कश्मीर के अपर राजवार इलाके में बुधवार रात आई तेज आंधी और ओलावृष्टि ने सेब बागवानों को भारी नुकसान पहुंचाने का काम किचा है। सेब की तुड़ाई शुरू होने में कुछ ही दिन बचे थे, लेकिन मौसम की इस मार से सेब उत्पादों की महीनों की मेहनत और लागत पर खराब असर पड़ता दिखाई दे रहा है। इलाकें के बागों में ड़ी संख्या में तैयार सेब टूटकर गिर गए हैं और कई शाखाएं भी टूट गई हैं।
सेबों की गुणवत्ता पर मौसम का प्रहार
इस ओलावृष्टि का सबसे ज्यादा असर निचहामा, बहनीपोरा, लच्छमपोरा और बुडशुगी गांवों में देखने को मिला है। पेड़ों से जो फल गिर गए हैं, वे खराब हो चुके हैं और जो फल पेड़ों पर बचे हैं, उन पर भी ओलों की चोट के गहरे निशान पड़ गए हैं।
बारिश ने बागों में रोगों का खतरा बढ़ाया
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, निचहामा गांव के बागवान गुलाम मोहम्मद ने जमीन पर गिरे हुए सेबों को दिखाते हुए कहा कि हम साल भर इसी फसल के सहारे रहते हैं। तुड़ाई शुरू ही होने वाली थी कि एक ओलावृष्टि ने सब तबाह कर दिया। इसके अलावा, लगातार बारिश और नमी के कारण बागों में फंगस और एप्पल स्कैब बीमारी का खतरा काफी बढ़ गया है, जिससे बची हुई फसल की गुणवत्ता और उसकी बाजार कीमत को लेकर किसान बेहद चिंतित हैं।
करोड़ों रुपये के नुकसान का अनुमान
इस साल मई महीने से ही घाटी के सेब किसान बार-बार खराब मौसम की मार झेल रहे हैं। जून और अगस्त में भी अनंतनाग, त्राल, शोपियां और कुलगाम में आंधी और ओलावृष्टि से भारी नुकसान हुआ था, जहां किसानों ने 90 प्रतिशत तक फसल बर्बादी का दावा किया था।
हालांकि उद्यान विभाग की तरफ से नुकसान का कोई आधिकारिक डाटा जारी नहीं किया गया है, लेकिन एक हालिया अध्ययन के अनुसार 2025-26 के दौरान ओलावृष्टि से कई जिलों में 50 से 90 प्रतिशत तक फसल खराब हुई है और करीब 6 हजार करोड़ रुपये के आर्थिक नुकसान का अनुमान लगाया गया है। वहीं, SKUAST की मार्केट इंटेलिजेंस सेल के अनुसार 2026 के मौसम से लगभग 300 से 400 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है।
किसान मुआवजे की मांग कर रहे हैं
मौसम की वजह से फल गिरने पर किसानों को सामान्य बाजार भाव नहीं मिल पाता है। ऐसे में लगातार नुकसान झेल रहे किसान लंबे समय से फसल बीमा और उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं। सरकार के अनुसार, किसानों को राहत देने के लिए बीमा की प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है। 24 सितंबर को विधानसभा में राज्य के कृषि मंत्री जावेद अहमद डार ने बताया कि सेब को मौसम आधारित फसल बीमा योजना के दायरे में लाने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। सरकार के मुताबिक, अब इस योजना को लागू करने के लिए केवल केंद्र सरकार की संशोधित गाइडलाइन यानी दिशा-निर्देशों का इंतजार किया जा रहा है।