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Home› Khabar Junction› Hyderabad To Host World Aquaculture India 2025 From November 11 To 13 Focus On Export Growth And Blue Revolution

WAI: हैदराबाद में 11 से 13 नवंबर तक होगा ‘वर्ल्ड एक्वाकल्चर इंडिया 2025’, इन मुद्दों पर होगी चर्चा

गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा Published by: Himanshu Mishra Updated Mon, 10 Nov 2025 01:08 PM IST
सार

भारत का मत्स्य क्षेत्र पहले से ही विश्व का दूसरा सबसे बड़ा एक्वाकल्चर उत्पादक है। ऐसे में इस सम्मेलन से देश की ब्लू इकॉनमी और समुद्री निर्यात नीति को नया आयाम मिलने की उम्मीद है। 

मछलीपालन
मछलीपालन - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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भारत के समुद्री और मत्स्य क्षेत्र में तेजी से बढ़ते अवसरों के बीच, हैदराबाद इस साल एक बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन की मेजबानी करने जा रहा है। वर्ल्ड एक्वाकल्चर सोसाइटी (World Aquaculture Society - WAS) द्वारा आयोजित ‘वर्ल्ड एक्वाकल्चर इंडिया 2025’ सम्मेलन और प्रदर्शनी 11 से 13 नवंबर तक हैदराबाद इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (Novotel) में आयोजित होगी। यह आयोजन एशिया-प्रशांत क्षेत्र सहित दुनिया के विभिन्न देशों के विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, निवेशकों और नीति-निर्माताओं को एक मंच पर लाएगा, जहां एक्वाकल्चर (मत्स्य पालन) उद्योग के सभी पहलुओं पर चर्चा होगी।

MPEDA की समानांतर सत्र में "ब्लू रिवॉल्यूशन" पर चर्चा
इस आयोजन में मरीन प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (MPEDA) भी एक समानांतर सत्र आयोजित करेगी, जिसका विषय होगा, “हर्नेसिंग इंडिया’स ब्लू रिवॉल्यूशन फॉर एक्सपोर्ट ग्रोथ इन एक्वाकल्चर” (भारत की नीली क्रांति को निर्यात वृद्धि के लिए उपयोग करना)। एमपीईडीए का यह सत्र देश के मछली उत्पाद निर्यात क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इसका उद्देश्य मत्स्य संसाधनों का सतत और जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित करना है, ताकि भारत के ब्लू इकोनॉमी (Blue Economy) को मजबूती मिले।

कई प्रमुख विषयों पर होंगी तकनीकी चर्चाएं
  • Export Oriented Aquaculture (निर्यात केंद्रित मत्स्य पालन)
  • Strategic Development Focus (रणनीतिक विकास पर फोकस)
  • Stakeholder Consultation (हितधारकों से चर्चा)
  • Innovation and Expansion in Aquaculture (नवाचार और विस्तार)
  • Marine Product Export Potential of States (राज्यों में समुद्री उत्पादों की निर्यात क्षमता)
  • Value Addition and Processing (मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण तकनीकें)

इन सत्रों में उद्योग विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, निर्यातक और नीति विशेषज्ञ अपने अनुभव, शोध और सफल परियोजनाओं के उदाहरण साझा करेंगे।

वैश्विक मछली उत्पादन की चुनौतियों पर चर्चा
जैसे-जैसे दुनिया की जनसंख्या बढ़ रही है और प्राकृतिक मत्स्य संसाधन अपनी जैविक सीमा के करीब पहुंच रहे हैं, एक्वाकल्चर (Aquaculture) वैश्विक फिशरी उत्पादों की मांग को पूरा करने में अहम भूमिका निभा रहा है। सम्मेलन में विशेषज्ञ इस बात पर विचार करेंगे कि कैसे टिकाऊ मत्स्य पालन तकनीकें न केवल उत्पादन बढ़ा सकती हैं बल्कि पर्यावरण और समुद्री पारिस्थितिकी की रक्षा में भी योगदान दे सकती हैं।

MPEDA का लक्ष्य: टिकाऊ और जिम्मेदार विकास
एमपीईडीए ने कहा कि इस आयोजन के दौरान होने वाली चर्चाओं और सुझावों के आधार पर वह एक्वाकल्चर उद्योग के जिम्मेदार और सतत विकास के लिए ठोस सिफारिशें तैयार करेगा। इन सिफारिशों से न केवल भारत के समुद्री उत्पादों के निर्यात को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में मदद मिलेगी, बल्कि किसानों और मत्स्यपालकों को भी अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त होगा।

भारत की ‘ब्लू इकॉनमी’ को नई दिशा
भारत का मत्स्य क्षेत्र पहले से ही विश्व का दूसरा सबसे बड़ा एक्वाकल्चर उत्पादक है। ऐसे में इस सम्मेलन से देश की ब्लू इकॉनमी और समुद्री निर्यात नीति को नया आयाम मिलने की उम्मीद है। सरकार और निजी क्षेत्र के बीच साझेदारी से नई तकनीकों, नवाचारों और निवेश अवसरों को बढ़ावा देने पर भी जोर रहेगा।
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