ज्यादा तापमान से जमाव और पौधों के विकास पर खराब असर का खतरा
कृषि वैज्ञानिक प्रोफेसर श्रीराम सिंह ने विंध्य क्षेत्र के किसानों का जिक्र किया, जो बीते हफ्ते हुई बारिश का लाभ लेने के लिए सरसों के बीज खरीदकर बुवाई की तैयारी में जुट गए हैं। कृषि वैज्ञानिक के अनुसार, इस समय तपामाम औसत से ज्यादा है। सरसों के बेहतर अंकुरण के लिए तापमान अहम होता है। ऐसा नहीं होने पर बीजों के जमाव और पौधों के विकास पर खराब असर पड़ने की पूरी संभावना है।
कितना तापमन बुवाई के लिए जरूरी?
उन्होंने साफ किया कि सरसों की बुवाई के समय अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस होना आवश्यक है। इसके साथ ही मिट्टी का उचित तापमान 28 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए। मौसम की यह अनुकूल स्थिति अक्टूबर के मध्य से लेकर नवंबर के प्रथम पखवारे के दौरान बनने की संभावना होती है, और यही अवधि सरसों की बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है।
उपयुक्त मिट्टी और बुवाई के समय सल्फर का प्रयोग है जरूरी
कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष के अनुसार, सरसों की खेती के लिए जल निकासी की बेहतर व्यवस्था वाली बलुआ दोमट अथवा दोमट भूमि सबसे उपयुक्त रहती है। साथ ही खेत की मिट्टी का पीएच (pH) मान 6 से 7.5 के बीच होना चाहिए। इस तरह की भूमि में सही प्रबंधन और देखरेख करके अधिकतम उत्पादन लिया जा सकता है।
सरसों में तेल की दर बढ़ाने का तरीका
वैज्ञानिक ने किसानों को यह सुझाव दिया है कि फसल से अधिक पैदावार और दानों में तेल की भरपूर मात्रा हासिल करने के लिए बुवाई के समय ही बेसल ड्रेसिंग के रूप में 25 से 40 किलोग्राम सल्फर का इस्तेमाल अवश्य करें।
अनुशंसित बीजों के चयन से उपज में होगी बढ़ोतरी
प्रोफेसर श्रीराम सिंह ने बताया कि यदि किसान अपने क्षेत्र के लिए स्वीकृत और अनुशंसित किस्मों की ही बुवाई करते हैं, तो उनकी उपज में 12 से 15 प्रतिशत तक की सीधी बढ़ोतरी हो सकती है।
उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे इन वैज्ञानिक बिंदुओं, उन्नत तकनीकों और उचित विधियों को अपनाकर सही समय पर बुवाई करें। प्रोफेसर सिंह के अनुसार, वर्तमान समय में दलहन-तिलहन की खेती कर किसान नकदी फसल के तौर पर बेहतर आमदनी कमा सकते हैं और इसके साथ ही देश के दलहन व तिलहन भंडार को समृद्ध बनाने में अपनी अहम भागीदारी निभा सकते हैं।