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Goat Farming: 11 बकरियों से शुरू किया कारोबार, सरकारी मदद से ऐसे बढ़ी किसान की कमाई

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sat, 12 Sep 2026 04:40 PM IST
सार

  • जामनगर के तामाचल गांव के किसान हाथाभाई छावड़िया ने सरकारी मदद से बकरी पालन शुरू किया।
  • उन्होंने एक बकरे और 10 बकरियों समेत कुल 11 बकरियां खरीदीं।
  • 11 बकरियों की खरीद पर 60 हजार रुपये तक का खर्च योजना में पात्र है।
  • बाड़, शेड और चारे के लिए अतिरिक्त 60 हजार रुपये तक का प्रावधान है।

बकरी पालन
बकरी पालन - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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गुजरात के जामनगर में सरकारी पशुपालन योजना किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी का जरिया बन रही है। तामाचल गांव के पशुपालक हाथाभाई छावड़िया ने रोजगार और आर्थिक परेशानी के बीच बकरी पालन शुरू किया। पशुपालन विभाग की योजना के तहत मिली मदद से उन्होंने 11 बकरियां खरीदीं, जिनमें एक बकरा और 10 बकरियां शामिल हैं। हाथाभाई ने बताया कि सरकार से मिले ऋण की मदद से उन्होंने 11 बकरियां खरीदीं। बकरी पालन से उन्हें फायदा हो रहा है और वे सरकारी मदद से खुश हैं।

11 बकरियों के लिए 60 हजार रुपये तक की मदद
जामनगर के पशुपालन विभाग के अनुसार, योजना के तहत 11 बकरियों, जिसमें एक बकरा भी शामिल है, की खरीद पर 60 हजार रुपये तक का खर्च पात्र माना जाता है। इसके अलावा बकरियों के लिए बाड़ लगाने, शेड बनाने और चारे पर भी 60 हजार रुपये तक खर्च किया जा सकता है।

इस तरह योजना के तहत कुल 1.20 लाख रुपये तक का पात्र खर्च माना जाता है। लाभार्थी को कुल खर्च या योजना के तहत तय पात्र राशि, जो भी कम हो, उसका 50 फीसदी तक अनुदान दिया जाता है।जामनगर पशुपालन विभाग के चिकित्सा अधिकारी डॉ. जीडी गुज्जर ने बताया कि योजना का उद्देश्य किसानों और ग्रामीण परिवारों को पशुपालन से जोड़कर उनकी आय के अतिरिक्त साधन तैयार करना है।

बकरियों के इलाज की भी सुविधा
सरकारी मदद सिर्फ बकरी खरीदने तक सीमित नहीं है। पशुपालकों को पशु चिकित्सा सेवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे बकरियों के स्वास्थ्य और उत्पादन क्षमता को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है। जामनगर के एक अन्य पशुपालक साब्बर हुसैन ने बताया कि पशु मालिकों के लिए यहां पशु चिकित्सा सुविधाएं अच्छी हैं। बीमार होने पर पशुओं को अस्पताल लाकर इलाज कराया जा सकता है।

गांवों में रोजगार का नया विकल्प
इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को बकरी पालन और अन्य पशुपालन गतिविधियों से जोड़ना है। आर्थिक सहायता के साथ बाड़, शेड और चारे की व्यवस्था में मदद तथा पशु चिकित्सा सेवाएं मिलने से छोटे किसान और ग्रामीण परिवार पशुपालन को आय के अतिरिक्त स्रोत के रूप में अपना सकते हैं।
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