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Kissa Kahawat Ka When The Fence Eats Up The Field Who Will Guard It
किस्सा कहावत का : बाड़ ही जब खेत को खाए, तो रखवाली कौन करे?
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Umashankar Mishra
Updated Tue, 24 Dec 2024 11:49 AM IST
सार
बाड़ ही जब खेत को खाए, तो रखवाली कौन करे? इस कहावत का अर्थ है कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो फिर सुरक्षा कौन करेगा? ऐसी बहुत-सी कहावतें और लोकोक्तियां ग्रामीण लोकजीवन में रची-बसी हुई हैं।
जिंदगी में पैसे को अहमियत दी जाती है, जिसकी झलक कहावतों में भी देखने को मिलती है।
- फोटो : गांव जंक्शन
लोकजीवन में रची-बसी कहावतें जिंदगी का आईना कही जा सकती हैं। सीधे, सपाट और बेबाक अंदाज में कहावतों में जिंदगी की सच्चाई को बयां किया गया है। ऐसी ही कुछ कहावतें यहां दी जा रही हैं...
1. बाड़ ही जब खेत को खाए, तो रखवाली कौन करे?
रक्षक का भक्षक हो जाना।
2. बाप भला न भइया, सब से भला रूपइया।
धन ही सबसे बड़ा होता है।
3. बाप न मारे मेढकी, बेटा तीरंदाज।
छोटे का बड़े से आगे बढ़ जाना।
4. बाप से बैर, पूत से सगाई
अपनों से दुश्मनी और दूसरों से लगाव।
5. बासी कढ़ी में उबाल नहीं आता।
सफल होने के लिए शक्ति का होना आवश्यक है।
6. बिंध गया सो मोती, रह गया सो सीप।
जो वस्तु काम आ जाए वही अच्छी होती है।
7. बिच्छू का मंतर न जाने, सांप के बिल में हाथ डाले।
मूर्खतापूर्ण कार्य करना।
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