आगामी त्योहारी सीजन से पहले खाद्य तेलों की आसमान छूती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने बुधवार को एक अहम कदम उठाया है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी एक अधिसूचना के अनुसार, कच्चे सोयाबीन और पाम तेल पर लगने वाले बेसिक कस्टम ड्यूटी को 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके अलावा, कच्चे सूरजमुखी तेल पर आयात शुल्क को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है।
रिफाइंड तेलों पर भी मिली राहत
कच्चे तेलों के साथ-साथ सरकार ने रिफाइंड तेलों पर भी ड्यूटी में कटौती की है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, रिफाइंड सोयाबीन और पाम तेल पर आयात शुल्क को 32.5 प्रतिशत से घटाकर 27.5 प्रतिशत कर दिया गया है। वहीं, रिफाइंड सूरजमुखी तेल के आयात पर ड्यूटी को 32.5 प्रतिशत से घटाकर 22.5 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे पहले, जून 2025 में भी सरकार ने प्रमुख कच्चे खाद्य तेलों (सूरजमुखी, सोयाबीन और पाम) पर आयात शुल्क 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत किया था।
कीमतों में उछाल का मुख्य कारण
भारत अपनी सालाना खाद्य तेल की कुल जरूरत का 58 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है। देश में हर साल करीब 16 मिलियन टन (MT) तेल का आयात होता है, जिसमें मुख्य रूप से पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल शामिल हैं।
वैश्विक स्तर पर मालभाड़ा (फ्रेट) और बीमा लागत में वृद्धि, रुपये के मूल्य में गिरावट और इंडोनेशिया जैसे निर्यातक देशों द्वारा खाद्य तेलों का इस्तेमाल बायोफ्यूल (जैव ईंधन) के लिए किए जाने की वजह से दुनियाभर में तेल की कीमतों पर असर पड़ा है।
बंदरगाहों पर तेल की लागत में बढ़ोतरी
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, 18 सितंबर को मुंबई बंदरगाहों पर कच्चे पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल की पहुंच कीमत क्रमशः 1,265 डॉलर, 1,314 डॉलर और 1,380 डॉलर प्रति टन दर्ज की गई। पिछले साल की तुलना में पाम और सोयाबीन तेल की लागत 11 प्रतिशत अधिक रही, जबकि सूरजमुखी तेल की लागत में 7 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है।
खुदरा बाजार में पिछले साल से अधिक हैं दाम
घरेलू बाजार में खाद्य तेलों की खुदरा कीमतें पहले से ही पिछले साल के स्तर को पार कर चुकी हैं। उपभोक्ता मामलों के विभाग के मूल्य निगरानी सेल के अनुसार, बुधवार को सरसों, सोयाबीन और पाम तेल की औसत खुदरा कीमत क्रमशः 202.87 रुपये, 166.87 रुपये और 153.89 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई। पिछले साल की तुलना में इन तीनों तेलों की कीमतें क्रमशः 8 प्रतिशत, 14 प्रतिशत और 16 प्रतिशत अधिक महंगी हैं।