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Onion Prices Nearly Double In A Year As Government S 35 Kg Buffer Sale Struggles To Reach The Market
सरकार बेच रही ₹35 प्रति किलो प्याज: बाजार में फिर भी चुकाने पड़ रहे ₹60-70, किसानों को राहत, उपभोक्ता परेशान
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Umashankar Mishra
Updated Fri, 18 Sep 2026 02:06 PM IST
सार
रसोई में जिस प्याज के बिना सब्जी का स्वाद अधूरा माना जाता है, वही प्याज इन दिनों घर के बजट का सबसे बड़ा सिरदर्द बन गया है। पिछले कुछ हफ्तों से बाजार जाने वाला हर शख्स एक ही सवाल लेकर लौटता है कि आखिर प्याज इतनी महंगी क्यों हो गई? और क्या इसका कोई हल नजर आ रहा है? जानिए, विस्तार से...
15 सितंबर 2026 को प्याज का औसत मंडी भाव 3,736.61 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया, जबकि एक साल पहले यही भाव सिर्फ 946.60 रुपये प्रति क्विंटल था।
- फोटो : AI Image
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 16 सितंबर 2026 को देश में प्याज का औसत खुदरा भाव करीब 54 रुपये प्रति किलो रहा, जो एक साल पहले की तुलना में लगभग 94% ज्यादा है। जो प्याज पिछले साल करीब 28 रुपये किलो के आसपास मिल रही थी, वह अब लगभग दोगुने दाम पर बिक रही है। एक महीने पहले के मुकाबले यह भाव करीब 48% ऊपर है।
थोक मंडियों की तस्वीर भी कुछ अलग नहीं है। 15 सितंबर 2026 को प्याज का औसत मंडी भाव 3,736.61 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया, जबकि एक साल पहले यही भाव सिर्फ 946.60 रुपये प्रति क्विंटल था - यानी करीब 295% की भारी बढ़ोतरी देखी गई।
हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि यह भाव सितंबर 2024 के 3,924.18 रुपये प्रति क्विंटल से अब भी थोड़ा कम है, यानी पिछले साल (2025) का भाव असामान्य रूप से नीचे था, और इस साल बाजार उसी पुराने स्तर की ओर लौट रहा है।
अगस्त में तेज उछाल, अब रफ्तार धीमी
अगस्त के मध्य से थोक भाव में तेज उछाल देखा गया। 15 अगस्त को जहां मंडी भाव 2,422.80 रुपये प्रति क्विंटल था, वहीं 25 अगस्त तक यह उछलकर 3,656.71 रुपये तक पहुंच गया।
सितंबर की शुरुआत में यह थोड़ा नरम होकर 3,539.67 रुपये पर आया, फिर 8 सितंबर को 3,702.51 और 15 सितंबर को 3,736.61 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। यानी अगस्त के मुकाबले भाव करीब 54% ऊपर तो हैं, लेकिन बढ़त की रफ्तार अब पहले जितनी तेज नहीं रही।
राहत की एक और खबर यह है कि उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे के मुताबिक, पिछले नौ दिनों में मंडियों में प्याज के थोक भाव में करीब 9% की गिरावट दर्ज की गई है, जिसका असर आने वाले दिनों में खुदरा कीमतों पर भी दिखने की उम्मीद है।
महंगाई दर के आंकड़े भी चौंकाने वाले
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में प्याज की महंगाई दर बढ़कर 48.27% पर पहुंच गई, जो जुलाई में 22.54% थी - यानी एक ही महीने में महंगाई दर दोगुने से भी ज्यादा बढ़ गई।
सरकार प्याज दे रही ₹35/किलो, पर राहत अधूरी
कीमतों पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार ने पिछले महीने से बफर स्टॉक से 35 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज बेचना शुरू किया है।
इसके लिए नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन (NCCF), नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन (NAFED) और केंद्रीय भंडार के खुदरा केंद्रों के साथ-साथ मोबाइल वैन का सहारा लिया जा रहा है।
रेल मार्ग से इस सप्लाई को 'कांदा एक्सप्रेस' नाम दिया गया है, जो सड़क परिवहन के साथ मिलकर उत्पादक इलाकों से बड़े शहरों तक प्याज पहुंचा रही है।
सरकार का दावा है कि यह सस्ता प्याज अब देश के करीब 48 शहरों तक पहुंच रहा है, जिसकी पहुंच 1 सितंबर तक 19 शहरों तक सीमित थी। मगर, चुनौती यह है कि उत्पादक राज्यों से हर बाजार और हर उपभोक्ता तक सरकारी प्याज की पहुंच अब भी सीमित है।
यही वजह है कि जहां सरकारी दर 35 रुपये किलो है, वहीं खुले बाजार में कई बाजारों में उपभोक्ताओं को 60 से 70 रुपये किलो तक चुकाने पड़ रहे हैं।
1.21 लाख टन का बफर स्टॉक, फिर भी कमी नहीं
सरकार के मुताबिक, देश में प्याज की कोई कमी नहीं है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, वर्ष 2025-26 में प्याज का उत्पादन 307.37 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के 307.67 लाख टन के लगभग बराबर है - यानी उत्पादन में गिरावट बेहद मामूली रही।
सरकार ने 2026-27 सीजन के लिए 2 लाख टन रबी प्याज बफर स्टॉक के तौर पर खरीदने का लक्ष्य रखा था, जिसमें से अब तक करीब 1.21 लाख टन की खरीद हो चुकी है। किसानों को बेहतर दाम देने के लिए खरीद मूल्य भी 18.75 रुपये से बढ़ाकर 21.25 रुपये प्रति किलो किया गया है।
आखिर कीमतें क्यों बढ़ीं?
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगस्त-सितंबर का यह दौर आमतौर पर प्याज के लिए मुश्किल भरा होता है, क्योंकि पुराना रबी स्टॉक धीरे-धीरे खत्म हो जाता है, जबकि नई खरीफ फसल अभी पूरी तरह बाजार में नहीं आई होती है। इस बार यह चुनौती और गहरी हो गई, क्योंकि खरीफ प्याज की बुआई में भी देरी हुई।
सरकार के मुताबिक, महाराष्ट्र के नासिक में बुआई सामान्य से करीब 15 दिन पीछे चल रही थी, वहीं कर्नाटक के चित्रदुर्गा-चल्लकेरे इलाके में बुआई सामान्य स्तर की सिर्फ 60% ही आंकी गई। मौसम की अनिश्चितता और कुछ कारोबारियों की सट्टा खरीदारी ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया है।
आगे क्या उम्मीद?
थोक भाव में हालिया नरमी को देखते हुए सरकार को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में खुदरा कीमतों पर भी इसका सकारात्मक असर दिखेगा। लेकिन, असली राहत तभी महसूस होगी, जब सरकारी दर वाला सस्ता प्याज मुट्ठी भर शहरों की बजाय ज्यादा से ज्यादा बाजारों में आसानी से उपलब्ध हो पाएगा।
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