उत्तर प्रदेश में धान बेचने वाले किसानों के लिए इस खरीफ सीजन में सरकार ने बड़ी खरीद का लक्ष्य रखा है। राज्य सरकार खरीफ विपणन सत्र 2026-27 में 28 फरवरी 2027 तक 65 लाख टन धान खरीदने की तैयारी कर रही है। इस खरीद के जरिए प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में करीब 16,000 करोड़ रुपये पहुंचने का अनुमान है। किसान अपना धान केंद्र और राज्य सरकार की एजेंसियों के बनाए करीब 4,500 खरीद केंद्रों पर बेच सकेंगे। इनमें भारतीय खाद्य निगम (FCI) के केंद्र भी शामिल हैं।
धान खरीद के लिए केंद्र सरकार ने इस साल सामान्य धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,441 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान का MSP 2,461 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के किसानों को धान उतारने, छानने और साफ करने के लिए 20 रुपये प्रति क्विंटल अलग से मिलेंगे।
48 घंटे में किसानों के खाते में पहुंचेगा भुगतान
राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि धान बेचने वाले किसानों को 48 घंटे के भीतर भुगतान किया जाए। यह भुगतान डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजा जाएगा।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि धान खरीद केंद्रों पर किसानों को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए सभी खरीद केंद्रों पर जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने को कहा गया है।
उपलब्ध ताजा आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में सरकारी एजेंसियां अब तक करीब 25 हजार टन धान खरीद चुकी हैं। वहीं, किसानों को लगभग 62 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
पिछले साल खरीदा गया था 62 लाख टन धान
उत्तर प्रदेश में धान की सरकारी खरीद आमतौर पर अक्टूबर में पश्चिमी उत्तर प्रदेश से शुरू होती है। इसके बाद नवंबर में पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश के इलाकों में खरीद शुरू होती है। पिछले दो खरीफ विपणन सीजन में राज्य में धान की सरकारी खरीद में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024-25 में 52 लाख टन धान खरीदा गया था। वहीं, 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 62 लाख टन पहुंच गया।
इस साल सरकार ने खरीद का लक्ष्य बढ़ाकर 65 लाख टन रखा है। हालांकि, किसानों को अपनी उपज सरकारी खरीद केंद्रों पर ही बेचने की अनिवार्यता नहीं है। अगर बाजार में धान का भाव MSP के बराबर या उससे बेहतर मिलता है, तो किसान निजी खरीदारों को भी अपनी उपज बेच सकते हैं।
पारदर्शिता के लिए खरीद केंद्रों की जियो टैगिंग
धान खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए राज्य में खरीद केंद्रों, चावल मिलों और भारतीय खाद्य निगम (FCI) के गोदामों और डिपो की जियो टैगिंग की गई है। इससे खरीद व्यवस्था से जुड़े केंद्रों की पहचान और निगरानी की जा सकेगी।
राज्य सरकार के अनुसार, पिछले चार वर्षों में धान की सरकारी खरीद से 37 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिला है। उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख धान, गेहूं और गन्ना उत्पादक राज्यों में शामिल है। इन फसलों की संस्थागत खरीद के जरिए राज्य में हर साल 60 हजार करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन होता है। उत्तर प्रदेश खाद्य एवं रसद विभाग सरकारी खरीद का दायरा और बढ़ाने के लिए भी कदम उठा रहा है। इस साल 65 लाख टन धान खरीदने का लक्ष्य इसी खरीद व्यवस्था का हिस्सा है।