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Haryana Amla Sold Cheaply Farmer Started Processing Established Business Worth Rs 1 35 Crore Watch Video
Haryana: आंवला सस्ता बिका तो किसान ने शुरू की प्रोसेसिंग, खड़ा किया 1.35 करोड़ का कारोबार- देखें Video
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Sun, 13 Sep 2026 05:30 PM IST
सार
सोनीपत के महमूदपुर गांव के किसान श्याम सिंह ने मर्चेंट नेवी की नौकरी छोड़ खेती को चुना है। उनका आंवला 2-4 रुपये किलो बिका तो उन्होंने प्रोसेसिंग शुरू की और करोड़ों का कारोबार खड़ा कर दिया।
सोनीपत के महमूदपुर गांव के किसान श्याम सिंह ने मर्चेंट नेवी की नौकरी छोड़कर खेती को अपना करियर बनाया। शुरुआत में जब उनके बाग के आंवले का भाव सिर्फ 2 से 4 रुपये किलो मिला, तो उन्होंने फसल बेचने के बजाय उससे तैयार उत्पाद बनाने का फैसला किया। साल 2013 में उन्होंने आंवले से मुरब्बा, जूस, लड्डू और दूसरे उत्पाद तैयार करने शुरू किए। धीरे-धीरे इन उत्पादों की मांग बढ़ी और उन्होंने खेती को प्रोसेसिंग से जोड़ दिया। आज उनका कारोबार करीब 1.35 करोड़ रुपये के टर्नओवर तक पहुंच गया है।
दो एकड़ से शुरू हुआ सफर
श्याम सिंह के पास शुरुआत में करीब दो एकड़ में आंवले का बाग था। कम कीमत मिलने के बाद उन्होंने आंवले की प्रोसेसिंग शुरू की। तैयार उत्पादों की मांग बढ़ी तो उन्होंने दो एकड़ और आंवले का बाग लगाया। अब करीब चार एकड़ में आंवले की खेती कर रहे हैं। उनका कहना है कि खेती से बेहतर कमाई के लिए सिर्फ फसल उगाना ही पर्याप्त नहीं है। उत्पाद को बाजार की जरूरत के हिसाब से तैयार करने और उसकी कीमत बढ़ाने पर भी ध्यान देना जरूरी है।
47 तरह के उत्पाद तैयार
श्याम सिंह अब सिर्फ आंवले तक सीमित नहीं हैं। वह अंजीर, मोरिंगा, सेब, करौंदा और नींबू से भी कई तरह के प्रसंस्कृत उत्पाद तैयार कर रहे हैं। उनके बगीचे में करीब 230 मोरिंगा और 33 सेब के पेड़ हैं। कुल मिलाकर वह करीब 47 तरह के प्रसंस्कृत उत्पाद तैयार कर रहे हैं। अचार और दूसरे उत्पादों में इस्तेमाल होने वाली हल्दी, सरसों, राई, सौंफ, धनिया और मेथी भी वह अपने खेत में ही उगाते हैं। इससे कच्चे माल के लिए बाहर पर निर्भरता कम होती है।
आंवले के साथ हल्दी की सहफसली खेती
श्याम सिंह आंवले के बाग में हल्दी की सहफसली खेती भी करते हैं। इसके अलावा करीब एक एकड़ में अलग से हल्दी उगा रहे हैं। उनके मुताबिक, आंवले के बाग से प्रति एकड़ करीब 150 से 180 क्विंटल तक उत्पादन मिलता है। वहीं हल्दी से करीब 60 से 65 क्विंटल कच्ची हल्दी प्राप्त होती है।
2013 में छोड़ा रसायन का इस्तेमाल
उन्होंने वर्ष 2013 में रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक खेती अपनाई। करीब छह एकड़ में खेती के साथ वह अपना वर्मी कंपोस्ट फार्म भी चला रहे हैं। इससे खेतों के लिए जैविक खाद तैयार करने में मदद मिलती है।
दिल्ली समेत कई शहरों तक पहुंच रहे उत्पाद
श्याम सिंह के तैयार किए गए उत्पाद अब दिल्ली, सोनीपत, रोहतक, बहादुरगढ़ और कैथल तक पहुंच रहे हैं। उनका अनुभव बताता है कि अगर किसान फसल को सीधे बाजार में बेचने के बजाय उसका प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन करे, तो कम भाव की समस्या से काफी हद तक निपटा जा सकता है। श्याम सिंह के मुताबिक, उनके कारोबार का मौजूदा टर्नओवर करीब 1.35 करोड़ रुपये है। आंवले की कम कीमत से शुरू हुआ यह सफर अब खेती, प्रोसेसिंग और बाजार को जोड़ने वाले कारोबार में बदल चुका है।
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