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World Environment Day: उर्वरकों के अधिक उपयोग से पर्यावरण में घुल रहा जहर, नाइट्रोजन प्रदूषण नई चुनौती

उमाशंकर मिश्र, नई दिल्ली Published by: Umashankar Mishra Updated Wed, 05 Jun 2024 01:17 PM IST
सार

नाइट्रोजन उर्वरकों का अधिक उपयोग और फसलों द्वारा नाइट्रोजन को बेहद कम ग्रहण किए जाने के कारण पर्यावरण में इसका रिसाव बढ़ रहा है। यही कारण है कि अब नाइट्रोजन प्रदूषण दुनियाभर में एक प्रमुख मुद्दा बनकर उभर रहा है। भारत को नाइट्रोजन प्रदूषण के एक प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में जाना जाता है।

नाइट्रोजन प्रदूषण दुनियाभर में एक प्रमुख मुद्दा बनकर उभर रहा है।
नाइट्रोजन प्रदूषण दुनियाभर में एक प्रमुख मुद्दा बनकर उभर रहा है। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार
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नाइट्रोजन पृथ्वी के वायुमंडल में प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला तत्व है। यह आकाश को नीला बनाता है, हमारे शरीर में प्रोटीन का आधार बनाने के लिए जाना जाता है और मिट्टी को उपजाऊ बनाने में भी मदद करता है। अब नाइट्रोजन प्रदूषण दुनियाभर में एक प्रमुख मुद्दा बनकर उभर रहा है।

नाइट्रोजन अपने आप में एक हानि-रहित तत्व है। लेकिन, इसके प्रतिक्रियाशील रूप जैसे नाइट्रेट, अमोनिया और नाइट्रस ऑक्साइड हानिकारक होते हैं। कार्बन डाईऑक्साइड की तरह नाइट्रस ऑक्साइड भी ग्रीनहाउस गैस है। 

ये यौगिक प्रतिक्रिया करके महीन कण (पीएम 2.5) बनाते हैं, जो हृदय और श्वसन संबंधी बीमारियों का कारण बनते हैं। जल निकायों में भी इन तत्वों के मिश्रण से समस्या बढ़ जाती है, जिससे पीने के पानी की गुणवत्ता, मीठे पानी के पारिस्थितिकी तंत्र और तटीय क्षेत्रों के लिए खतरा पैदा हो जाता है।

नाइट्रोजन प्रदूषण से शैवाल को बढ़ने में मदद मिलती है, जिससे पानी में ऑक्सीजन का स्तर कम होने लगता है और मछलियों की मौत होने लगती है। इससे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को बढ़ावा मिलता है। इन्हीं कारणों से नाइट्रोजन प्रदूषण को पर्यावरण के लिए एक बड़ा खतरा बताया जाता है। 
  
नाइट्रोजन उर्वरकों पर बढ़ती निर्भरता और फसलों द्वारा नाइट्रोजन को कम ग्रहण किए जाने से पर्यावरण में इसका रिसाव लगातार बढ़ रहा है और मिट्टी एवं भूजल जैसे संसाधन प्रदूषित हो रहे हैं।

नाइट्रोजन प्रदूषण से निपटने के लिए दुनियाभर के वैज्ञानिकों और संस्थानों का संयुक्त राष्ट्र समर्थित वैश्विक गठबंधन 'इंटरनेशनल नाइट्रोजन मैनेजमेंट सिस्टम' कार्य कर रहा है। इसके निदेशक रहे पर्यावरण विज्ञानी मार्क सटन कहते हैं, भारत में, वायु प्रदूषण मुख्य रूप से कृषि क्षेत्र से उत्सर्जित अमोनिया और जीवाश्म ईंधन दहन से निकले नाइट्रस ऑक्साइड से संबंधित है।

समस्या की व्यापकता को देखते हुए नाइट्रोजन पर पहले एशियाई अध्ययन-'भारतीय नाइट्रोजन मूल्यांकन' में प्रभावी तरीके से नाइट्रोजन प्रबंधन को जरूरी बताया गया है।

'भारतीय नाइट्रोजन मूल्यांकन' रिपोर्ट प्रतिक्रियाशील नाइट्रोजन के महत्वपूर्ण स्रोतों और नाइट्रोजन चक्र में उनके योगदान को रेखांकित करती है। कृत्रिम उर्वरकों के उपयोग, अपशिष्ट जल या जीवाश्म ईंधन के दहन से उत्सर्जित प्रतिक्रियाशील नाइट्रोजन को पर्यावरण के लिए एक बड़ा खतरा माना जाता है। 

प्रतिक्रियाशील नाइट्रोजन भूमि, पानी और वायु जैसे पर्यावरण के प्रमुख घटकों को प्रदूषित करने के लिए जानी जाती है।

