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IFFCO ने लॉन्च किया पहला स्वदेशी नैनो एनपीके : तरल और दानेदार दो विकल्प, जानें कैसै होगा खेत में इस्तेमाल...

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Thu, 19 Mar 2026 03:36 PM IST
सार

खेती में नैनो तकनीक को रफ्तार देते हुए इफको ने नैनो एनपीके (Nano NPK) लॉन्च कर दिया है। रासायनिक उर्वरकों से मिट्टी की खराब होती सेहत के बीच यह नया उत्पाद पैदावार के साथ मिट्टी की सेहत में सुधार करने का माध्यम बनेगा। वहीं, किसानों (Farmers) को पारंपरिक एनपीके से हटकर बाजार में दो तरह के नैनो एनपीके खरीदने के विकल्प मिलेंगे।
 

इफको ने नौनो एनपीके के दौ विकल्प बाजार में पेश किए।
इफको ने नौनो एनपीके के दौ विकल्प बाजार में पेश किए। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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खेती में नैनो तकनीक को रफ्तार देते हुए इफको ने नैनो एनपीके (Nano NPK) लॉन्च कर दिया है। रासायनिक उर्वरकों से मिट्टी की खराब होती सेहत के बीच यह नया उत्पाद पैदावार के साथ मिट्टी की सेहत में सुधार करने का माध्यम बनेगा। वहीं, किसानों को पारंपरिक एनपीके से हटकर बाजार में दो तरह के नैनो एनपीके खरीदने के विकल्प मिलेंगे।

IFFCO के अनुसार, नैनो एनपीके के दो फॉर्मूले बाजार में पेश किए हैं। इसमें 8-8-10 अनुपात वाला नैनो एनपीके लिक्विड और 20-10-10 अनुपात वाला दानेदार नैनो एनपीके ग्रैनुलर शामिल है। केंद्र सरकार ने भी फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर के तहत इन दोनों उत्पादों को मंजूरी दे दी है। इसी के साथ इफको बाजार में स्वदेशी नैनो एनपीके पेश करने वाली पहली कंपनी बन गई है।
  
दुनिया में अपने तरह का पहला फॉर्मूला
इफको की एनपीके खाद की तकनीक काफी खास है, क्योंकि यह पत्तों या मिट्टी पर छिडकाव कर फसल को एक जैसा संतुलित पोषण देता है। इन दो नए नए नैनो एनपीके के उपयोग का तरीका भी अलग-अलग है। तरल नैनो एनपीके को किसान फसलों के पत्तों पर सीधे छिड़काव के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। वहीं, दानेदार नैनो एनपीके को मिट्टी में डालकर जड़ो को पोषण पहुंचाने के मकसद से विकसित किया गया है।

किसानों को सीधे तौर पर क्या फायदा होगा?
  1. फसल में पोषक तत्वों का सही और पूरा उपयोग होगा। 
  2. मिट्टी की सेहत में बड़ा सुधार आएगा और फसल की पैदावार बढ़ेगी।
  3. पारंपरिक रासायनिक खादों (केमिकल फर्टिलाइजर) पर किसानों की निर्भरता काफी कम हो जाएगी।
  4. खेती में लगने वाली लागत (खर्चा) घटेगी और पैदावार की क्वालिटी बेहतर होगी।
  5. इसके इस्तेमाल से पर्यावरण को होने वाला नुकसान भी कम होगा।
विदेशी आयात पर घटेगी निर्भरता
यह नया इनोवेशन ऐसे अहम समय पर आया है, जब पूरी दुनिया में भू-राजनीतिक तनावों के कारण खाद की सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है। देश में ही बनी इस नैनो खाद के आने से विदेशों से आयात (इंपोर्ट) पर भारत की निर्भरता कम होगी और देश की विदेशी मुद्रा की भारी बचत होगी।
 
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