युवाओं के लिए खेती-बाड़ी में करियर बनाने के काफी मौके हैं। नागालैंड के पी़फेक जिले की रहने वाली वेसालू पुरो से मिलिए, जिन्होंने सात साल नौकरी करने के बाद खेती की ओर लौटना का फैसला लिया। आज वेसालू 1.5 हेक्टेयर जमीन में 400 किस्मों के फूल उगा रही हैं।
साल 2021 से शुरू हुआ चुनौती भरा सफर
नौकरी से खेती की यात्रा की कहना साल 2021 से शुरू होती है। इस दौरान वेसालू ने छोटे स्तर पर फूल की खेती शुरू की। उन्हें पता था कि शादियों से लेकर चर्च तक फूल की अच्छी-खासी मांग है। दूसरी ओर भारी बारिश और परिवहन की चुनौतियों का सामना करते हुए वेसालू को असम स्थित सीएसआईआर-उत्तर पूर्व विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान और कृषि विज्ञान केंद्र, पी़फेक से सहयोग मिला।
वैज्ञानिक तकनीक से बढ़ा मुनाफा
आईसीएआर-केवीके, पी़फेक ने वेसालू को ग्लेडियोलस की उन्नत किस्म अर्का अमर से परिचित कराया। उन्हें 6,000 बीज दिए गए और वैज्ञानिक तरीके से पोषक तत्व, जल प्रबंधन और कीट नियंत्रण का प्रशिक्षण दिया गया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मात्र 0.25 एकड़ भूमि पर वेसालू ने 5,400 फूल प्राप्त किए। 15 रुपये प्रति फूल की औसत कीमत पर उन्हें 81,000 रुपये की सकल आय हुई, जिसमें उनका शुद्ध लाभ 52,070 रुपये रहा।
6 लोगों को रोजगार, एग्रो-टूरिज्म मॉडल अपनाया
वेसालू का यह स्टार्टअप अब केवल फूलों की बिक्री तक सीमित नहीं है। उनके फार्म में 6 लोग स्थायी रूप से काम कर रहे हैं और कई दैनिक आधार पर मजदूरों को भी काम मिलता है। उनके फूल नगालैंड तक सीमित न रहकर दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में महक रहे हैं। इसके अलावा, उन्होंने अपने व्यवसाय को एग्रो-टूरिज्म और शादियों के लिए गुलदस्ते तैयार करने जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार दिया है।
वेसालू फूलों की खेती अपनाने के लिए गांव के युवाओं और महिलाओं को प्रोत्साहित कर रही हैं। आने वाले समय में वेसालू अच्छी रोपण सामग्री तैयार करने और बाजार पहुंच बढ़ाना चाहती हैं।