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मुर्गी पालन से बढ़ाएं कमाई : दाना-पानी से सफाई... इन बातों का रखें ध्यान, घटेगा बीमारी का खतरा

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sun, 20 Sep 2026 06:18 PM IST
सार

  • मुर्गियों की उम्र के अनुसार संतुलित और पौष्टिक दाना देना जरूरी है।
  • हर समय साफ और ताजा पानी उपलब्ध रखें, खासकर गर्मी में पानी की कमी न होने दें।
  • मुर्गी घर साफ, सूखा और हवादार रखें; गीली बिछावन को समय पर बदलें।
  • बीमार या सुस्त मुर्गी को तुरंत अलग करें और जरूरत पड़ने पर पशु चिकित्सक से सलाह लें।

मुर्गी पालन
मुर्गी पालन - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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खेती के साथ मुर्गी पालन शुरू करने की सोच रहे हैं तो सिर्फ मुर्गियां खरीदना ही काफी नहीं है। अच्छी कमाई के लिए मुर्गियों को स्वस्थ रखना और उनका सही प्रबंधन करना सबसे जरूरी है। संतुलित दाना, साफ पानी, साफ-सूखा मुर्गी घर, मौसम के अनुसार देखभाल और समय पर बीमारी की पहचान जैसी छोटी-छोटी बातें मुर्गियों के स्वास्थ्य और उत्पादन पर सीधा असर डालती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, मुर्गी पालन में सही प्रबंधन से मुर्गियों को स्वस्थ रखने और उत्पादन बेहतर करने में मदद मिल सकती है।

उम्र के हिसाब से दें दाना
मुर्गियों की आहार जरूरत उनकी उम्र के अनुसार बदलती है। इसलिए चूजों और बड़ी मुर्गियों को एक जैसा दाना नहीं देना चाहिए। अंडा देने वाली मुर्गियों के आहार में कैल्शियम और दूसरे जरूरी पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में होने चाहिए। दाने को हमेशा सूखी और साफ जगह पर रखें। नमी लगने पर दाना खराब हो सकता है, जिसका असर मुर्गियों की सेहत पर पड़ सकता है।

पानी की कमी न होने दें
मुर्गियों को हर समय साफ और ताजा पानी मिलना चाहिए। गर्मी के मौसम में पानी की जरूरत बढ़ जाती है, इसलिए पानी के बर्तन खाली न होने दें। पानी रखने वाले बर्तनों को भी रोजाना या नियमित रूप से साफ करें। गंदे बर्तन और दूषित पानी से बीमारी फैलने का खतरा बढ़ सकता है।

मुर्गी घर को रखें साफ और सूखा
मुर्गियों के रहने की जगह साफ और सूखी होनी चाहिए। फर्श पर पानी या नमी जमा न होने दें। अगर बिछावन गीली हो जाए तो उसे बदल दें। मुर्गी घर में हवा आने-जाने की पर्याप्त व्यवस्था रखें। हालांकि, मुर्गियों पर ठंडी हवा का सीधा झोंका नहीं पड़ना चाहिए।

मौसम के हिसाब से करें देखभाल
गर्मी में मुर्गी घर को हवादार रखें और पर्याप्त पानी की व्यवस्था करें। बरसात में आसपास पानी जमा न होने दें। मुर्गी घर को नमी से बचाएं और गीली बिछावन तुरंत बदलें। सर्दी में खासकर छोटे चूजों को ठंड से बचाने की व्यवस्था करें और ठंडी हवा के सीधे संपर्क से बचाएं।

बीमार मुर्गी को तुरंत अलग करें
अगर कोई मुर्गी सुस्त दिखाई दे, दाना-पानी कम करे या उसके व्यवहार में अचानक बदलाव आए तो उस पर नजर रखें। जरूरत पड़ने पर उसे बाकी मुर्गियों से अलग कर दें। बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर खुद से दवा देने के बजाय पशु चिकित्सक से सलाह लेना बेहतर है। मुर्गियों का टीकाकरण भी विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार समय पर कराएं।

ज्यादा मुर्गियां एक जगह न रखें
मुर्गी घर में जरूरत से ज्यादा मुर्गियां रखने से भीड़ बढ़ती है। इससे दाना-पानी और हवा की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और बीमारी फैलने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए मुर्गियों की संख्या के हिसाब से पर्याप्त जगह रखें। इससे उन्हें आराम से रहने और चलने-फिरने की जगह मिलेगी।

खर्च और बिक्री का हिसाब रखें
मुर्गी पालन शुरू करने से पहले चूजों, दाने, दवा, बिजली और दूसरे खर्चों का अनुमान लगाएं। साथ ही अंडे या मुर्गियों की बिक्री के लिए बाजार की जानकारी भी पहले से रखें। रोजाना कितना दाना लगा, कितना खर्च हुआ और कितने अंडे या मुर्गियां बिकीं, इसका रिकॉर्ड बनाएं। इससे किसान को वास्तविक लागत और आमदनी का हिसाब समझने में आसानी होगी।

बीमारी से बचाव के लिए क्या करें?
मुर्गियों को स्वस्थ रखने के लिए साफ पानी और साफ वातावरण बनाए रखना जरूरी है। मुर्गी घर में गंदगी और नमी जमा न होने दें। नई या बीमार मुर्गियों को सीधे पूरे झुंड में न मिलाएं। बीमारी के लक्षण दिखने पर समय पर पशु चिकित्सक की सलाह लें।

मुर्गी पालन में कमाई किन बातों पर निर्भर करती है?
मुर्गी पालन से होने वाली कमाई मुर्गियों की संख्या, नस्ल, दाने की लागत, मृत्यु दर, अंडे या मांस के उत्पादन और बाजार भाव पर निर्भर करती है। इसलिए केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। कम लागत, स्वस्थ मुर्गियां और सही बाजार मुर्गी पालन को बेहतर तरीके से चलाने में मदद कर सकते हैं।

किसानों के लिए जरूरी बात: मुर्गी पालन शुरू करने से पहले अपने क्षेत्र के पशुपालन विभाग या पशु चिकित्सक से नस्ल, टीकाकरण, आहार और स्थानीय बीमारी की स्थिति की जानकारी लेना फायदेमंद रहेगा।
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