प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। बाढ़ के बाद प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन शुरू किया गया है।
किसानों और परिवारों के लिए राहत
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर मकान, फसल और पशुधन के नुकसान का तेजी से सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं। पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के पुनर्निर्माण के लिए 1.20 लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा की गई है। इसके अलावा प्रभावित परिवारों को मुख्यमंत्री राहत कोष से 10-10 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता देने की भी घोषणा हुई है।
विशेष राहत पैकेज की मांग
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा को पत्र लिखकर विशेष राहत पैकेज की मांग की है। उन्होंने नष्ट खरीफ फसलों के लिए एनडीआरएफ मद से तत्काल सहायता, बेघर परिवारों को पीएम आवास योजना के तहत मकान और बह गए मवेशियों व छोटे दुकानदारों के नुकसान का सर्वे कर डीबीटी से मुआवजा देने का आग्रह किया है।
किरण सिंह देव ने जोरा नाला के लिए आधुनिक हाइड्रोलॉजिकल अध्ययन के आधार पर संशोधित डीपीआर, तटवर्ती क्षेत्रों में पौधरोपण व पक्के तटबंध और जगदलपुर में एकीकृत स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने की मांग भी की है। साथ ही इंद्रावती बेसिन में जलस्तर की निगरानी और समय पर चेतावनी की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया है।
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