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BIRC 2026: चावल की पैदावार से आगे बढ़े भारत, अब गुणवत्ता और प्रोसेसिंग पर जोर- चिराग पासवान

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Fri, 23 Oct 2026 04:05 PM IST
सार

BIRC 2026 में केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने भारतीय चावल की गुणवत्ता, प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और निर्यात बढ़ाने पर जोर दिया। जानें चावल उद्योग को लेकर सरकार की प्राथमिकताएं।

चिराग पासवान ने कहा कि भारत ने चावल उत्पादन के क्षेत्र में मजबूत आधार तैयार किया है।
चिराग पासवान ने कहा कि भारत ने चावल उत्पादन के क्षेत्र में मजबूत आधार तैयार किया है। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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भारत में चावल का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है और वैश्विक चावल कारोबार में भी देश की अहम हिस्सेदारी है। अब जरूरत केवल उत्पादन बढ़ाने की नहीं, बल्कि चावल की गुणवत्ता सुधारने, उससे ज्यादा मूल्य वाले उत्पाद तैयार करने और खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देने की है। केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन (BIRC) 2026 में यह बात कही।

उन्होंने कहा कि भारत को वैश्विक बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए चावल की गुणवत्ता, अनुसंधान, नई तकनीक और टिकाऊ उत्पादन पर ध्यान देना होगा। इसके साथ ही, चावल की खेती से लेकर प्रसंस्करण तक इस्तेमाल होने वाली मशीनों और तकनीक का देश में ही निर्माण बढ़ाने की जरूरत है।

उत्पादन के साथ चावल की गुणवत्ता पर भी ध्यान जरूरी
चिराग पासवान ने कहा कि भारत ने चावल उत्पादन के क्षेत्र में मजबूत आधार तैयार किया है। अब इस उत्पादन का अधिक मूल्य हासिल करने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा, “जब हमारे पास इतना उत्पादन है, तो अब हमें उसके मूल्य पर बात करनी चाहिए। जब हमारे पास इतना उत्पादन है, तो हमें उत्पाद पर जोर देना चाहिए।”

मंत्री के मुताबिक, चावल क्षेत्र में उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने, उनकी पहचान और आपूर्ति की जानकारी उपलब्ध कराने तथा टिकाऊ तरीकों को अपनाने की जरूरत है। इससे भारतीय चावल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर पहचान मिल सकती है।

उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक चावल कारोबार में करीब 40 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है। ऐसे में निर्यात को मजबूत बनाने के लिए बेहतर गुणवत्ता, अनुसंधान और दूसरे देशों के साथ तकनीक का आदान-प्रदान महत्वपूर्ण है।

चावल से ज्यादा मूल्य वाले उत्पाद बनाने की जरूरत
मंत्री ने कहा कि कृषि उत्पादन को अधिक मूल्य वाले उत्पादों में बदलने पर ध्यान देना चाहिए। इसके लिए खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की भूमिका अहम है। चावल और दूसरे कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग बढ़ने से उत्पादों में विविधता लाने और उनकी कीमत बढ़ाने के अवसर मिल सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत को केवल कच्चे कृषि उत्पादों के उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनसे बेहतर और ज्यादा मूल्य वाले उत्पाद तैयार करने की दिशा में भी काम करना चाहिए।

पासवान ने खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र पर अधिक ध्यान देने की जरूरत बताते हुए कहा कि बीते वर्षों में इस क्षेत्र को जितना महत्व मिलना चाहिए था, उतना नहीं मिला। अब देश के विकास के अगले चरण में इस क्षेत्र को प्राथमिकता देना जरूरी है।

देश में ही बनें खेती और प्रोसेसिंग की मशीनें
चिराग पासवान ने चावल की पूरी उत्पादन शृंखला में इस्तेमाल होने वाली मशीनों और तकनीक के घरेलू निर्माण पर भी जोर दिया। इसमें धान की खेती से लेकर चावल की प्रोसेसिंग तक इस्तेमाल होने वाले उपकरण शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि इस बात पर विचार किया जाना चाहिए कि इन मशीनों और तकनीकों का निर्माण भारत में कैसे बढ़ाया जा सकता है। इससे घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा और आयातित तकनीक पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। नई तकनीक और अनुसंधान को बढ़ावा देने से चावल उद्योग की कार्यक्षमता और प्रतिस्पर्धा में सुधार के अवसर भी बन सकते हैं।

2047 तक विकसित भारत बनाने में खाद्य प्रसंस्करण की अहम भूमिका
मंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने के लक्ष्य में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि पहले देश के सामने खाद्यान्न की कमी दूर करने और उत्पादन बढ़ाने की चुनौती थी। अब अगला कदम कृषि उत्पादों का बेहतर इस्तेमाल करने, उनकी प्रोसेसिंग बढ़ाने और उनसे अधिक मूल्य हासिल करने का होना चाहिए।

पासवान ने कहा कि सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक खाद्य आपूर्ति के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है। इसके तहत देश की घरेलू जरूरतें पूरी करने के साथ दूसरे देशों को भी खाद्य उत्पाद उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

व्यापार समझौतों से निर्यात को मिल सकता है बढ़ावा
चिराग पासवान ने कहा कि दूसरे देशों के साथ व्यापार समझौते भारतीय कारोबारियों के लिए नए अवसर खोल सकते हैं। इनसे भारतीय कंपनियों को निर्यात बढ़ाने के साथ अंतरराष्ट्रीय तकनीक और बेहतर कामकाजी तरीकों को समझने का मौका मिल सकता है।

उन्होंने सम्मेलन के आयोजकों से भी कहा कि कार्यक्रम में हुई चर्चाओं, मिले सुझावों और तैयार की गई नीतिगत सिफारिशों को उनके मंत्रालय के साथ साझा किया जाए। इससे चावल उद्योग की चुनौतियों को समझने और सुधार के क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।

BIRC 2026 में जुटे किसान, निर्यातक और शोधकर्ता
तीन दिवसीय भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन (BIRC) 2026 में किसान, निर्यातक, उद्योग प्रतिनिधि और शोधकर्ता हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन में चावल क्षेत्र से जुड़े मुद्दों, नई तकनीकों और कारोबार को बेहतर बनाने के तरीकों पर चर्चा की जा रही है।

चिराग पासवान ने कहा कि आपसी सहयोग, तकनीक को अपनाने और कृषि उत्पादों का मूल्य बढ़ाने पर जोर देकर भारत के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।

 
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