राजस्थान के जयपुर में 19 और 20 सितंबर को आयोजित हुए 5वें राष्ट्रीय मसाला सम्मेलन का समापन हो चुका है। दो दिनों तक चले इस सम्मेलन में किसानों और उपभोक्ताओं के हितों पर मंथन हुआ। कार्यक्रम की थीम भी किसानों को सशक्त बनाना, उपभोक्ताओं की रक्षा करना रखी गई थी।
किसानों को बेहतर भाव, उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ाने पर फोकस
वर्ल्ड स्पाइस ऑर्गनाइजेशन के चेयरमैन रामकुमार मेनन के अनुसार, एनएससी 2026 ने मसाला मूल्य श्रृंखला के विभिन्न हितधारकों को दो प्रमुख प्राथमिकताओं के इर्द-गिर्द इकट्ठा किया है: किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने में सक्षम बनाना और उपभोक्ताओं का मसालों के प्रति भरोसा बढ़ाना। उन्होंने बताया कि अब मुख्य जोर इन चर्चाओं को मूल्य श्रृंखला में सहयोग और ठोस कार्रवाई के जरिए आगे ले जाने पर है।
टिकाऊ खेती-बाजार पहुंच जैसे मोर्चों पर भी मंथन
खाद्य सुरक्षा, जिम्मेदारीपूर्ण खरीद, टिकाऊ कृषि, नवाचार और बाजार तक पहुंच जैसे विषय भी चर्चा का हिस्सा रहे। इस दौरान स्वदेशी कृषि-उत्पादों और नई तकनीकों को प्रदर्शित करने के लिए एक प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसके अलावा, बाजार संपर्क (मार्केट लिंकेज) को आसान बनाने के लिए एक विशेष 'क्रेता-विक्रेता बैठक' (Buyer-Seller Meet) का आयोजन भी किया गया।
जैविक खेती के बदलते नियमों पर चर्चा
सम्मेलन के दूसरे दिन पहले सत्र में जैविक खेती और प्रमाणन के बदलते नियमों पर चर्चा हुई। इसके बाद उपभोक्ता सुरक्षा और खेत के स्तर पर गुणवत्ता मजबूत करने में किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) की भूमिका पर जोर दिया गया।
जैविक उत्पादों का निर्यात कई गुना बढ़ा
आईसीसीओए (ICCOA) के सीईओ मनोज कुमार मेनन के अनुसार, भारत का जैविक क्षेत्र अब काफी आगे बढ़ चुका है। उन्होंने बताया कि जैविक उत्पादों का निर्यात 2005 के 67 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025 में 5,400 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है, और इसमें विकास की और भी संभावनाएं हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक बाजारों और नियमों के बदलाव के साथ-साथ मजबूत प्रमाणन और नियमों का पालन करना इस गति को बनाए रखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।
एनएससी 2026 व्यापार समिति के अध्यक्ष के.डी. गणपति ने बाजार और खरीदारों की बढ़ती उम्मीदों को पूरा करने के लिए उत्पादकों और एफपीओ के लिए जरूरी बातों की रूपरेखा पेश की। राष्ट्रीय मसाला सम्मेलन की शुरुआत 2022 में हुई थी, और तब से यह भारतीय मसाला उद्योग के लिए एक प्रमुख कार्यक्रम बन गया है। इसमें भाग लेने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सम्मेलन का समापन मसाला पारिस्थितिकी तंत्र में सहयोग मजबूत करने और किसानों, एफपीओ, उद्योग, नियामकों और खरीदारों के बीच बेहतर संबंध बनाने के संकल्प के साथ हुआ। यह सम्मेलन खेत-स्तर की प्रथाओं को उपभोक्ता सुरक्षा और उभरती बाजार आवश्यकताओं से जोड़ने का एक साझा मंच साबित हुआ।