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उर्वरक उद्योग की मांग : देश में लागू हो वन नेशन, वन लाइसेंस, FCO उत्पादों पर 5% GST की मांग, जानें...

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Sun, 20 Sep 2026 08:35 AM IST
सार

  • नई दिल्ली में उर्वरक उद्योग और सरकार के बीच नियामकीय सुधारों को लेकर चर्चा हुई।
  • उद्योग ने ‘वन नेशन, वन लाइसेंस’ के लिए साझा डिजिटल डेटा स्टैक बनाने का प्रस्ताव रखा।
  • सूक्ष्म और विशेष उर्वरकों के निर्माण और निर्यात की प्रक्रिया आसान करने की मांग की गई।
  • FCO के तहत अधिसूचित सभी उत्पादों पर 5% GST लागू करने का प्रस्ताव रखा गया।
  • उद्योग ने लाइसेंस, निर्यात मंजूरी और GST व्यवस्था को अधिक आसान और समयबद्ध बनाने की मांग की।

उर्वरक उद्योग ने वन नेशन, वन लाइसेंस की मांग उठाई।
उर्वरक उद्योग ने वन नेशन, वन लाइसेंस की मांग उठाई। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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नई दिल्ली के भारत मंडपम में 17 सितंबर को इंडियन माइक्रो-फर्टिलाइजर्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन की तीसरी इंडस्ट्री-गवर्नमेंट राउंडटेबल आयोजित की गई। इसमें सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और सूक्ष्म पोषक तत्वों, विशेष उर्वरकों तथा पौध पोषण उत्पादों से जुड़े उद्योग प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में उद्योग के लिए नियमों को आसान बनाने, भारत में बने उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने और FCO के तहत अधिसूचित पौध पोषण उत्पादों पर GST को तर्कसंगत बनाने पर चर्चा हुई।

वन नेशन, वन लाइसेंस के तहत डिजिटल व्यवस्था का प्रस्ताव
बैठक के दौरान IMMA ने उर्वरक लाइसेंस और राज्यों की मार्केटिंग अनुमतियों के लिए एक राष्ट्रीय डिजिटल डेटा स्टैक बनाने का प्रस्ताव रखा। इसका उद्देश्य लाइसेंस लेने और उसके नवीनीकरण की प्रक्रिया को आसान बनाना है। IMMA के अध्यक्ष राहुल मिर्चंदानी ने कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय से इस दिशा में विचार करने का आग्रह किया। संगठन के अनुसार, राज्यों को एक समान दस्तावेजों की जरूरत होनी चाहिए और वे इन्हें राष्ट्रीय डिजिटल व्यवस्था से सीधे प्राप्त कर सकें। साथ ही, आवेदनों के निपटारे के लिए स्पष्ट समयसीमा तय की जानी चाहिए।

IMMA के उपाध्यक्ष समीर पाथरे ने कहा कि ‘वन नेशन, वन लाइसेंस’ व्यवस्था का उद्देश्य एक बार दस्तावेज जमा करना, एक बार सत्यापन कराना और कई जगह उनका उपयोग करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे राज्यों के नियामकीय अधिकारों को हटाए बिना प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जा सकता है।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में उर्वरक विभाग के उप सचिव सुबोध कुमार ने इस प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि साझा डिजिटल डेटा स्टैक और ‘वन नेशन, वन लाइसेंस’ व्यवस्था के विचार पर अमल करने के लिए विचार किया जा सकता है।

भारत को सूक्ष्म और विशेष उर्वरकों का निर्यात केंद्र बनाने पर जोर
बैठक के एक सत्र में भारत को सूक्ष्म पोषक तत्वों, कस्टमाइज्ड उर्वरकों और विशेष पौध पोषण उत्पादों के बड़े विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। उद्योग प्रतिनिधियों ने निर्यात के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) और अन्य मंजूरियां मिलने में होने वाली देरी को प्रमुख चुनौती बताया। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के उप निदेशक प्रकाश कांबले ने कहा कि मंजूरी प्रक्रिया में बदलाव के लिए DGFT और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के बीच समन्वय जरूरी होगा।

IMMA के सदस्यों ने ऐसा तंत्र बनाने का प्रस्ताव रखा, जिसके तहत उन उत्पादों के निर्माण और निर्यात की अनुमति दी जा सके, जिन पर स्पष्ट रूप से निर्यात के लिए निर्धारित उत्पाद, भारत में बिक्री के लिए नहीं’ लिखा हो।

FCO उत्पादों पर 5% GST की मांग
GST से जुड़े सत्र में IMMA के सदस्यों ने Fertilizer Control Order (FCO) के तहत अधिसूचित सभी उत्पादों पर 5% GST लागू करने की मांग रखी। उद्योग प्रतिनिधियों ने इनपुट टैक्स और तैयार उत्पादों पर लागू GST के बीच अंतर से जुड़ी समस्याओं को भी उठाया। उनके अनुसार, कई मामलों में कच्चे माल और अन्य इनपुट पर चुकाया गया कर तैयार उत्पाद पर लागू GST से अधिक होता है। इससे इनपुट टैक्स क्रेडिट जमा होता है और निर्माताओं की कार्यशील पूंजी की जरूरत बढ़ती है।

इसके अलावा, प्रतिनिधियों ने समान या मिलते-जुलते उत्पादों पर पैक के आकार अथवा वर्गीकरण के आधार पर अलग-अलग GST लागू होने की समस्या का उल्लेख किया। कस्टमाइज्ड उर्वरकों और उर्वरक मिश्रणों पर GST की दरों को लेकर भी स्पष्टता और तर्कसंगत व्यवस्था की मांग की गई।

बैठक में वन नेशन, वन लाइसेंस, FCO नियामकीय सुधार, उत्पाद प्रमाणीकरण, निर्यात में आसानी, समयबद्ध डिजिटल निर्यात मंजूरी, निर्यात के लिए विशेष उत्पाद, वैश्विक बाजार तक पहुंच और GST में तर्कसंगत बदलाव को प्रमुख मुद्दों के रूप में चिन्हित किया गया।


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