कभी जिन गांवों की पहचान सीमित संसाधनों, दूर-दराज के स्कूलों और आर्थिक चुनौतियों से होती थी, आज वहीं से इंजीनियर बनने का सपना साकार हो रहा है। ओडिशा के आदिवासी बहुल मयूरभंज जिले के युवाओं ने यह साबित कर दिया है कि यदि प्रतिभा को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो मंजिल कितनी भी दूर क्यों न हो, हासिल की जा सकती है।
जिला प्रशासन की 'मेधाभी मयूरभंज' पहल ने इस बदलाव की मजबूत नींव रखी है। इसी पहल के तहत शुरू किए गए 'अचीवर्स' कार्यक्रम ने इस वर्ष लगभग 40 छात्रों को इंजीनियरिंग कॉलेजों तक पहुंचाया, जबकि दो छात्रों ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) में प्रवेश पाकर पूरे जिले का गौरव बढ़ाया।
कोचिंग, मार्गदर्शन और विश्वास ने बदली तस्वीर
इस कार्यक्रम के तहत एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS) और एसएसडी विभाग के स्कूलों के मेधावी छात्रों का चयन प्रवेश परीक्षा के माध्यम से किया गया। चयनित छात्रों को निःशुल्क आवास, भोजन, कोचिंग और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की सुविधा उपलब्ध कराई गई। इस सुनियोजित प्रयास का परिणाम यह रहा कि पिछले वर्ष जहां केवल 16-17 छात्रों का चयन हुआ था, वहीं इस बार यह संख्या बढ़कर करीब 40 तक पहुंच गई।
एक छोटे किसान का बेटा बना पूरे गांव की प्रेरणा
इस सफलता की सबसे प्रेरक कहानी उस छात्र की है, जिसने एनआईटी जमशेदपुर में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में प्रवेश पाया। वह एक छोटे किसान के परिवार से आता है। सीमित संसाधनों के बावजूद उसकी मेहनत और प्रशासन के सहयोग ने उसे देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में जगह दिला दी। यह उपलब्धि केवल एक छात्र की नहीं, बल्कि उन हजारों ग्रामीण और आदिवासी परिवारों के सपनों की जीत है, जो शिक्षा के सहारे अपनी अगली पीढ़ी का भविष्य बदलना चाहते हैं।
अब लक्ष्य इंजीनियर ही नहीं, डॉक्टर भी
जिला प्रशासन अब मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। उद्देश्य यह है कि आने वाले वर्षों में मयूरभंज के आदिवासी छात्र सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराएं। साथ ही PM-JANMAN और आदि कर्मयोगी अभियान जैसी योजनाओं के माध्यम से आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा का आधार और मजबूत किया जा रहा है।
शिक्षा से बदल रही है समाज की दिशा
मयूरभंज की यह कहानी बताती है कि शिक्षा केवल नौकरी का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव की सबसे बड़ी ताकत है। जब गांवों के बच्चे राष्ट्रीय संस्थानों तक पहुंचते हैं, तो वे केवल अपना भविष्य नहीं बदलते, बल्कि पूरे समाज में आत्मविश्वास, प्रेरणा और नई सोच का संचार करते हैं।
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