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Shivpuri S Breeding Centre Doubles Endangered Bhadawari Buffalo Population In Just Three Years
मावा-घी की मलिका भदावरी भैंस: विलुप्ति के कगार से हुई वापसी, 3 साल में दोगुना हुआ कुनबा, दूध में 14% तक वसा
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Umashankar Mishra
Updated Fri, 18 Sep 2026 08:40 PM IST
सार
विलुप्ति के कगार पर पहुंची भदावरी भैंस को शिवपुरी के ब्रीडिंग सेंटर ने नया जीवन दिया। तीन साल में दोगुनी हुई संख्या और क्यों खास है भदावरी भैंस का दूध; आइए जानें...
भदावरी भैंस का दूध मावा-घी वालों की पहली पसंद
- फोटो : एआई
कभी देश के गांव-देहात में भदावरी भैंसों की गूंज हर तरफ सुनाई देती थी, लेकिन धीरे-धीरे यह विशिष्ट देसी नस्ल विलुप्ति के कगार पर पहुंच गई। ऐसे नाजुक मोड़ पर शिवपुरी के भदावरी ब्रीडिंग सेंटर ने उम्मीद की एक नई किरण जगाई है।
मध्य प्रदेश पशुधन एवं कुक्कुट विकास बोर्ड के सहयोग से चल रहे इस केंद्र ने महज तीन साल के भीतर भदावरी भैंसों की संख्या को दोगुना करने में सफलता हासिल की है।
तीन साल में दोगुनी हुईं भदावरी भैंस
कहानी की शुरुआत 2023 से होती है, जब मध्य प्रदेश पशुधन एवं कुक्कुट विकास बोर्ड उत्तर प्रदेश के इटावा से 21 भदावरी पड़ियां और एक पाड़ा शिवपुरी लाया था। केंद्र की बेहतर देखरेख और सही प्रबंधन का नतीजा यह रहा कि तीन साल में ही इनकी संख्या बढ़कर करीब 40 तक पहुंच गई।
हालांकि इस पूरी कोशिश का मकसद सिर्फ भैंसों की गिनती बढ़ाना नहीं है, बल्कि शुद्ध नस्ल के आनुवंशिक गुणों को बचाकर आगे की पीढ़ियों तक पहुंचाना भी है।
भदावरी भैंस का दूध मावा-घी वालों की पहली पसंद
भदावरी भैंस को खास बनाती है इसके दूध की गुणवत्ता। इस नस्ल के दूध में वसा की मात्रा 8 से 14 प्रतिशत तक होती है, जो इसे मावा और घी बनाने वाले कारोबारियों के बीच सबसे पसंदीदा बनाती है। भदावरी भैंस अपने भूरे रंग, शरीर पर बने सफेद निशानों और गले पर मौजूद दो सफेद धारियों यानी "सफेद कंठी" के चलते आसानी से पहचानी जा सकती है।
भदावर रियासत से जुड़ा है नाम
इस नस्ल का नाम पुरानी भदावर रियासत के नाम पर पड़ा। यह मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के इटावा, आगरा और बाह इलाकों के साथ-साथ मध्य प्रदेश के भिंड और मुरैना जिलों में पाई जाती है।
क्रॉस ब्रीडिंग ने घटा दिया कुनबा
एक वक्त था जब साल 1977 में देशभर में भदावरी भैंसों की संख्या लगभग 1.30 लाख हुआ करती थी। लेकिन मुर्रा भैंस के साथ बेतरतीब क्रॉस ब्रीडिंग होने और शुद्ध भदावरी पाड़ों की कमी के चलते इनकी आबादी लगातार घटती चली गई।
आज हालात यह हैं कि देश में शुद्ध भदावरी भैंसों की संख्या सिमटकर महज कुछ हजार तक रह गई है, जिसने इस नस्ल पर विलुप्ति का खतरा मंडरा दिया। शिवपुरी केंद्र की यह पहल इसी संकट के बीच एक उम्मीद की तरह सामने आई है।
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