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मरगोजा खरपतवार बना सरसों का दुश्मन : उपज घटी; किसानों को अब हर्बिसाइड-प्रतिरोधी किस्मों से उम्मीद, जानें...

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Mon, 12 Jan 2026 02:49 PM IST
सार

देश में सरसों लाखों किसानों के लिए आय का माध्यम है। वहीं, खाद्य तेल उत्पादन में भी सरसों अहम भूमिका रखती है। इतनी अहमियत रखने वाली फसल आज मरगोजा नाम के खरपतवार से प्रभावित हो रही है। यह परजीवी खरपतवार तेजी से खेतों में फैलकर सरसों की उपज में भारी गिरावट का जिम्मेदार है।

मरगोजा खरपतवार से पार पाने के लिए हर्बिसाइड-प्रतिरोधी सरसों से उम्मीद।
मरगोजा खरपतवार से पार पाने के लिए हर्बिसाइड-प्रतिरोधी सरसों से उम्मीद। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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देश में सरसों लाखों किसानों के लिए आय का माध्यम है। वहीं, खाद्य तेल उत्पादन में भी सरसों अहम भूमिका रखती है। इतनी अहमियत रखने वाली फसल आज मरगोजा नाम के खरपतवार से प्रभावित हो रही है। यह परजीवी खरपतवार तेजी से खेतों में फैल रहा है, जिससे सरसों की उपज में भारी गिरावट आ रही है। यह खरपतवार पौधे की जड़ों से चिपककर उसका पोषण और पानी चूस लेती है, जिससे पौधा सूखने लगता है और दाना कम बनता है।

आधी रह गई उपज, सरसों से दूर हुए किसान
हरियाणा के सिरसा जिले के गिगोरानी गांव के किसान कोकचंद साहू  कहते हैं कि तीन साल पहले तक हमारे खेतों में मरगोजा नहीं था और मेरी पैदावार औसतन 9 क्विंटल प्रति एकड़ होती थी। लेकिन 2024-25 सीजन में यह घटकर सिर्फ 6 क्विंटल रह गई। हालात इतने खराब हो गए हैं कि साहू ने इस साल अपनी 32 एकड़ जमीन में से सिर्फ 6 एकड़ में ही सरसों बोई है, जबकि पहले वे 16 एकड़ तक में सरसों उगाते थे। उनकी तरह कई किसानों ने सरसों की जगह गेहूं और चना जैसी फसलों का रुख कर लिया है।

जानकारों का कहना है कि मरगोजा जमीन के नीचे ही सरसों की जड़ों पर हमला कर देता है। जब तक इसके बैंगनी रंग के फूल जमीन के ऊपर दिखाई देते हैं, तब तक फसल का ज्यादातर नुकसान हो चुका होता है। इसका एक ही पौधा हजारों बीज पैदा करता है जो मिट्टी में 20 साल तक जिंदा रह सकते हैं, जिससे यह बहुत तेजी से फैलता है।

खरपतवारनाशी समाधान मौजूद, लेकिन...
इस समस्या से निपटने के लिए ग्लाइफोसेट जैसे खरपतवारनाशकों का छिड़काव एक विकल्प है। लेकिन एक बड़ी समस्या यह है कि ये रसायन खरपतवार और फसल में भेद नहीं करते। इन्हें सरसों के खेत में डालने पर यह खरपतवार के साथ-साथ सरसों की फसल को भी खत्म कर देते हैं।

हर्बिसाइड-प्रतिरोधी सरसों से उम्मीद
इस चुनौती के बीच, एक नई तकनीक उम्मीद की किरण बनकर उभरी है। बाजार में अब सरसों के ऐसे हाइब्रिड बीज आ गए हैं जिन पर कुछ खास खरपतवारनाशकों का असर नहीं होता। किसान कोकचंद साहू ने इस साल अपने दो एकड़ खेत में पायनियर-45S42CL नाम का ऐसा ही एक हाइब्रिड बीज बोया है। इसके साथ 'किफिक्स' नामक एक खरपतवारनाशी का इस्तेमाल किया जाता है, जो सिर्फ मरगोजा को खत्म करता है और सरसों के पौधे को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता।

साहू कहते हैं कि अगर यह तरीका मरगोजा को नियंत्रित कर लेता है, तो सरसों में मेरा विश्वास फिर से बहाल हो जाएगा। उनके गांव के दूसरे किसानों ने भी लगभग 20 एकड़ में यह नई किस्म लगाई है और शुरुआती नतीजे अच्छे दिख रहे हैं। 
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