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Palm Oil Prices Fall More Than 2 On Rising Stocks In Malaysia And Weak Demand
पाम ऑयल की कीमतों में 2% से ज्यादा गिरावट : मलेशिया में बढ़ते स्टॉक और कमजोर मांग का असर
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Fri, 25 Sep 2026 02:09 PM IST
सार
मलेशिया में पाम ऑयल का उत्पादन बढ़ने और निर्यात कमजोर रहने से कीमतों पर दबाव बढ़ा है। दिसंबर वायदा 2.05% गिरकर 4,674 रिंगिट प्रति टन पर आ गया, जबकि भारत की खरीदारी भी सुस्त बताई जा रही है।
मलेशिया में पाम ऑयल का उत्पादन बढ़ने और निर्यात कमजोर रहने की आशंका से कीमतों पर दबाव बढ़ गया है। शुक्रवार को मलेशियाई बाजार में पाम ऑयल वायदा कीमत 2 फीसदी से ज्यादा गिर गई। भारत की ओर से खाद्य तेलों पर आयात शुल्क घटाए जाने के बावजूद बाजार में तेजी नहीं आई। कारोबारियों के मुताबिक, मलेशिया में बढ़ता स्टॉक और भारत की सुस्त खरीदारी आने वाले दिनों में पाम ऑयल की कीमतों पर दबाव बनाए रख सकती है।
दिसंबर वायदा 2.05 फीसदी टूटा
मलेशिया के बर्सा मलेशिया डेरिवेटिव्स एक्सचेंज में दिसंबर डिलीवरी वाला प्रमुख पाम ऑयल वायदा अनुबंध शुक्रवार दोपहर तक 98 रिंगिट यानी 2.05 फीसदी गिरकर 4,674 रिंगिट प्रति टन पर आ गया। इस सप्ताह अब तक इस अनुबंध की कीमत में 3.1 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। इससे पिछले सप्ताह पाम ऑयल वायदा 1.74 फीसदी बढ़ा था।
मलेशिया में 31 लाख टन से ज्यादा स्टॉक की आशंका
मुंबई स्थित वेजिटेबल ऑयल ब्रोकर कंपनी सनविन ग्रुप के रिसर्च प्रमुख अनिलकुमार बागानी ने बिजनेस लाइन को बताया कि भारत में आयात शुल्क घटाए जाने के बावजूद पाम ऑयल वायदा बाजार में कमजोरी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि उम्मीद से ज्यादा उत्पादन और कमजोर निर्यात के कारण मलेशिया में सितंबर के अंत तक पाम ऑयल का स्टॉक 31 लाख टन से ज्यादा हो सकता है। बढ़ता स्टॉक बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ा सकता है।
भारत ने खाद्य तेलों पर घटाया आयात शुल्क
भारत सरकार ने बुधवार को कच्चे और रिफाइंड खाद्य तेलों पर मूल आयात शुल्क में कटौती की है। इसमें पाम ऑयल, सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल शामिल हैं। सरकार ने त्योहारी सीजन में खाद्य तेलों की कीमतों को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है। हालांकि, आयात शुल्क में कटौती के बावजूद भारत की ओर से पाम ऑयल की खरीद फिलहाल कमजोर बताई जा रही है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य तेल आयातक है। इसलिए भारतीय मांग में बदलाव का वैश्विक पाम ऑयल बाजार पर भी असर पड़ता है।
अल नीनो का असर अभी नहीं दिखा
उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक, मलेशिया में बढ़ता स्टॉक और भारत की कमजोर खरीदारी पाम ऑयल की कीमतों पर दबाव डाल रहे हैं। इसके साथ ही अल नीनो के संभावित असर का इंतजार भी बाजार कर रहा है। फिलहाल इसका असर पाम ऑयल उत्पादन पर स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दिया है।
कच्चे तेल की कीमतों में भी नरमी
कच्चे तेल की कीमतों में भी हल्की गिरावट आई है। बाजार में अमेरिका और ईरान के बीच संभावित युद्धविराम की संभावना तथा सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हमले को लेकर स्थिति पर नजर है। कच्चे तेल की कीमत कम होने से बायोडीजल बनाने में पाम ऑयल का इस्तेमाल अपेक्षाकृत कम आकर्षक हो जाता है। इससे पाम ऑयल की मांग पर भी असर पड़ सकता है।
सोया तेल भी कमजोर
शिकागो बोर्ड ऑफ ट्रेड में सोया तेल की कीमत 1.02 फीसदी गिर गई। वहीं, सार्वजनिक अवकाश के कारण डालियान कमोडिटी एक्सचेंज बंद रहा। पाम ऑयल की कीमतों पर सोया तेल और सूरजमुखी तेल जैसे दूसरे खाद्य तेलों की कीमतों का भी असर पड़ता है, क्योंकि ये सभी वैश्विक वनस्पति तेल बाजार में एक-दूसरे के विकल्प हैं।
रुपये की चाल का भी असर
मलेशियाई रिंगिट शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले 0.22 फीसदी मजबूत हुआ। इससे डॉलर में कारोबार करने वाले विदेशी खरीदारों के लिए पाम ऑयल थोड़ा महंगा हो गया, जिसका मांग पर असर पड़ सकता है।
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