यह जलवायु परिवर्तन को भी बढ़ाने के लिए जिम्मेदार बतायी जाती है और ओजोन परत को खराब करती है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की 2018-2019 फ्रंटियर्स रिपोर्ट में नाइट्रोजन प्रदूषण को मानवता के सामने सबसे महत्वपूर्ण प्रदूषण मुद्दों में से एक बताया गया है।

यूएनईपी ने ऐसे चार कारण बताए हैं कि मानवता के बचाव के लिए नाइट्रोजन प्रदूषण को सीमित करने की आवश्यकता क्यों है? 
कृषि और पशुपालन नाइट्रोजन प्रदूषण के लिए जिम्मेदार कारकों में शामिल।
कृषि और पशुपालन नाइट्रोजन प्रदूषण के लिए जिम्मेदार कारकों में शामिल। - फोटो : गांव जंक्शन
मिट्टी और भूजल की सेहत को नुकसान 
जब पौधों में नाइट्रोजन यौगिकों की उपलब्धता खपत से अधिक हो जाती है, तो यह अतिरिक्त नाइट्रोजन पर्यावरण में पहुंच जाती है, जो अक्सर जलीय पारिस्थितिक तंत्र में फिल्टर हो जाती है। एक बार वहां पहुंचने के बाद यह जहरीले शैवाल की तेज वृद्धि का कारण बनती है, जिससे पानी में ऑक्सीजन कम होने लगती है। यह जलस्रोतों में जलीय जीवन को प्रभावित करता है, जिससे मृत तटीय क्षेत्रों का दायरा बढ़ता है।

आवास स्थलों के क्षरण और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन के बाद नाइट्रोजन प्रदूषण को मानव निर्मित जैव विविधता में गिरावट के लिए जिम्मेदार  प्रमुख वैश्विक घटक के रूप में जाना जाता है। जैव विविधता की सुरक्षा के लिए सभी स्रोतों से प्रदूषण को कम करने का वैश्विक लक्ष्य निर्धारित किया गया है, ताकि वर्ष 2030 तक इस तरह के प्रदूषकों को नियंत्रित करके जीवन और पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।

जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार 
जब नाइट्रोजन अपने सक्रिय रूप में, जैसे कि उर्वरक की शक्ल में, मिट्टी के संपर्क में आती है, तो सूक्ष्मजीव प्रतिक्रियाएं होती हैं, जो नाइट्रस ऑक्साइड गैस छोड़ती हैं। यह गैस वातावरण को गर्म करने में कार्बन डाई ऑक्साइड की तुलना में 300 गुना अधिक शक्तिशाली मानी जाती है। यह वायुमंडल में भी 100 वर्षों से अधिक समय तक सक्रिय रहती है। झीलों और जलमार्गों में शैवालों का पनपना, जो उर्वरक के बहाव के कारण होता है, ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन का कारण बनता है।

एक अन्य मुद्दा कृषि अमोनिया उत्सर्जन है। यह नाइट्रोजन का एक गैसीय रूप है, जो आवास, भंडारण और पशु खाद के प्रसार और कृत्रिम उर्वरक के प्रसार से वातावरण में उत्सर्जित होता है। हालांकि, अमोनिया ग्रीनहाउस गैस नहीं है, लेकिन जब इसे हवा में छोड़ा जाता है, तो यह नाइट्रस ऑक्साइड, जो एक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस, के उत्सर्जन के लिए आधार के रूप में कार्य करती है।

मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा  
नाइट्रेट के उच्च स्तर से युक्त जल, जानवरों के अपशिष्ट, पौधों के अपघटन और उर्वरक के बहाव से उत्पन्न नाइट्रोजन का रूप - शिशुओं में मेथेमोग्लोबिनेमिया का खतरा बढ़ाता है, जिसे आमतौर पर ‘ब्लू बेबी सिंड्रोम’ कहते हैं, जो घातक हो सकता है।

पीने के पानी में नाइट्रेट का उच्च स्तर वयस्कों में कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है। इन हानिकारक घटकों से जल एवं वायु प्रदूषित होते हैं, जो स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ाते हैं। इससे जलवायु परिवर्तन को भी बढ़ावा मिलता है, जिसका सीधा संबंध जीवों के स्वास्थ्य से जुड़ा है। 

अर्थव्यवस्था पर प्रभाव 
खाद्य उत्पादन में नाइट्रोजन घटकों के कुशल उपयोग से पर्यावरण में अतिरिक्त नाइट्रोजन को कम कर सकते हैं। यूएनईपी की फ्रंटियर्स रिपोर्ट में मानव स्वास्थ्य और पारिस्थितिक तंत्र पर नाइट्रोजन प्रदूषण के आर्थिक प्रभाव आकलन पेश किया गया है। इसमें कहा गया है कि नाइट्रोजन के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था को हर साल बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है।

शायद यही कारण है कि संयुक्त राष्ट्र के अधिकांश सतत विकास लक्ष्यों और बेहतर भविष्य का खाका नाइट्रोजन के टिकाऊ प्रबंधन से जुड़ा रहा है।